Home » समाचार » जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री ने पुलिस के कृत्यों को स्वयं आपराधिक बताया

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री ने पुलिस के कृत्यों को स्वयं आपराधिक बताया

पैंथर्स पार्टी ने की राष्ट्रपति से राज्यपाल शासन की मांग

 नई दिल्ली। नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक एवं स्टेट लीगल एड कमेटी के कार्यकारी चेयरमैन प्रो.भीमसिंह ने भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद से अनुरोध किया कि वे जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री को तुरंत बर्खास्त करके जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू करें। मुख्यमंत्री ने पिछले दिन ही एक वक्तव्य में स्वयं स्वीकार किया है कि कश्मीरी युवा की हत्या राज्य पुलिस की विफलता के कारण हुई थी, जिसे भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनदेखा नहीं किया जा सकता है। इसका जिंदा सबूत है कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री अपनी ही पुलिस को आपराधिक घोषित कर रही है। यह भी जानना जरूरी है कि मुख्यमंत्री स्वयं ही जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था और पुलिस की मुखिया हैं और पुलिस की कार्रवाई के लिए जिम्मेदार हैं।

प्रो.भीमसिंह ने भारत के राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वे स्वयं भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक विशिष्ट वकील भी रहे हैं और कानूनी क्षेत्र से बाखबर हैं। जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया है कि कश्मीर घाटी में दो दिन पहले एक जवान की हत्या जम्मू-कश्मीर पुलिस की गलती के कारण हुई थी और अपराध के लिए अपने ही राज्य की पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने भारत के राष्ट्रपति से जम्मू-कश्मीर की वर्तमान पीडीपी-बीजेपी सरकार को बर्खास्त करके जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को राज्यपाल शासन लागू करने की सलाह देने का अनुरोध किया है।

प्रो.भीमसिंह ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में संविधान को संवैधानिक मामलों से निपटने में कोई भूमिका नहीं दी गई है, हालांकि धारा 370 केवल अस्थायी है। प्रो.भीमसिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर एक अराजक राज्य बन गया है और इसमें कोई भी शासन नाम की चीज नहीं है। राज्य में कार्यालय बंद हैं, शैक्षिक संस्थान बंद हैं, यहां तक कि पुलिस जो कानून-व्यवस्था की स्थिति का पालन कर रही है, मुख्यमंत्री पर आरोप लगाती हैं, जो पुलिस मामलों के प्रभारी हैं। जम्मू-कश्मीर में युवा और छात्र, खासकर कश्मीर घाटी में सड़कों पर विरोध करने के लिए मजबूर हैं।

प्रो. भीमसिंह ने युवा, छात्रों, किसानों और मजदूर वर्ग को विशेष रूप से कश्मीर घाटी में वर्तमान  स्थिति को समझने की अपील की, जिसका मतलब राज्य में पीडीपी-भाजपा सरकार के दमन के शासन को बढ़ाने के लिए है।

प्रो.भीमसिंह ने कहा कि पीड़ित लोगों को आत्मविश्वास में लाने के लिए राज्यपाल शासन ही एकमात्र तरीका है और युवाओं से पुरजोर अपील की कि वे हिंसा को छोड़ करके लोकतांत्रिक रास्ता अपनाएं। ना पत्थर रास्ता है, न्याय हासिल करने का और ना ही गोली रास्ता है लोगों पर नियंत्रण करने का।

ज़रा हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें

About हस्तक्षेप

Check Also

media

82 हजार अखबार व 300 चैनल फिर भी मीडिया से दलित गायब!

मीडिया के लिये भी बने कानून- उर्मिलेश 82 thousand newspapers and 300 channels, yet Dalit …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: