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पैंथर्स सुप्रीमो का कश्मीरी छात्रों से आग्रह अपने संघर्ष की सफलता के लिए हिंसा से दूर रहें

प्रो. भीमसिंह ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर की सरकारों ने 1953 से लेकर आज तक छात्रों और युवाओं के साथ हमेशा अन्याय और अत्याचार किया है, उन्हें अपने अधिकारों से वंचित रखा है। चाहे वह सरकार कांग्रेस की थी या नेशनल कांफ्रेंस की और आज भाजपा-पीडीपी सरकार भी जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।

जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक प्रो. भीमसिंह स्वयं 30 वर्ष तक जम्मू-कश्मीर में छात्र आंदोलन का नेतृत्व करते रहे हैं, जो सरकार की बर्बरता के खिलाफ संघर्ष करते आ रहे हैं।

प्रो. भीमसिंह जो 15 वर्ष से अधिक जम्मू-कश्मीर में युवाओं और छात्रों की नुमाइंदगी विधानसभा और विधान परिषद में करते रहे हैं, उन्होंने साढ़े आठ साल तक जेलों में जम्मू-कश्मीर की सरकारों की बर्बरता सहन की है। जब वे विधानसभा सदस्य थे तो 1984 में जब जम्मू-कश्मीर सरकार ने उनका विधानसभा में सत्र में जाते हुए अपहरण कर दिया था, तो सुप्रीम कोर्ट ने 50 हजार रुपये का जुर्माना जम्मू-कश्मीर सरकार पर हावी किया था। यह याचिका जयमाला ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी।

प्रो. भीमसिंह ने कश्मीर के छात्रों और युवाओं से पूरा समर्थन जताया है और उनके संघर्ष का पूरा समर्थन देने का वायदा किया है। कश्मीर के लाल चौक से दिल्ली के लाल किला तक और यह भी आश्वासन दिया कि जम्मू-कश्मीर छात्रों के मानवाधिकार और सुरक्षा के लिए वे लाल किले से सुप्रीम कोर्ट तक उसी शक्ति से संघर्ष करेंगे, जिस शक्ति और वचनवद्धता के साथ आज तक जम्मू-कश्मीर की तानाशाही सरकारों से करते आये हैं।

उन्होंने कहा कि विडंम्बना है कि 70 सालों से जम्मू-कश्मीर में भारत के संविधान में दिया हुआ मानवाधिकार का अध्याय लागू नहीं किया गया यानि जम्मू-कश्मीर में एक फर्जी संविधान जम्मू-कश्मीर के लोगों के सिर पर ठोंस दिया गया है, जिसमें मानवाधिकार का अध्याय ही लुप्त है यानि जम्मू-कश्मीर में रहने वाले भारतीय नागरिक 70 सालों से वंचित हैं, जो अनुच्छेद-370 का प्रभाव के कारण है।

प्रो. भीमसिंह ने भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से पुरजोर अपील की है कि वे अनुच्छेद-370 के अन्तर्गत जो उन्हें शक्ति दी गयी है, उसे इस्तेमाल करके जम्मू-कश्मीर में तुरंत राज्यपाल शासन लगाने के लिए जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को आदेश दें, क्योंकि जम्मू-कश्मीर राज्यपाल शासन जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ही जम्मू-कश्मीर संविधान की धारा-92 के अन्तर्गत लागू कर सकते हैं, परन्तु राष्ट्रपति को उसकी सलाह राज्यपाल को देनी होगी।

प्रो.भीमसिंह ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं और छात्रों विशेषकर कश्मीर घाटी के छात्रों से अपील की है वे अपना संघर्ष शांतिपूर्ण ढंग से जारी रखे, जब तक राज्यपाल जम्मू-कश्मीर में लागू नहंी होती, जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को भंग नहीं किया जाता, यही एक रास्ता है जम्मू-कश्मीर के युवाओं और छात्रों को अपना मानवाधिकार हासिल करने का।  

 

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