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वेश्यावृत्ति- कानूनी जामा पहनाने से क्या होगा ?

Prostitution – What will happen by wearing a legal suit?

वेश्यावृत्ति को किसी और रोजगार से जोड़कर उसे खत्म करने की बात करने वालों को सोचना चाहिए कि सैद्धांतिक तौर पर वेश्यावृत्ति खत्म करने को बड़ी बातें की जा सकती हैं लेकिन सामाजिक परिस्थितियों को बदले बिना कोई उपाय करना ढाक के तीन पात वाली बात होगी।

National Commission for Women demands prostitution to be legalized

वेश्यावृत्ति को कानूनी जामा पहनाने की मांग काफी समय से उठती रही है। ऐसे में भारतीय महिला आयोग की इस बारे में मांग कोई नई नहीं है। लेकिन कई बार यह सवाल उठता है कि वेश्यावृत्ति को कानूनी दायरे में लाने से स्थितियों के बदल जाने की कितनी गारंटी होगी। इसके पक्षधरों का कहना है कि इसको कानूनी जामा पहना देने से इस पेशे में लगी औरतों के शोषण को रोका जा सकेगा लेकिन इसके विरोधी कुछ बुद्धिजीवियों का मानना है कि वेश्यावृत्ति को कानूनी दायरे में लाने से उनकी स्थितियों में कोई नाटकीय परिवर्तन नहीं होने वाला है। अलबत्ता, वे आशंका जाहिर करते हैं कि इससे स्थितियां और भी बदतर हो जाएंगी और इस पेशे को और भी बढ़ावा मिलेगा। उनके तर्कों का आधार वे यूरोपिय देश हैं जहां यौनकर्मियों को कानूनी दायरे में बांध दिया गया है।

PROSTITUTION IN INDIAN SOCIETY

दरअसल यह समझने की जरूरत है कि वेश्यावृत्ति को वैध करना समस्या का हल हो सकता है या नहीं। इसको समझने के लिए इस पेशे के स्वरूप को समझना जरूरी है। वर्तमान में समाज में दो तरह की वेश्यावृत्ति प्रचलन में है। एक तरफ वे महिलाएं हैं जो या तो तस्करी करके जबरन वेश्यावृत्ति में ढकेली गई हैं या फिर किसी मजबूरी के चलते स्वत: ही इस धंधे में उतर आई हैं । इन दोनो तरह की महिलाओं की आर्थिक सामाजिक स्थिति निम्न स्तर की होती है। वे मजबूरी में इस पेशे में हैं और चाहकर भी निकल नहीं सकती। ऐसी ही यौनकर्मियों का शोषण भी होता है। उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा दलाल, पुलिस और माफिया खा जाता है। इसके अलावा अगर वे इस धंधे से निकल कर कुछ और करना भी चाहें तो वेश्यावृत्ति के ठप्पे के चलते समाज में हमेशा ही उपेक्षा की शिकार बनी रहती हैं और समाज की मुख्य धारा में उन्हें कभी भी जगह नहीं मिल पाती।
दूसरी तरह की वेश्यावृत्ति हाइप्रोफाइल वेश्यावृत्ति है। इसमें मूल रूप से वे महिलाएं सक्रिय हैं जो उच्च शिक्षाप्राप्त हैं। किसी मजबूरी की बजाए वे सोची समझी रणनीति के तहत इस धंधे में उतरती हैं। उनके ग्राहकों में बड़े लोग शामिल होते हैं और ये अपनी सेवाओं की एवज में मोटी फीस वसूलती हैं। कइयों के लिए ये एक पार्ट टाईम जॉब है जो इनकी जरूरतों को पूरा करता है। ये महिलाएं या लड़कियां इस संबंध में अपने स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक होती हैं और शोषण के भी।

ऐसे में अगर मोटे तौर पर बात करें तो सबसे पहली जरूरत इस बात की है कि किसी को जबरदस्ती इस पेशे में न ढकेला जा सके। इस संबंध में कुछ इस तरह के प्रयास करने की जरूरत है कि वेश्यावृत्ति को धीरे – धीरे जड़ से खत्म किया जा सके। जैसा कि स्वीडन ने किया है। वहां वेश्यावृत्ति पर तो रोक नहीं लगाई गई बल्कि स्त्री के खरीद फरोख्त को अवैध बनाया गया। इससे वहां स्त्रियों को खरीदने बेचने के धंधे में लगे लोगों की शामत आ गई।

