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भाजपा के पदाधिकारियों को दे दिए करोड़ों के ठेके, राज्य की तिजोरी की लूट और भ्रष्टाचार !

भाजपा के पदाधिकारियों को दे दिए करोड़ों के ठेके, राज्य की तिजोरी की लूट और भ्रष्टाचार !

·  रजनीश वैश्य कर रहे हैं मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की अवमानना।           

·  भाजपा के पदाधिकारियों को दिए करोड़ों के ठेके, राज्य की तिजोरी की लूट और भ्रष्टाचार !

·   पुनर्वास स्थल के लिए जमीन देने वालों को 2 हेक्टेयर जमीन या 60 लाख का अधिकार पात्रता अनुसार होगा, 15 लाख का नहीं ! रजनीश वैश्य भ्रम ना फैलाएं।                                     



 नई दिल्ली। नर्मदा बचाओ आन्दोलन ने लगाया है कि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रजनीश वैश्य ने भाजपा के पदाधिकारियों को करोड़ों के ठेके दिए हैं और वे राज्य की तिजोरी की लूट और भ्रष्टाचार में लिप्तहैं।

नर्मदा बचाओ आन्दोलन कीतरफ से देवराम कनेरा, जगदीश पटेल, बालाराम यादव, सावा मछुआरा, भगवती पाटीदार, राहुल यादव और मेधा पाटकर ने यह आरोप एक संयुक्त विज्ञप्ति में लगाया है। विज्ञप्तिकामूल पाठ निम्नवत् है

“  श्री रजनीश वैश्य नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने महीनों बाद नर्मदा घाटी का भ्रमण जरुर किया, लेकिन भाजपा पदाधिकारियों को करोड़ों के ठेके फिर से देने की बात ही आगे बढाई है। बडवानी के भाजपा जिलाध्यक्ष ओम खण्डेलवाल जी को पहले ही असफल रहे टीनशेड के कार्य योजना में करोड़ों रुपये प्राप्त हुए है और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने उन्हीं के साथ पुनर्वास स्थल पर निर्माण कार्य आगे बढ़ाना तय किया जो विस्थापितों के हक की वितीय संसाधन की लूट है।                         

श्री वैश्य ने यह तो मंजूर कर ही लिया कि पुनर्वास स्थल पर सड़क, पानी, बिजली की असुविधा बरकरार है। और यह भी मंजूर किया की टापू बनने वाले क्षेत्र के पुल – पुलियाओं का निर्माण भी बाकी है।                     

श्री वैश्य ने इस बात का जवाब भी देना चाहिए की उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्वास स्थल पर सभी कार्यो की पूर्ती का दावा करने वाले शपथ पत्र किस आधार पर पेश किये ? उन्होंने इस बात का भी जवाब देना चाहिए की सरदार सरोवर से किन – किन गावों की भूमि टापू बनेगी ! कितना क्षेत्र ? उनका हक क्या होगा ?            

श्री वैश्य ने यह भी मंजूर किया कि 28/11/2017 के आदेश अनुसार हजारों घर प्लाटों का रजिस्ट्रीकरण भी नहीं किया गया है। तो क्या यह अ अवमानना नहीं ? इससे यह भी साबित होता है कि भूमि आबंटन की भू-राजस्व संहिता का भी उल्लंघन आज तक किया गया और हजारों को किया गया भूमि आबंटन अधिकृत नहीं है। रजनीश वैश्य जी जवाब दे ! यह सब कार्य अधूरे या आयोजित भी न होते हुए सरदार सरोवर की उंचाई किस आधार पर बढाई गई और लोकार्पण किस आधार पर किया गया।श्री वैश्य जैसे उच्च अधिकारीयों ने मध्यप्रदेश शासन की ओर से कोर्ट के फैसले की अवमानना एवं झूठे शपथ पत्रों को आगे बढाया है।  सरदार सरोवर के विस्थापितों के लाभ सम्बन्धित हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ गलत जानकारी फ़ैलाने के दोषी है। श्री रजनीश वैश्य जानते है कि पुनर्वास स्थल के लिए जमीन देने वालों के लिए सभी आदिवासी, दलित तथा जिनके परिवार में कम जमीन बची है, ऐसे सभी परिवारों को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने श्री मूलचंद झापडीया के केस में परिवार को 2 हेक्टेयर जमीन का याने सर्वोच्च अदालत के 8/2/2017 के फैसले अनुसार 60 लाख रु. का लाभ मंजूर किया है। उच्च न्यायालय ने इस सम्बन्धित GRA के आदेश को पुनर्वास नीति के अनुसार उचित ठहराया है। इसके बावजूद मात्र 15 लाख रु. लेने की बात तथा उसे जल्दी से स्वीकारने का गलत सन्देश श्री वैश्य ने दिया है। क्या इसीलिए थी उनकी घाटी की मुलाक़ात ? नर्मदा बचाओ आन्दोलन आगाह करना चाहता है की नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण  गलत जानकारी का भ्रम फैला रहा है। विस्थापित अधिकारी दलालों के भ्रम फ़ैलाने के जाल में न आये और धीरज,जीवरता के साथ, अपना पूरा अधिकार लेकर रहे। जब तक संपूर्ण पुनर्वास नहीं होता, तब तक अपनी जमीन, अपना मकान के साथ गावं जीवित रहेगा।“

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