बाबा के आगे बेबस सरकार ! ये रिश्ता क्या कहलाता है ?

Gurmeet Ram Rahim
पुष्परंजन

बाबा के आगे बेबस सरकार !

इस देश में बलात्कार और छेड़छाड़ के अभियुक्तों में से कुछ का हिसाब सड़क पर ही हो जाता है. कइयों को पुलिस उठा ले जाती है, और लॉकअप में तोड़ती है. मगर, इस देश का क़ानून, और उसके पालन के तरीके आदमी की औकात के हिसाब से बदल जाते हैं. मोदी जी के “न्यू इंडिया” में एक बाबा हैं, राम रहीम इन्सां. इनका परिचय है- “आध्यात्मिक गुरु, समाज सुधारक, एक्टर, डायरेक्टर, सिंगर.” इन्हें भक्तगण “एमएसजी” ( मैसेंजर ऑफ़ गॉड ) भी बोलते हैं. बाबा की ड्रेस मद्रासी फिल्मों के हीरो को भी मात करती होती है. बल्कि मैं तो उस टेलर को ढूंढ़ रहा हूँ, जो बाबा की ड्रेस डिजाइनिंग करता है, और सोचता हूँ, अगर मोदी जी वैसी ड्रेस पहने तो कैसे लगेंगे ?

खैर ! 15 साल पहले बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां के खिलाफ एक शिष्या का यौन शोषण, डेरा का मैनेजर रंजीत सिंह और पत्रकार राम चन्दर छत्रपति की हत्या का मामला दर्ज़ हुआ. 25 अगस्त 2017 को पंचकूला में सीबीआई की विशेष अदालत को इसपर फैसला देना है. इसे लेकर हरियाणा, पंजाब में सारे पुलिसवालों की छुट्टियां रद्द कर दी गयी हैं. दोनों राज्यों के पांच-छह ज़िलों में चप्पे-चप्पे पर पुलिस लगातार परेड कर रही है.

पंद्रह साल से यौन शोषण और हत्या का यह मामला लटका पड़ा है, और इस बीच डेरा सच्चा सौदा के पते पर हथियार रखने के पैंतालीस लाइसेंस जारी कर दिये गए. सिरसा के लोग बताते हैं, “इस जगह पर भारत की सरकार नहीं, एमएसजी की सरकार चलती है.” मतलब, तीन साल से 56 इंच वाली सरकार भी “एमएसजी” का बाल-बांका नहीं कर पायी !

ये रिश्ता क्या कहलाता है ?

376 ( बलात्कार) और 506 ( आपराधिक धमकी) वाले मामले के अभियुक्त के साथ बीजेपी के मुख्यमत्री, मंत्री, सांसद जब बगलगीर होते हैं, तब सचमुच राजनीति का बेशर्म, बदतरीन चेहरा सामने आने लगता है. दो-दो हत्याओं के कथित गुनाहगार के साथ मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर 6 मई 2017 को करनाल में झाड़ू लगा रहे थे. अमित शाह सिरसा में बाबा के डेरे में मत्था टेक चुके हैं. चुनाव के समय बीजेपी के 90 प्रत्याशी बाबा का आशीर्वाद लेने लाइन में खड़े थे.

2007 में “एमएसजी” ( मैसेंजर ऑफ़ गॉड ) चार्जशीट हुआ, और 2008 में उसे जेड प्लस सिक्योरिटी मिल गयी. आशाराम की तरह इस बाबे ने भी ने भी सर्टिफिकेट लगा दी कि उनमे पुंसत्व नहीं है, इसलिए बलात्कार कर ही नहीं सकते. अब जिसमे पुंसत्व नहीं है, उसके तीन बच्चे भी हो सकते हैं, वैज्ञानिकों के लिए यह शोध का विषय है.

जिस सीबीआई कोर्ट के फैसले को लेकर हरियाणा-पंजाब के दस ज़िलों में प्रशासन द्वारा “मिनी कर्फ्यू ” और अंध भक्तों की ओर से विद्रोह जैसा माहौल है, उस कोर्ट को कहीं और शिफ्ट नहीं कर सकते थे क्या ?

पुष्परंजन की फेसबुक टाइमलाइन से साभार