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मोदीपंथियों की बेशर्म हरकतें…मोदीजी मजे में हैं ! पहले मीडिया और भक्तों से कुटवाते हैं, फिर पुलिस केस

मोदीपंथियों की बेशर्म हरकतें

मोदीजी मजे में हैं ! पहले मीडिया और भक्तों से कुटवाते हैं, फिर पुलिस केस।

जगदीश्वर चतुर्वेदी

बलात्कार पर टॉक शो देखो ! इसमें भाजपा और पुलिस हिमायतियों की बेशर्म चीख़ें और हेकड़ी देखें। कितना शर्मनाक समय है कि किसी भाजपा नेता का, मोदीजी का बलात्कार के खिलाफ कोई बयान तक नहीं आया। दिल्ली में बलात्कार हो या बाहर, भाजपा नेता हेकड़ी दिखाएँ, यह शर्मनाक है। इससे ज़्यादा बर्बर कौन सा समय होगा ?

दिल्ली में दलित बलात्कार के शिकार, हरियाणा में वे ही शिकार। दोनों जगह भाजपा सरकार! दोनों जगह सरकार मूकदर्शक! यही है आरएसएस और मोदी सरकार का संयुक्त स्त्री और दलित विरोधी एजेण्डा।

पीएम मोदी झूठ बोलने में माहिर हैं, वे कह रहे हैं विकास सब दुखों की दवा है! मुस्लिम हत्या उनकी जीत की दवा है। विकास माने मुस्लिम दमन।

संघ ने पहले कहा राम ही सब दुखों की दवा है, अब उनके बटुक कह रहे हैं हिंसा और अराजकता सब दुखों की दवा है! सड़क -भवन को वे विकास नहीं कहते, अब वे सफेद झूठ बोलने को विकास कहते हैं!

नागपुरी बटुकों की भजनमंडली "हाय मुसलमान, बुरे मुसलमान, कातिल मुसलमान, शैतान मुसलमान", कहते हुए मीडिया में कूद पड़ी है, यही इन बटुकों की आदर्श प्रचार शैली है। वे तर्क दे रहे हैं कि देश बचाना है तो इन शैतानों को दफ्न करो, इनके बारे में घृणा फैलाओ, उनके आजीविका अर्थतंत्र को तोड़ो, उनको समाज में अलग-थलग करो। उनकी जमा संपदा को नष्ट करो।

मुसलमान को शैतान बनाने की नागपुरी शैली रंग दिखाने लगी है, वे मुसलमान बनाम हिन्दू के ध्रुवीकरण में लग गए हैं, वे चाहते हैं आम आदमी, मुसलमानों से दूरी रखे, उन पर संदेह करे, उनको बुरा माने, उनको कातिल माने, आतंकी और फंडामेंटलिस्ट माने। जबकि मुसलमान इस देश के जिम्मेदार नागरिक हैं।यही वह बिंदु है जिसको नए सिरे से उठाने की जरुरत है। यह बताने की जरूरत है कि मुसलमान इस देश के बाशिंदा हैं और वे शैतान नहीं हैं, वे भी इंसान हैं। उनकी देश के संविधान में आस्था है। मुसलमानों से घृणा करने का अर्थ है देश को नागपुरी संतरे की तरह फांक-फांक कर देना।

दूसरी ओर देश की दशा बेहतर नहीं है,

भारत में रहने वालों के जीवन स्तर में कितना सुधार हुआ है इसका अंदाजा तथ्यों और रिपोर्ट्स के आधार पर लागया जा सकता है। अगर इसी तरह की एक रिपोर्ट को आधार माने तो लोगों के जीवन में कुछ खास बदलाव नहीं आए हैं। 2013 में देश में स्वास्थ्य, शिक्षा और नागरिक सुविधाओं की जो स्थिति थी कमोबेश वही हालात आज भी हैं। 2013 में मानव विकास सूचकांक में 135वें स्थान पर था और इस साल भी वह उसी स्थान पर बना रहा जो इस बात का संकेत है कि देश को नागरिकों के जीवनस्तर को ऊपर उठाने की दिशा में अभी लम्बा सफर तय करना है।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की मानव विकास सूचकांक रिपोर्ट (यूएनडीपी) में कहा गया है, 'वर्ष 2013 के लिए भारत का मानव विकास सूचकांक मूल्य 0.586 रहा – जो मानव विकास के मध्यम वर्ग में आता है – और 187 देशों की सूची में इस देश को 135वें स्थान पर रखा गया है। 1980 से 2013 के बीच भारत का मानव विकास सूचकांक मूल्य 0.369 से सुधर कर 0.586 पर पहुंच है।' ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के बीच भारत का मानव विकास सूचकांक मूल्य सबसे कम है। रिपोर्ट में कहा गया 'भारत जीवन प्रत्याशा को छोड़कर मानव विकास सूचकांक की सभी कसौटियों में अन्य ब्रिक्स देशों की तुलना में सबसे नीचे है।

इसके अलावा 39केन्द्रीय वि .वि. में 6,251 शिक्षक पद खाली हैं। यह शिक्षा की तरक्की का प्रतीक है !!कुल शिक्षक पद हैं 16,692 । मोदीजी ने चार साल में ये पद नहीं भरे हैं।

मोदीपंथियों से अनेक लोग परेशान हैं, मोदीपंथी राजनीति के खिलाफ फेसबुक पर पहला सटीक कदम यही हो सकता है कि मोदी के पक्ष में अंटशंट लिखने वालों को ब्लॉग कर दिया जाय। हमें फेसबुक पर लोकतांत्रिक सोच को बढ़ावा देने का काम करना चाहिए।

गंदी भाषा, गाली-गलौज, अनर्गल भाषा, अ-राजनीतिक भाषा, बेतुकी बातें मोदीपंथियों की सामान्य विशेषताएं हैं। नमूना देखें- मसलन् आपने मोदी के किसी बयान पर क्रिटिकल लिखा, मोदीपंथी ठीक कहेंगे –राहुल बाबा से क्यों नहीं पूछते। राहुल पर क्यों नहीं लिखते आदि ।

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