दरअसल इस संबंध में कई स्तरों पर काम किए जाने की जरूरत है। सबसे पहले तो पुराने औपनिवेशिक कानून को बदले जाने की जरूरत है जो पीड़ित को ही अपराधी मानता है। इस बारे में एक नया और प्रगितिशील कानून लाए जाने की आवश्यकता है जो इस बात को सुनिश्चित करे कि किसी को उसकी इच्छा के विरुद्ध इस पेशे में न ढकेला जा सके। नया कानून बनाते समय इस बात का प्रावधान भी किया जा सकता है कि स्त्री शरीर की किसी भी तरह की खरीद फरोख्त को निषिद्ध किया जा सके और खरीदने और बेचने वालों को कानून की जद में खींचा जा सके न कि पीड़ित को ही दोषी माना जाए। इसके अलावा जो यौनकर्मी इस पेशे से बाहर आना चाहते हैं उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था भी होनी चाहिए।

Reasons for failing to stop prostitution

वेश्यावृत्ति को रोक पाने से असफल रहने में अन्य कारणों के अलावा पुलिस और प्रशासन का रवैया भी बहुत हद तक जिम्मेदार बना है। जैसा कि कुछ यौनकर्मी बताते हैं कि पुलिस वाले उन्हें अक्सर ही गिरफ्तार कर लेते हैं। उन्हें कोई कानूनी सहायता भी मुहैया नहीं कराई जाती और उनके साथ अपराधियों जैसा बर्ताव किया जाता है। जाहिर है अगर कोई यौनकर्मी स्वेच्छा से इस धंधे में नहीं है और एक बार घुसने के बाद इसमें से निकलना चाहती है तो उसके लिए निकलना आसान नहीं होता। सार्वजनिक जीवन में तो उसे उपेक्षित होना ही पड़ता है, इस मामले में पुलिस का रवैया भी सहयोगात्मक नहीं होता है। नतीजतन उसे न चाहते हुए भी उसी दलदल में फंसे रहने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसा होने की वजह भी है। एक अनुमान के मुताबिक यौनकर्मियों को उनकी कमाई का पांचवां या छठां हिस्सा ही मिल पाता है। उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा माफिया, दलाल और धंधा चलने देने की एवज में पुलिस वाले खा जाते हैं। जाहिर है, यहां पर दलालों और रक्षकों का एक दुश्चक्र बना हुआ है जिसमें से किसी भी अभागी लड़की का निकल पाना नामुमकिन होता है।

ऐसे में अब यह जरूरी हो गया है कि वेश्यावृत्ति से संबंधित कानून को बदला जाए। ऐसा होने से कम से कम पुलिस, दलाल और माफिया के दुश्चक्र से उन तमाम अभागी लड़कियों को बचाया जा सकेगा जिन्हें किसी भी वजह से इस दलदल में उतरना पड़ता है या फेंक दिया जाता है। पुनर्वास के उपायों पर चर्चा करते समय हमें अपनी सामाजिक स्थितियों पर भी विचार करने की जरूरत है। क्या वाकई अगर कोई महिला वेश्यावृत्ति छोड़ना चाहे तो वर्तमान समाज व्यवस्था में उसके लिए जगह बन सकती है? क्या वाकई हमारे समाज की मानसिक स्थिति इस प्रकार की है कि वह उस महिला से पूर्वाग्रहग्रस्त व्यवहार नहीं करेगा? क्या हम अपनी निगाहों में परिवर्तन लाने के इच्छुक हैं? वेश्यावृत्ति को किसी और रोजगार से जोड़कर उसे खत्म करने की बात करने वालों को सोचना चाहिए कि सैद्धांतिक तौर पर वेश्यावृत्ति खत्म करने को बड़ी बातें की जा सकती हैं लेकिन सामाजिक परिस्थितियों को बदले बिना कोई उपाय करना ढाक के तीन पात वाली बात होगी।
अवनीश कुमार

About the author

अवनीश कुमार, लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं और मीडिया स्टडीज ग्रुप से जुड़े हैं।

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