बेगुनाहों की लड़ाई लड़ने वाले राजीव यादव को बिहार में किया जाएगा सम्मानित

बेगुनाहों की लड़ाई लड़ने वाले राजीव यादव को बिहार में किया जाएगा सम्मानित

Rajeev Yadav, who fought for the innocents imprisoned in the name of terrorism and the victims of fake encounters, will be honored by Nyay Manch on 20 November in Bhagalpur

नई दिल्ली 17 नवंबर 2016। आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों और फर्जी मुठभेड़ों के शिकार लोगों की लड़ाई लड़ने वाले रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव को न्याय मंच द्वारा 20 नवंबर को भागलपुर में सम्मानित किया जाएगा।

अल्पसंख्यकों-वंचितों के प्रश्नों पर रिहाई मंच उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य हिस्सों में साहसिक पहलकदमी ले रहा है।

पिछले दिनों भोपाल एनकाउंटर की न्यायिक जांच की मांग पर प्रतिवाद करते हुए रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव लखनऊ में बर्बर पुलिस दमन भी झेला है।

न्याय मंच की ओर से कहा गया है कि राजीव यादव को इस दौर में साहसिक लड़ाई का नेतृत्व करने के लिए सम्मानित करेगा।

इस मौके पर राजीव यादव से रिहाई मंच के संघर्ष व अनुभव के साथ-साथ सत्ता द्वारा किये जा रहे ‘एनकाउंटर पॉलिटिक्स’ पर भी अपनी राय रखेंगे।

बता दें राजीव यादव यूपी में सामाजिक व राजनीतिक संगठन ‘रिहाई मंच’ के सक्रिय नेता हैं।

राजीव मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दों को पूरी सक्रियता के साथ उठाते रहे हैं। भोपाल में कथित सिमी कार्यकर्ताओं के कथित एनकाउंटर पर भी इन्होंने ज़ोर-शोर से सवाल उठाए और विरोध में लखनऊ में प्रदर्शन का ऐलान किया।

अभी प्रदर्शन की तैयारी ही कर रहे थे कि पुलिस ने इन्हें पकड़ लिया और मारते-पीटते पुलिस चौकी ले गई।

राजीव यादव की मानें तो पुलिस ने सड़क पर तो पीटा ही, पुलिस चौकी के अंदर भी ढाई घंटे तक सिमी आतंकी, मुसलमान, कटुआ और पाकिस्तानी एजेंट बताकर उन्हें पीटा गया और लगातार फ़र्ज़ी एनकाउंटर में मारने की धमकियां दी गईं।

30 साल के युवा राजीव यादव उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ में जन्मे हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की है।

पढ़ाई के दौरान वो ऑल इंडिया स्टूडेन्ट एसोसियशन (आईसा) के सक्रिय नेता रहे। उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें इलाहाबाद आईसा का सचिव भी बनाया गया।

इसके बाद राजीव ने दिल्ली इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मास कम्यूनिकेशन (आईआईएमसी) से पत्रकारिता की पढ़ाई की। इस दौरान वो ‘रिहाई आन्दोलन’ से जुड़े।

पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी होने के बाद कुछ दिनों तक पत्रकारिता में सक्रिय रहे। फिर उन्होंने नौकरी करके जीवनयापन न करके पत्रकारिता की पढ़ाई को समाज में रचनात्मक कार्य करने और मजलूमों केसवाल को उठाने में लगाया।

उन्होंने डॉक्यूमेंट्री फ़िल्मों के बनाने की ओर ध्यान दिया। ‘सैफ़रन वार : ए वार अगेंस्ट टेरर’ (Saffron War: A War Against Terror) और ‘पार्टिशन रिविजिटेड(Partition revisited) नाम की डॉक्यूमेंट्री बनाई।

सैफ़रन वार यूपी की सियासत में काफी चर्चित डॉक्यूमेंट्री रहा है।

खुद गोरखपुर सांसद योगी आदित्यनाथ ने इस डॉक्यूमेंट्री के विरोध में राजीव यादव को इस्लामिक फंडेड व नक्सलियों का समर्थक बताया। बावजूद इसके राजीव यादव पूरी बहादुरी के साथ पूर्वांचल में साम्प्रदायिकता के सवाल को उठाते रहे।

मुज़फ़्फ़रनगर दंगे के बाद संगीत सोम जैसे नेताओं के ख़िलाफ़ जब लोगों की बोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी, तब उनके विरुद्ध एफ़आईआर भी दर्ज करवाया।

राजीव यादव ने 2015 में मानवाधिकार कार्यकर्ता शाहनवाज़ आलम के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन अक्षरधाम’ नामक पुस्तक भी लिखी।

बता दें कि 2007 में शुरू हुआ ‘रिहाई आन्दोलन’ 2012 में ‘रिहाई मंच’ में तब्दील हो गया और राजीव यादव इसके महासचिव बनाए गए।

राजीव यादव ने हाशिमपुरा के मामले पर एक सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें इन पर दंगा भड़काने की कोशिश का आरोप लगाकर यूपी पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की।

एक शोध के दौरान राजीव गुजरात के अहमदाबाद में भी डिटेन किए गए, लेकिन पूछताछ के बाद इन्हें छोड़ दिया गया।

इस तरह से राजीव यादव लगातार सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर रहे हैं।

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