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पैंथर्स पार्टी की राष्ट्रपति से जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की शीघ्र बैठक बुलाने की मांग

नई दिल्ली, 25 सितंबर 2019. नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक प्रो. भीम सिंह (The Chief Patron of the National Panthers Party, Prof. Bhim singh) ने भारत के राष्ट्रपति, श्री रामनाथ कोविंद से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय सभी क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेतृत्व की एक शीघ्र बैठक बुलाने की बात दोहराई है।

उन्होंने राष्ट्रपति से जम्मू-कश्मीर में लगभग 50 दिनों से हिरासत में लिये गये सभी राजनीतिक दलों के नेतृत्व की शीघ्र रिहाई के लिए जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के माध्यम से आदेश जारी करने का भी आग्रह किया, क्योंकि राष्ट्रपति ही जम्मू-कश्मीर सरकार को सम्भाले हुए हैं। उन्होंने कहा कि इससे कश्मीर घाटी और राज्य के अन्य हिस्सों में शांति बहाल करने में लोगों का पूरा सहयोग और विश्वास मिल सकता है।

प्रो. भीम सिंह ने इस बात पर भी जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति को 50 दिनों में पुराने और समाप्त हो चुके जनसुरक्षा कानून के तहत जेल में बंद किये गये लोगों की रिहाई के लिए जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को निर्देश देना चाहिए, ताकि जम्मू-कश्मीर में भारत के संविधान में दिये गये मानवाधिकार वहां रहने वाले सभी नागरिकों को प्राप्त हों। अनुच्छेद 35-ए के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में वहां की सरकार की ओर से लगाए गए जनसुरक्षा कानून का प्रभाव खत्म हो सके। यह कानून 1978 में जम्मू-कश्मीर की विधानसभा द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 35-ए के तहत बनाया गया था, जब शेख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री थे और इस कानून के तहत जेल में बंद होने वाले पहले व्यक्ति भी प्रो.भीमसिंह ही थे, जो उस समय कांग्रेस के विधायक थे।

पैंथर्स सुप्रीमो ने कहा कि 5 अगस्त के बाद अनुच्छेद 35-ए अस्तित्व में नहीं रह गया है, क्योंकि राष्ट्रपति ने स्वयं अनुच्छेद 35-ए को वापस ले लिया है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 35-ए को हटाने के लिए अधिसूचना ही पर्याप्त थी, जिसे भारत की संसद द्वारा कभी भी पेश या मंजूरी नहीं दी गई थी। इस अध्यादेश की अवधि छः महीने थी यानि नवंबर 1954 में ही समाप्त हो गया था, जिसे 14 मई, 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति ने एक अध्यादेश जारी करके बनाया था। इस बात पर इस समय बहस करने की जरूरत नहीं है कि 35-ए का इतिहास क्या रहा है। इतना समझना अत्यंत आवश्यक है कि 5 अगस्त, 2019 के बाद भारतीय संविधान में दिये गये मानवाधिकार के अध्याय पर रोक लगाने वाला 35-ए खत्म हो गया है।

प्रो. भीम सिंह ने भारत के राष्ट्रपति से यह भी आग्रह किया कि वह भारत सरकार पर जोर देकर वह पाकिस्तान सरकार के साथ बातचीत शुरू करे, जिसके लिए पाक प्रधानमंत्री बारबार दावत दे रहे हैं।

पैंथर्स सुप्रीमो ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सम्बंधों आगे बढ़ाने के लिए लगातार बात करनी होगी। यह दोनों देशों के बीच में शांति बहाल करने के लिए एक उपयोगी रास्ता होगा।

उन्होंने कहा कि 1972 में शिमला समझौते (Shimla Agreement) पर भारतीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री श्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने हस्ताक्षर किए थे, जिसमें भारत और पाकिस्तान दोनों ने यह स्वीकार किया था कि उनके बीच हर मसले का, विशेषकर जम्मू-कश्मीर पर कोई भी विवाद होगा तो आपस में बैठकर शांतिपूर्वक हल निकाला जाएगा।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग शांति और भारतीय संविधान के अध्याय-3 में निहित मौलिक अधिकारों को साझा करते हुए सम्मान और गौरव के साथ जीने की इच्छा रखते हैं। भारतीय संविधान में निहित सभी मौलिक अधिकार अनुच्छेद 35-ए की समाप्ति के बाद जम्मू-कश्मीर के सभी निवासियों के लिए लागू हो गए हैं।

प्रो. भीम सिंह ने पैंथर्स पार्टी के कार्यकर्ताओं से 5 अक्टूबर, 2019 को होने वाले पैंथर्स सम्मेलन में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जम्मू में संचार व्यवस्था ठप होने और कश्मीर घाटी, पुंछ और डोडा जिले में सैकड़ों पैंथर्स पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को हिरासत में लेने के बावजूद भी यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति से अपील की कि वे इस विशेष सम्मेलन को आयोजित करने के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार को अनुमति देने का निर्देश दें।

NPP urges President to convene urgent meeting of representatives of J&K political parties 

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