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मोदी सरकार का संविधानविहीन नया चेहरा – भाजपा शासन में गुंडे मस्त और बेलगाम

मोदी सरकार का संविधानविहीन नया चेहरा – भाजपा शासन में गुंडे मस्त और बेलगाम

जगदीश्वर चतुर्वेदी

लोकतंत्र को पेशेवर लोग चलाते हैं। यह तंत्र गैर पेशेवरों के बूते के बाहर है। राजनीति में भी पेशेवर राजनीतिज्ञों की जरूरत होती है। लोकतंत्र में प्रतिवाद के लिए भी पेशेवर राजनीतिज्ञ होना जरूरी है। पेशेवर दल होना जरूरी है। दलविहीन राजनीति लोकतंत्र की बाधा है। फासिज्म का खेल है। दिलचस्प पहलू यह है कि लोकतंत्र में सभी रंगत के संगठन और विचारों की सक्रियता देखी जा सकती है।

मोदी सरकार पारदर्शिता के दावे पर चल रही है, लेकिन स्वयं पारदर्शिता को नहीं मानती। मसलन्, सीबीआई बताए कि उसके पास कितनी एफआईआर दर्ज हैं जिन पर एक्शन नहीं हुआ है ? एफआईआर दर्ज होने के कितने दिन बाद छापे मारती है ? यह न्याय का तकाजा है डाटा सार्वजनिक करे !

भाजपा शासन में गुंडे मस्त और बेलगाम हैं, कुछ समय पहले गुड़गांव में गुंडों ने गैंगरेप किया और चलती ऑटो से नौ महिने की बच्ची को फेंककर मार डाला, पीड़ित महिला के साथ कई घंटे तक उत्पीड़न और बलात्कार हुआ, लेकिन मोदी सरकार कान में तेल डालकर बैठी है।

एक अन्य पहलू देखें, कन्हैया कुमार का यदि दाऊद से लिंक मिल जाता और मीडिया में एक बार भी रिपोर्ट हो जाता तो राजनाथ सिंह ज़रूर बोलते! लेकिन खडसे पर आप क्यों नहीं बोले ? शर्म आ रही है कि जिस दल का केन्द्र में शासन है उसके क़द्दावर नेता खडसे का माफ़िया सरगना दाऊद से संबंध है। यह संबंध नया नहीं है। सब जानते हैं दाऊद को सम्मानसहित भारत लाने की भाजपा नेता खुलकर वकालत करते रहे हैं। एक बडे भाजपा नेता तो दाऊद के वकील तक हैं । कोई नैतिकता नहीं है भाजपाईयों में दाऊद के संदर्भ में ।

बाबा रामदेव की वायदा फरामोश भगवा राजनीति पर साक़िब लखनवी का एक शेर है- "साफ कह दीजिए "वायदा कियाथा किसने ?" ,उज़्र क्या चाहिये, झूठों को मुकरने के लिये।।"

अंत में, साहित्यकारों की क़्या कोई समस्या नहीं ? चुप क्यों हैं साहित्यकार और पाठक ? मोदी सरकार जिस राह पर चल रही है उससे पुस्तक, अध्ययन और अध्यापन और भी दुर्लभ हो जाएगा|

असल में, समाज में एक तबका मोदी को लेकर भावुक है। लेकिन इनकी भावुकता मात्र भावुकता नहीं है इसमें संविधान हीनता भी शामिल है जो लोकतंत्र के लिए जहर है।

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