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कारपोरेट लूट की ढाल बन चुका है राष्ट्रवाद मोदी इसकी ढाल से अपने यार सरमायेदारों द्वारा देश की लूट को संरक्षण दे रहे

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hastakshep
21 Feb 2018
बौद्ध धर्म की आड़ में देश के खिलाफ कोई साजिश तो नहीं?

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मधुवन दत्त चतुर्वेदी

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राष्ट्रवाद कारपोरेट लूट की ढाल बन चुका है। यह न्याय, शांति, विवेक और लोकाधिकारों के विचार को दीमक की तरह चाट रहा है। जनद्रोही है राष्ट्रवाद। नरेन्द्र मोदी इसी राष्ट्रवाद की ढाल से अपने यार सरमायेदारों द्वारा देश की लूट को संरक्षण दे रहे हैं।

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औपनिवेशिक दासता से मुक्ति के उद्योग में राष्ट्रवाद की अपनी भूमिका सकारात्मक थी। अधिकांश मुक्ति योद्धा परस्पर अंतर्राष्ट्रीय बंधुत्व के पक्षधर थे। उस लक्ष्य की प्राप्ति के बाद राष्ट्रवाद अपनी प्रासंगिकता खो चुका है। स्वतंत्र सार्वभौम देशों के लिए राष्ट्रवाद उन देशों के लोकतान्त्रिक विकास की सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आया है। यह शांति और न्याय का शत्रु हो गया है। जो चीज कभी मनुष्य की स्वातंत्र्य कामना की ध्वजवाहक थी, वही अब भारत जैसे देशों में नागरिकों की स्वतंत्रता की शत्रु हो गयी है। हमें तय करना होगा कि हम न्याय और शांति चाहते हैं, नागरिकों की स्वतंत्रता चाहते हैं या फिर राष्ट्रवाद की लाश में कुलबुलाते कीड़े बनकर रहना चाहते हैं।

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पूर्णतः नग्न और निर्ल्लज पूंजीवाद के नायक हैं नरेन्द्र मोदी।

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वह देशी और विदेशी पूंजी के हाथों भारत की लूट के संरक्षक हैं। कारपोरेट पूंजी की चेरी है भारत में हिन्दू साम्प्रदायिकता। हिंदुत्व की राजनीति जहरखुरानी गिरोह का नशा है जो उतरेगा तब पता चलेगा कि मुल्क लुटापिटा पड़ा है।

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(मधुवन दत्त चतुर्वेदी की एफबी टिप्पणियों का समुच्चय)

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