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मोरों ने किया सामूहिक आत्महत्या करने का फैसला

उदय चे

आज राजस्थान के मोरों ने सामूहिक आत्महत्या करने का फैसला किया है। उन्होंने प्रेस को जारी बयान में बताया है कि हम बहुत दुखी है। दुखी होने का कारण हाई कोर्ट के अनपढ़ ब्राह्मणवादी जज का बयान है, जिसमें उन्होंने कहा है कि मोर अपनी मुतनी का इस्तेमाल नहीं करता बच्चा आंसुओं से पैदा होता हैं। मोरनी तो पहले से ही शक की निगाह से देखती थी कि कुछ होता जाता तो है नहीं ऐसे ही नाचते रहते हो। कुका-कुका कर मुझे बुलाते रहते हो। अब इस मुर्ख ने भी मोहर लगा दी। इसलिए हम सामूहिक आत्महत्या करने का फैसला लेते हैं।

राजस्थान के मोरों ने ये सामूहिक आत्महत्या का फैसला क्या लिया पूरे देश के जल-जंगल-जमीन में विचरण करने वाले पशु-पक्षियों में हलचल मच गयी। तूफान सा आ गया। सभी डरे हुए कि ये क्या हो रहा है। सभी पशु-पक्षी त्राहिमाम्-त्राहिमाम करते हुए राजा के दरबार में इंसाफ लेने के लिए पहुँच गये। दरबार मूर्ख जज मुर्दाबाद के नारों से गूंज उठा। बीच-बीच में दबे स्वर राजा मुर्दाबाद के नारे भी गूंज रहे थे। राज्य का सिहांसन डोलने लगा। बेचारे हाथी ने तो बैठने के चक्कर में एक-दो कुर्सियों को भी तोड़ दिया।

राजा के गुप्तचर विभाग ने राजा जो भांग के नशे में धुत गर्मी से बचने के लिए देश से बाहर ठंडे इलाके के दौरे पर गया हुआ था, फ़ौरन व्हाट्सअप पर सन्देश किया। दरबार की तस्वीरें व कुछ वीडियो क्लिप भेजी। फिर क्या था राजा का नशा एक दम रफूचक्कर हो गया। राजा ने एक सेँकेण्ड का समय भी बर्बाद न करते हुए फ़ौरन पुष्पक विमान पकड़ा और चल दिया अपनी मातृभूमि की तरफ, पुष्पक विमान से ही सभी मंत्रियों और अपने खास गुप्तचरों, अपनी फ़ौज-पोलिस को लगा व्हाट्सअप पर सन्देश करने,

कम्बख्तों, कामचोरों, राज्य पर विपदा के बादल मंडरा रहे हैं और तुम सोये हुए हो।

पुष्पक विमान में लगे टीवी को चालू किया। मीडिया राज दरबार की लाइव कवरेज दिखा रहा था। दरबार को देखते ही राजा पसीने से तर हो गया। थोड़ा BP भी बढ़ गया।

इधर दरबार में कौतूहल बढ़ रहा था। मेंढक कह रहा था राजा हमारे विद्रोह से डर कर देश छोड़ कर भाग गया, चूहा कह रहा था नही रे, राजा जनसभाओं में ज्यादा आँसू टपकाता रहता है जिस कारण बहुत से अन्धभक्त पेट से हैं इसलिए शर्म के मारे देश से चला गया है। लोमड़ी कह रही थी शर्म ही होती तो अपनी घरवाली को न छोड़ता। अब भैया जितने मुँह उतनी बाते वहाँ चली हुई थी।

गधा कह रहा थी कि ये इंसान गन्दे काम तो खुद करते हैं हमको भी अपने जैसा समझते हैं।

बन्दर कह रहा था कि इन इंसानों की मनगढ़ंत कहानियों से हम पशु-पक्षियों का जीना हराम हो गया है, सब हमको शक की निगाहों से देखते हैं।

अब बात को आगे बढ़ाते हुए मछली बोल रही थी कि सबसे पहला चरित्र पर दाग इन इंसानों ने हम पर लगाया कि हनु के पसीने की बूंद पीने से मछली से हनु को बेटा पैदा हुआ। पहले तो चोरी चुपके किसी से काला मुँह करते हैं जब बच्चा न सम्भले तो उनको हम मासूमों के मत्थे मढ़ देते हैं।

उल्लू बीच में बात काटते हुए बोला कि हम इज्जतदार प्राणी हैं। हम इंसानो की तरह सेक्स में जोर जबरदस्ती नहीं करते और न ही अपने सम्बन्धों को छिपाते हैं, जो करते हैं सबके सामने करते हैं। हमारे यहाँ तो मादा की मर्जी के बिना पता भी नहीं हिलता। इन इंसानों का क्या पहले तो चोरी छिपे या जबरदस्ती सब कुछ करते हैं फिर कोई खीर खाने से तो कोई सेब, केला, अनार खाने से, तो कोई सिर्फ बन्द कमरे में ऋषि के आगे से गुजरने से पैदा हो गया बोलकर अपने काले-सफेद कुकर्मो को छिपाते फिरते हैं। छी ऐसे इंसानो पर….

मक्खी, मच्छर, चिड़िया, कीड़ी सभी, मोर और मोरनी के समर्थन में आँखे लाल किये हुए थे बस बहुत हो गया हमको बदनाम करना अब और नही….. सांप तो साफ इशारा कर रहा था कि अब एक शब्द भी बोला तो सर्वनाश होगा…..

