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मोदी का गुण : वह जिस शब्द का प्रयोग करते हैं वह मर जाता है, जैसे- विकास, गुजरात, अच्छे दिन, हिन्दुत्व

मोदी युग की लाक्षणिक विशेषताएं-

जगदीश्वर चतुर्वेदी

१.मोदी का गुण है वह जिस शब्द का प्रयोग करते हैं वह मर जाता है। जैसे- विकास, गुजरात, अच्छे दिन, हिन्दुत्व आदि।

२.मोदी की कार्यशैली देखें – मोदी ने 6 साल के भव्य आप्टे की चिट्ठी का जवाब दिया है, लेकिन अन्ना हजारे की चिट्ठी का वे अभी तक जवाब देने के लिए समय नहीं निकाल पाए हैं। मोदी जी यही है देशसेवा !! उल्लेखनीय है देश में लोकपाल का गठन करने के बारे में अन्ना ने कई साल पहले पत्र दिया था,जिसका आज तक मोदी ने जवाब तक नहीं दिया है, जबकि लोकपाल कानून संसद से कई साल पहले पास हो चुका है।



३.नरेन्द्र मोदी की भाषा में शब्द का अर्थ विलोम में रहता है। कम्प्लीट बायनरी अपोजीशन में।

४.भाजपा में मोदी का दबदबा कम हो रहा है, ह्विप जारी करने के बावजूद भाजपा सांसद संसदीय दल की साप्ताहिक बैठक में नहीं आ रहे, संसद में भी यदा- कदा आते हैं। मोदी झल्लाए हुए हैं। पीएम का झल्लाना या सांसदों की हाजिरी लेना संसदीय मर्यादा के अनुकूल नहीं है। लोकतंत्र तो स्वैच्छिक शिरकत का तंत्र है, दवाब या आदेशों से शिरकत तो गंवारों के लिए या अधिनायकवादी दल में होती है।

५.हर समय इलेक्शन मोड में रहो!

६.संस्कृति में संघ के मानक हैं गजेन्द्र चौहान! राजनीति में योगी आदित्य नाथ! ये बटुक युग के हीरो हैं! अब करो बहस और महानता की खोज करो !

७.पीएम मोदी की मुश्किल यह है कि उनके हाथ- पैर-जुबान सब संविधान की धाराओं से बंधे हैं, वरना उनका नेचुरल भावबोध वही है जो मोहन भागवत का है, मोदी की आत्मा में मोहन रहते हैं!!

८.अनपढ़ मंत्री यदि आईआईटी के निदेशकों के इंटरव्यू लेगी तो अनिल काकोदकर जैसे विश्वविख्यात वैज्ञानिक का तो बोर्ड में कोई काम ही नहीं हो सकता। अनपढ़ मंत्री ज्ञानीसमाज का अपमान होता है। अनिल काकोदकर ने आईआईटी के निदेशकमंडल के सदर के पद से इस्तीफा देकर सही किया था। सवाल यह है मंत्री क्यों रहेगा निदेशकों के चयन में ,रहेगा भी तो चुप रहे। विशेषज्ञ अपना काम करें,फैसले लें।

लेकिन संघ की नीति है कि भारत में विगत 65सालों में जो भी वैज्ञानिक, ज्ञान-विज्ञान का ढांचा बनाया गया है उसे क्षतिग्रस्त करो।

मंत्री महोदया उसी लक्ष्य में निशाने साध रही हैं। मेक इंडिया, डंकी इंडिया!!

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