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बुद्धिजीवी और राजनीतिक टिप्पणियां और वैकल्पिक राजनीति की ख्वाहिश

बुद्धिजीवी और राजनीतिक टिप्पणियां और वैकल्पिक राजनीति की ख्वाहिश

भारत में बुद्धिजीवियों की भूमिका

Role of intellectuals in India

आलोक वाजपेयी

खासकर जिन बुद्धिजीवियों की समझ व कलम साहित्य पर आधारित रही है तो उनके मिजाज में एक रोमांटिक अराजकतावाद आ जाता है।

रोमांटिक से आशय ये कि वो दिल ही दिल में कोई ऐसा अरमान ढोते हैं जिसकी समाज मे जमीन ही नहीं होती। हाँ, साहित्यिक कृतियों और कुछ व्यक्ति विशेष में जरूर मिल जाती है। तो वो इसी के सहारे बिना वस्तुपरक मूल्यांकन किए तीर छोड़ते रहते हैं जिसक़ी कोई ठोस कार्यात्मक जमीन नहीं होती।

अराजकतावाद का अर्थ

Meaning of anarchism

अराजकतावाद राजनीतिक क्रियाशीलता/ सार्थकता का एक जरूरी तत्व जरूर है, लेकिन इस तरंग को तमाम अन्य प्रवृत्तियों से समायोजित करना होता है। वरना ये अराजकतावाद केवल बेढंगे नाच से ज्यादा कुछ नहीं होता।

राजनीतिक समझ में सबसे कठिन काम राजनीतिक दलों की विचारधारा में अंतर व समानता अलगा पाना होता है। राजनीति की साहित्यिक समझ इसमें कुछ मदद नहीं करती बल्कि वैचारिक घालमेल पैदा करती है।

राजनीति केवल सदिच्छाओं या व्यक्ति विशेष की अपनी मर्जी के परिणाम नहीं होती। बहुत से ऐतिहासिक कारक, उपलब्ध राजनीतिक चेतना आदि जिम्मेदार होते हैं जिनका विश्लेषण भी बहुत जरूरी होता है जो साहित्यिक रोमांच से नहीं किया जा सकता।

एक और बात है कि राजनीति में नेतृत्व वर्ग (लीडरशिप) को भी बहुत बारीकी से पकड़ना जानना होता है। एक ही बात जो एक लीडरशिप उठाए तो उसका मतलब प्रभाव परिणाम अलग होगा और दूसरे टाइप का नेतृत्व वर्ग उठाए तो उसका मतलब प्रभाव परिणाम अलग होगा, ये समझ पाना भी बहुत आसान नहीं है।

आखिर में, जिनका मन बहुत जल्दी भागने लगता हो उन्हें राजनीतिक विश्लेषण से बचना चाहिए। वरना जैसे कोई-कोई लड़कों को रोज ही बदल-बदल लगने लगता है कि यार ये वाली लड़की ही मेरा असली प्यार है, उसी तरह वे राजनीतिक दलों और व्यक्तियों के बारे में भी अपने विचार बदलते रहते हैं।

#हाय ये वैकल्पिक राजनीति की चुल्ल।

बुद्धिजीवियों के लिए एक और बात…

जब आप किसी बड़ी शख्सियत पर बात करते हुए उसकी प्रशंसा करते तो जरूर हैं, पर बाद में बैलेंस बनाने के लिए उसकी कमियों पर आ जाते हैं और खुद को निरपेक्ष दिखाने की जद्दोजहद करते हैं तो आप अपनी बौद्धिक स्थिति और राजनीतिक प्रतिबद्धता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे होते हैं।

देश के बंटाधार में ये आपका बिन चाहा योगदान है।

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