लेकिन इधर गाय के आँसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। वो रोये जा रही थी बस रोये ही जा रही थी।

बिल्ली और कुत्ता उसके दुःख में भागीदार बन कर तान में तान मिला रहे थे। अब सबका ध्यान गाय की तरफ था।

सारे पशु गाय के चारों तरफ घेरा बना कर उससे उल्हाना दे रहे थे कि तुम क्यों रो रही हो, तुम तो राजा की और उसके अंधभक्तों की माता हो। तुम तो राज माता हो। फिर तुम क्यों आँसू बहा रही हो।

इतना सुनना था कि गाय का रुदन और ज्यादा बढ़ गया।

अब पास खड़े सांड ने गम्भीरता से बोलना शुरू किया

मेरे सभी साथियो हम भी आपकी तरह पशु ही हैं, लेकिन ये जो इंसान है ये बड़ा शातिर है। ये अपने फायदे के लिए गधे को भी बाप बना लेता है।

ये सुन गधों ने ख़ुशी का इजहार करना चाहा कि तभी माहौल को भाँप कर ख़ुशी को अंदर ही दबा गये और बात को संभालते हुए बोले हम नहीं किसी के बाप हम तो सिर्फ अपने बच्चों के बाप हैं।

सांड का बोलना जारी था। जैसे अपने फायदे के लिए गधों को बाप बनाते हैं वैसे ही अपने राजनीतिक फायदे के लिए इन्होंने मेरी धर्मपत्नी गाय को माता बनाया हुआ है। ये माता सिर्फ राजनीति के लिए है लेकिन इस माता को कभी भी राजा और उसके भक्तों ने अपने घर में जगह नहीं दी।

जगह दी तो सिर्फ कुतों को

इतना सुनते ही देश के कुते एक स्वर में बोल पड़े कुते भी विदेशी जिनको इनके घरों में जगह मिली हुई है। हमको तो गली में भी न बैठने दे ये अमीर लोग।

शेम शेम शेम…….

सांड अपनी आवाज में थोड़ा क्रोध लाते हुए, माता-माता चिल्लायेंगे

लेकिन हमारे पिछवाड़े में जेली घोंपते हुए शर्म इनको आती नहीं, हमको कचरा खाने पर मजबूर करते हैं। बड़े-बड़े कत्लखानों में हमको कटवाते हैं, सुन्दर सी पैकिंग में पैक करके विदेशों में भेजते हैं। शरीर के प्रत्येक अंग यहाँ तक हमारे खुन का सौदा तक ये करते हैं। हमारे खून से रंगे हाथों को छुपाने के लिए अपना सारा इल्जाम गरीब किसानों पर डाल देते हैं और वोटों के लिए हमारे नाम पर उन किसानों को मारते हैं जो हमको चारा डालते हैं, गाय को दूध के लिए पालते हैं। और तो और हमको माता मानने वाले इन कत्लखानों वालो से चुनाव के लिए चंदा भी लेते हैं। अब सांड का गला भर आया उसके गले से आवाज नही निकल रही थी।

हाल में सन्नाटा छा गया। कोई नहीं बोल पा रहा था। सभी पशु-पक्षी गाय की हालात पर मायूस थे। उनको तो लग रहा था कि और किसी के अच्छे दिन आये या न आये लेकिन गाय के जरूर आये हुए हैं। लेकिन यहाँ तो मामला ही सब उल्ट था।

बस सुबह भी होने वाली थी। बाहर राजा के दरबार को सेना के बंदूकधारियों ने घेर लिया। मीडिया भी पूरी रात से लाइव कवरेज दिखा रहा था। चिकने चुपड़े मुँह वाले मीडियाकर्मी पूरी रात से इन प्रदर्शनकारियों को पाकिस्तान से लेकर सेकुलर, वामपंथियों का एजेंट बता कर इंसाफ की मांग को तख्ता पलट की साजिश करार दे चुके थे।

पुष्पक विमान भी बड़ी तेजी से देश की तरफ बढ़ ही रहा था, राजा ने सभी इंसाफ मांगने आये पशु-पक्षियों को देशद्रोही घोषित करते हुए गिरफ्तार करने और सांड और रोती गाय को विदेशी ताकतों और वामपंथियों से मिले होने के कारण गोली मारने का आदेश व्हाट्सअप से अपने गृहमंत्री व सेना के जनरल को संदेश दिया ही था।

……..कि ये क्या बड़े जोर से भूकम्प के झटकों ने भारत की सरज़मी को हिला दिया। पुष्पक विमान हवा में झूलने लग गया। राजा मुँह के बल गिरा उसके नाक से खून की धारा बह निकली।

इधर छी न्यूज बड़ी ही बेशर्म ब्रेकिंग न्यूज खम्बित पात्रा के नाम से चला रहा थी कि "ये भूकम्प के झटकों का कारण वो बैल है जिसने धरती को काल कालांतर से अपने एक सींग पर उठाया हुआ है। वो भी विदेशी ताकतों से मिलकर इस षड्यंत्र का हिस्सेदार है। अब इस देशद्रोही बैल के साथ-साथ सभी देशद्रोही पशु-पक्षियों को गोली से उड़ा देना चाहिए।"

गोलियों की आवाज और चीख पुकार के साथ ड्रामे का पर्दा गिर जाता है…..

(व्यंग्य)

 

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