निर्भया और बिलकीस बानो के बलात्कारियों पर ये दोहरा मापदण्ड क्यों ?

नई दिल्ली। क्या अब बलात्कार जैसी पाश्विकता पर भी प्रतिक्रियाएं सांप्रदायिक चश्मे से ही देखी जाएंगी ?

सवाल उठ खड़ा हुआ है कि निर्भया के बलात्कारियों को फाँसी की सज़ा मिलने पर खुश होने वाले बिलकीस बानो के बलात्कारियों को फाँसी की सज़ा नहीं मिलने से दुखी क्यों नहीं हैं ?

यह महत्वपूर्ण सवाल पूछा है रिहाई मंच के प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने।

शाहनवाज आलम ने पूछा –

“जो लोग निर्भया के बलात्कारियों को फाँसी की सज़ा मिलने पर खुश हैं, वही लोग बिलकीस बानो के बलात्कारियों को फाँसी की सज़ा नहीं मिलने से दुखी क्यों नहीं हैं ? आखिर ये दोगलापन क्या साबित करता है।”

बता दें दो दिन पहले ही बॉम्बे हाई कोर्ट ने बिलकीस बानो का सामूहिक बलात्कार और उसके रिश्तेदारों की हत्या के मामले में दोषी ठहराए 12 लोगों की सजा बरकरार रखी है। हालांकि कोर्ट ने सीबीआई की यह अर्जी भी नामंजूर कर दी कि दोषियो को फांसी की सजा दी जाए। जबकि निर्भया गैंग रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने निर्भया गैंग रेप को पूरे देश में 'सदमे की सुनामी' बताते हुए कहा कि इस केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
जब ये हादसा हुआ था तब निर्भया 23 साल की थी और जब बिल्कीस बानो के साथ ये हादसा हुआ था तब वो 19 वर्ष की थी।

तीन मार्च 2002 को बिलकीस और 16 अन्य लोग चपरवाड़ से पानीवेला जा रहे थे, तभी उन पर दंगाइयों ने हमला किया। बिलकीस बानो और उसके परिजन पर दंगाइयों के इस हमले में आठ लोग मारे गए थे। दंगाइयों के इस हमले के बाद से छह अन्य लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चल सका है। दंगाइयों के इस हमले के समय बिलकीस गर्भवती थी। दंगाइयों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। इस घटना में बिलकिस की एक तीन साल की बेटी की भी हत्या हुई थी। रेप के बाद बिलकिस को पीटा गया और मरा हुआ जानकर छोड़ दिया गया।