भारत में 60 फीसदी माता-पिता नहीं करते निगरानी बच्चे इंटरनेट पर क्या देख रहे हैं

Safer Internet Day : सेफर इंटरनेट डे कब मनाया जाता है ? इंटरनेट का उपयोग करने वाले लोग अपने बच्चों के ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी क्यों नहीं करते हैं ? क्या कहता है इंटरनेट बिहैवियर सर्वे?
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60 percent parents in India do not monitor what children are watching on the internet

सेफर इंटरनेट डे मना रही है दुनिया

नई दिल्ली, 5 फरवरी। दुनिया भर में मंगलवार को 'सेफर इंटरनेट डे' (Safer Internet Day) मनाया जा रहा है और ऐसे में इंटरनेट के उपयोग (Internet Use) को लेकर भारत से आने वाले आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि 60 फीसदी माता-पिता अपने बच्चों द्वारा देखे जाने वाले ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी (Monitoring Online Content) नहीं करते, जो काफी चिंताजनक है। दुनिया मंगलवार को 'टुगेदर फॉर अ बेटर इंटरनेट' (Together for a Better Internet) थीम के जरिए सेफर इंटरनेट डे मना रही है और इसी दिन भारत के अग्रणी क्लासीफाइड मंच (Classifieds Platform)-ओएलएक्स (OLX India) ने कंपनी के '2019 इंटरनेट बिहैवियर सर्वे' (Internet Behavior Survey) के परिणाम जारी किए हैं।

ओएलएक्स द्वारा इंटरनेट का उपयोग करने वाले 26,000 से अधिक लोगों पर किया गया यह सर्वे ऑनलाइन और आमतौर पर सुरक्षा पर लोगों के नजरिये और व्यवहार को चिन्हित करता है। इसका लक्ष्य जागरूकता बढ़ाना है और इसने सभी यूजर्स, खासकर युवा यूजर्स से बेहतर इंटरनेट इकोसिस्टम के निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया गया है।

Parents don't keep track of what content kids are watching online

सर्वे से पता चला है कि इंटरनेट का उपयोग करने वाले अधिकांश लोग अपने व्यक्तिगत जीवन में साइबर सिक्योरिटी के सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों की जाने-अनजाने में उपेक्षा करते हैं। उनके बच्चे ऑनलाइन क्या कंटेंट देख रहे हैं, इस पर वे नजर नहीं रखते हैं। 57 प्रतिशत लोगों ने माना कि ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, वे अपनी ईमेल आईडी और ऑनलाइन खातों को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं।

सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा रहा है कि 60 प्रतिशत परिजनों ने माना कि वे अपने बच्चों द्वारा ऑनलाइन देखे जाने वाले कंटेंट की निगरानी नहीं करते हैं। यह काफी चिंता का सबब है क्योंकि जाने या अनजाने में ही बच्चे इंटरनेट का गलत उपयोग करते हैं और इसके परिणाम काफी गम्भीर होते हैं।

सर्वे में शामिल 67 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने किसी वेबसाइट पर साइन अप करते हुए या किसी उत्पाद का उपयोग करते समय नियम और शर्तो या अन्य सुरक्षा व लीगल गाइडलाइंस को स्किप किया है। 54 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने पिछले 6 माह से अधिक समय से अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के पासवर्ड नहीं बदले हैं, जबकि 31 प्रतिशत को याद ही नहीं है कि उन्होंने पासवर्ड कब बदले थे।

सर्वे में शामिल 56 प्रतिशत लोगों ने अपनी प्रोफेशनल या सोशल मीडिया प्रोफाइल्स पर अपना मोबाइल नंबर आराम से शेयर किया है।

ऐसा तब है जब सोशल मीडिया साइट्स और बैंक अपने उपयोगर्ताओं या फिर ग्राहकों को समय-समय पर पासवर्ड बदलने की सलाद देते हैं और यह भी कहा जाता है कि पासवर्ड काफी स्ट्रांग होना चाहिए।

सुरक्षा के प्रति उपेक्षा दर्शाने वाले इन लोगों में हालांकि वित्तीय सुरक्षा के लिए बड़ी जागरूकता है।

68 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने अपने बैंक अकाउंट, सोशल मीडिया अकाउंट्स, लैपटॉप या फोन के लिए ओटीपी या पासवर्ड कभी किसी के साथ शेयर नहीं किया है। ऐसा करना भी नहीं चाहिए क्योंकि इससे एकाउंट हैक होने का खतरा है।

ओएलएक्स इंडिया की निदेशक और जनरल काउंसेल लवण्या चंदन ने कहा,

"इंटरनेट हमारे जीवन पर हावी हो गया है। इसलिए उसका उपयोग ऐसे करना कि हमारे जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो और वास्तविक संसार जैसी सावधानी रखकर सुरक्षित रहना, हमारे हित में है। सेफर इंटरनेट डे हमारी मनोवृत्ति और व्यवहार को परखने का उचित अवसर है, ताकि हमारी और हमारे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।"

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