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कैसे करें कम वजन के नवजात शिशुओं की देखभाल

कैसे करें कम वजन के नवजात शिशुओं की देखभाल : Low weight newborn care : Intrauterine growth restriction (IUGR) Causes, Diagnosis, Complications, Treatment, and More

यदि बच्चों का गर्भाधारण का काल तो पूरा हो गया है, किंतु बच्चे अभी भी कम वजन का है अर्थात् गर्भ के अंदर ही उसका विकास अवरूद्ध हो गया है. इन्हें आई.यू.जी.आर. या इंट्रा यूटराइन ग्रोथ रिटार्डेशन (Intrauterine growth retardation) भी कहते हैं. हमारे देश की प्रमुख समस्या ग्रुप दो की है. ग्रुप ए की समस्या नहीं है ऐसा नहीं, किंतु हमारे देश में विशेषत: आई यू.जी.आर. ही है.

हमारे देश में 100 में से 30 बच्चे कम वजन के पैदा होते है. इन बच्चों में कुछ विशेष परेशानियां होती है. जिनका हमें विशेष ख्याल रखना पड़ता है. शिशुकाल अर्थात् सामान्य बच्चों की तुलना में इनकी मृत्युदर स्वाभाविक ही अधिक होती है.

इनमें ठंड से बचने के संसाधन जो कि सामान्य बच्चों में विकसित होते हैं, वे इन बच्चों में विकसित नहीं हो पाते हैं, अत: ठंड लगने की व उससे होने वाले दुष्परिणाम इन बच्चों में देखने को मिलते हैं. यहां तक कि ठंड के कारण इन बच्चों की मृत्यु भी हो जाती है.

इन बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बहुत कम होती है अत: दस्त रोग, श्वसन के रोग व अन्य बीमारियां इन्हें जल्दी पकड़ लेती हैं. इनका शारीरिक विकास भी अन्य बच्चों की तुलना में अत्यंत धीमा होता है. चूंकि इनकी बाढ़ मां के गर्भ में ही कम हो चुकी होती है, अत: जन्म के बाद विशेष पोषण भी इनकी शारीरिक वृद्धि में कुछ फायदा नहीं करता है.

न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक विकास में भी ऐसे बच्चे पिछड़ जाते हैं. आपसी सामंजस्य, भाषा का विकास इनमें धीमा होता है कुल मिलाकर इनका बौद्धिक स्तर सामान्य बच्चों की तुलना में कम होता है.

जरा कल्पना कीजिए उस देश की जिसके 30 प्रतिशत नौनिहाल जन्म से ही कम वजन के हों, जिनका शारीरिक व मानसिक विकास कम हो. बार-बार बीमार पडऩे वाले, कुपोषित बच्चों, उसे कैसे नई सहस्राब्दी में एक समृद्घ राष्ट्र बना पाएंगे. यही नहीं ये बच्चे बचपन पार कम उम्र में, युवावस्था में डायबिटीज व हृदय रोग के शिकार, सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक प्रतिशत में होते हैं.

इस तरह से कम वजन का शिशु सिर्फ कुछ माह की परेशानी नहीं है वरन् इसके दूरगामी दुष्परिणाम हैं. यदि जन्म के समय कम वजन के शिशु की सही देखभाल की जाये जिससे कि वह सामान्य शिशु कहला सके ये तो सही है.

पर क्या ये हमारा दायित्व नहीं है कि ऐसे कारणों को जानें और न सिर्फ जाने बल्कि उनका निदान करें, जिनसे की जन्म के समय से ही बच्चा कमजोर होता है?

जरा विचार करें कि आखिर यह परेशानी क्यों है क्या हम इन्हें दूर कर सकते हैं?

कम वजन के बच्चों के दो तरह के कारण होते है। जैसे-जेनेटिक या अनुवांशिक कारण.

लेकिन कई कारण ऐसे हैं जिन्हें जरा सी सावधानी से रोका जा सकता है. जैसे-गर्भवस्था के दौरान मां का वजन कम से कम 10 किलो बढ़े.

प्रत्येक स्वास्थ्य जांच के दौरान यदि गर्भवती का वजन ठीक से नहीं बढ़ रहा है, तो उसके आहार की जांच करें व उपयुक्त सलाह लेकर विशेष पोषण प्रदान करें. यदि वजन अच्छा बढ़ेगा तो बच्चा भी स्वस्थ व सामान्य होगा.

Iron folic acid pills during pregnancy, should be taken properly

मां में खून की कमी गर्भस्थ शिशु पर दुष्प्रभाव पड़ती है. अत: गर्भावस्था के दौरान मां को आयरन, कैल्शियम व फॉलिक एसिड की गोली अवश्य दें. फॉलिक एसिड से बच्चे का स्नायुतंत्र मजबूत होता है.

आयरन, फॉलिक एसिड की गोलियां, सही तरह से ली जायं, निर्धारित मात्रा में ली जाये इसका पूरा ध्यान परिवार के सदस्यों को रखना होगा. यही नहीं वरन् किशोरी बालिकाओं को भी वर्ष में कम से कम 3 माह आयरन की गोली अवश्य दें. क्यों कि यही वह नींव है, जिस पर भविष्य के कई सपने आधारित है. किशोरी बालिका ही तो भविष्य की मां है.

यदि मां को गर्भावस्था के दौरान क्षमता से अधिक काम करना पड़े, उसे उचित आराम नहीं मिले, साथ ही पोषण व खून की कमी भी हो तो नवजात शिशु कमजोर ही होगा व खतरे से घिरा रहेगा.

इन सबके अलावा मां को मलेरिया या अन्य कोई संक्रामक रोग न हो. किसी भी तरह का संक्रामक रोग सीधे-सीधे गर्भस्थ शिशु पर दुष्प्रभाव डालता है.

पेशाब की जांच के द्वारा संक्रमण व अन्य खराबी की जांच जरूर होना चाहिए. महिला का रक्तचाप का भी बराबर ध्यान में रखा जाना चाहिए.

डा. नुपुर गुप्ता

कंसलेंट ऑब्स्टट्रिशन एंड गाइनोकोलोजिस्ट, निदेशक, वेल वुमेन क्लीनिक, गुरु ग्राम

(नोट – यह समाचार किसी भी हालत में चिकित्सकीय परामर्श नहीं है। जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई अव्यावसायिक रिपोर्ट मात्र है। आप इस समाचार के आधार पर कोई निर्णय कतई नहीं ले सकते। स्वयं डॉक्टर न बनें किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लें।)

(संप्रेषण)

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