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गांधी और भगत सिंह… विचार बड़ा कि बन्दूक ?

गांधी और भगत सिंह… विचार बड़ा कि बन्दूक ?

पूजा श्रीवास्तव

दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल…साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल…ये गीत हम सब की अंतश्चेतना में रचा बसा हुआ है। लेकिन आज सार्वजनिक तौर पर इस गीत के मर्म का मज़ाक उड़ाया जाने लगा है। ऐसा कहा जाने लगा है कि आज़ादी हमें बापू के अहिंसक आंदोलनों ने नहीं भगत सिंह के बम ने दिलाई। उनके डर से अंग्रेज भागे ये देश छोड़ के।

आज़ादी के सतत् संघर्ष में भगत सिंह के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। लेकिन इस बहस में विचार की ताकत और उस नैतिक बल के महत्व को अक्सर खारिज कर दिया जाता है जो किसी भी देश के नागरिकों को अपना तन मन धन सब कुछ त्याग कर एक एक अधनंगे फ़क़ीर के पीछे चल देने को प्रेरित कर देता है। क्या बिना विचार की शक्ति और बिना नैतिक बल के भगत सिंह, भगत सिंह हो सकते थे? क्या बन्दूक और तलवार की ताक़त विचार की शक्ति से बड़ी है? हरगिज़ नहीं।

दरअसल विचार के अस्तित्व को खारिज करके आप उस परम्परा को खारिज करते हैं जिससे गुज़र कर आज हमारी सभ्यता यहाँ तक पहुंची है। एक बर्बर और आदम युग से लेकर चाँद तक पहुँचने तक का सफर कितना लम्बा और श्रम साध्य रहा है इसे समझना कोई मुश्किल नहीं। जंगलों में विचरण करने वाले एक पशुवत् मनुष्य से लेकर घर गृहस्थी बसाने वाले, कविता-कहानी लिखने वाले मनुष्य ने विकास के न जाने कितने चरण देखे हैं। और इस सफर में उसका साथ आपके बम और बन्दूक ने नहीं, बल्कि अमूर्त कल्पनाओं और विचारों ने ही दिया है जिन्हें आप आज खारिज करने और मनुष्यता को एक बार फिर आदिम युग में धकेलने पर तुले हैं।

ज़रा कभी गौर कीजियेगा अपनी भाषा पर। कहीं आप उनमें से तो नहीं जो थोड़ी सी आलोचना सुन कर किसी को भी बंगाल की खाड़ी या पाकिस्तान में फेंक देने की बात करने लगते हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि आप भी मानते हैं कि ये किताबें लिखने वाले, सवाल उठाने वाले देशद्रोही हैं और इन सब को या तो जेल में डाल देना चाहिए या गोली मार देनी चाहिए?

अगर ऐसा है तो यकीन मानिए कि सुबह उठते ही अपने प्रियजनों को बेहद वेजिटेरियन किस्म के सुप्रभात वाले मेसेज भेजने के बावजूद, बिना स्नान ध्यान किए अन्न जल को हाथ न लगाने के बावजूद, सदैव शाकाहार अपनाने और मांसाहार की आलोचना करने के बावजूद आप बेहद हिंसक व्यक्ति हैं क्योंकि एक हिंसक व्यक्ति ही विचार को नहीं बम और बन्दूक को महत्वपूर्ण मानता है।

(पूजा श्रीवास्तव की एफबी टाइमलाइन से साभार)

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