धूम्रपान और प्रदूषण से राजस्थान में बढ़ रहे हैं पल्मनरी रोग

जयपुर, 25 सितंबर 2019. गलत जीवनशैली और खराब हवा (Wrong lifestyle and bad air) के कारण राजस्थान में फेफड़ों की बीमारियों (Lung diseases) का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में गंभीर पल्मोनरी मरीजों की संख्या (Number of serious pulmonary patients in Rajasthan) में बढ़ोतरी हुई है …
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धूम्रपान और प्रदूषण से राजस्थान में बढ़ रहे हैं पल्मनरी रोग

जयपुर, 25 सितंबर 2019. गलत जीवनशैली और खराब हवा (Wrong lifestyle and bad air) के कारण राजस्थान में फेफड़ों की बीमारियों (Lung diseases) का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में गंभीर पल्मोनरी मरीजों की संख्या (Number of serious pulmonary patients in Rajasthan) में बढ़ोतरी हुई है और इसके लिए धूम्रपान और खराब हवा मुख्य रूप से जिम्मेदार है।

यह जानकारी नई दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल (Max Super Specialty Hospital, Saket, New Delhi) के विशेषज्ञों ने आज यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में दी।

मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल, साकेत के एडल्ट सीटीवीएस, हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट (Heart and lung transplant) के एसोसिएट डायरेक्टर और स्पेशलिस्ट डॉ. राहुल चंदोला ने बताया कि आज दुनिया भर में, लाखों लोग इंटरस्टीशियल लंग डिजीज, Interstitial lung disease Also called ILD (आईएलडी) सीओपीडी और ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों से ग्रस्त हैं और इसके लिए अस्वास्थ्यकर जीवनशैली के अलावा आनुवांशिक असामान्यताएं और बढ़ते प्रदूषण मुख्य तौर पर जिम्मेदार हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पल्मोनरी रोगों से गंभीर रूप से पीड़ित रोगियों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिसके लिए धूम्रपान के साथ- साथ खराब हवा जिम्मेदार है।

Lung transplant facility in North India

जयपुर वासियों में पल्मोनरी संबंधी समस्याओं के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. राहुल चंदोला ने बताया कि जो लोग नियमित रूप से जहरीले धुएं और पार्टिकुलेट मैटर के संपर्क में रहते हैं उनमें पल्मोनरी फाइब्रोसिस (Pulmonary fibrosis) (आईएलडी) होने का खतरा अधिक होता है।

उन्होंने बताया कि इस तरह के बढ़ते मामलों और इन जानलेवा बीमारियों की रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक करना जरूरी है। अंतिम चरण में पहुंच चुके फेफड़ों के रोगों से ग्रस्त लोगों की जीवन लंबा नहीं होता है और इन रोगियों को लंबे समय तक जीवित रखने के लिए फेफड़े का प्रत्यारोपण (Lung transplant) जरूरी होता है। अंतिम चरण के फेफड़ों के रोगों से ग्रस्त लोगों के लिए फेफड़ों के प्रत्यारोपण की सुविधा अब उत्तर भारत में मैक्स हॉस्पिटल, साकेत में उपलब्ध है।

Max Healthcare organised press conference to generate awareness on rising incidents of pulmonary diseases. There is an increase in the number of patients with end stage pulmonary diseases in the past few years due to bad air quality .

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