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आरएसएस के निर्देशन में जारी प्रशासन-पुलिस दमन के खिलाफ लोकतंत्र के लिए प्रतिकार अभियान में शामिल होने की अपील

सोनभद्र, 11 सितंबर। सोनभद्र में इस समय राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के निर्देशन में प्रशासन व पुलिस द्वारा आदिवासियों, सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं, चुने हुए जन प्रतिनिधियों और भिन्न मत रखने वालों पर फर्जी मुकदमें कायम किए जा रहे हैं, जांचें करायी जा रही है, गिरफ्तारी की जा रही है और आला अधिकारियों द्वारा आए दिन अपमानित किया जा रहा है।

यह आरोप दर्जनों सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने जारी एक संयुक्त में लगाया है।

अपील का मूल पाठ निम्न है –

आम नागरिकों के नाम अपील

आरएसएस के निर्देशन में जारी प्रशासन-पुलिस दमन के खिलाफ लोकतंत्र के लिए प्रतिकार अभियान में शामिल हों!

आप खुद देखें कि लिलासी में हुई वनभूमि विवाद की घटना में आदिवासी वनवासी महासभा के नेता और मुरता के निर्वाचित आदिवासी प्रधान डा0 चंद्रदेव गोंड़ की कोई भूमिका नहीं थी। उनका और आदिवासी वनवासी महासभा के नेता कृपाशंकर पनिका, राजेन्द्र प्रसाद गोंड़ व देव कुमार विश्वकर्मा का अपराध महज इतना था कि 19 मई को अखबार से आदिवासी महिलाओं को जेल भेजने की घटना की जानकारी मिलने पर अपने सामाजिक राजनीतिक दायित्वों के तहत यह लोग 20 मई को लिलासी गांव में जांच करने गए थे। जांच के बाद इन्होंने महिलाओं को घरों से गिरफ्तार करने की पुलिस की कहानी को असत्य पाया था और इस सम्बंध में बयान भी जारी किया था। यही बात पुलिस व प्रशासन को नागवार गुजरी। एफआईआर में नाम न होने के बावजूद डा0 चंद्रदेव गोंड़ को तत्कालीन एसडीएम दुद्धी विशाल यादव ने अपने कार्यालय बुलाकर गिरफ्तार करवाया और जेल भेजा। ओबरा विधानसभा से प्रत्याशी रहे आदिवासी नेता कृपाशंकर पनिका को जेल भेजा गया और अन्य नेताओं के यहां छापेमारी की जा रही है। जनपद के राजनीतिक दलों व संगठनों के लोगों से जिला प्रशासन और खुद डीएम ने कहा कि लिलासी घटना की मजिस्ट्रेट स्तर की जांच करायी जायेगी लेकिन आज तक इसे महज इसलिए नहीं कराया गया कि राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ताओं पर लादे फर्जी मुकदमों और दमन का भण्ड़ा फूट जाएगा और सच सामने आ जायेगा। हालत इतनी बुरी है कि डा0 चंद्रदेव गोंड़ के जेल रहने के दौरान डीएम ने उनके जेल से छूटने तक मुरता गांव में समिति बना दी और आज जब जमानत पर उनको जेल से छूटे डेढ़ माह से ज्यादा हो गया तब भी विधि के विरूद्ध उनको प्रधान का चार्ज नहीं दिया जा रहा है। जब इसकी गुहार लगाने वह सीडीओं के यहां गए तो उनके साथ गाली गलौज किया गया और जिला प्रशासन ने गुण्डा एक्ट लगाने की धमकी दी। हद यह है कि जिला प्रशासन उनके कामों की जांच करवा रहा है और जांच में उनके नाबालिग पुत्र तक को उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है। दोस्तों दरअसल यह सारा दमन राष्ट्रीय स्तर पर आरएसएस की अपने राजनीतिक वैचारिक विरोधियों को दमन और उत्पीड़न के जरिए चुप्प करा देने की योजना का हिस्सा है। सोनभद्र में भी जिला प्रशासन पूरे तौर पर आरएसएस का एजेण्ट बना हुआ है। आप खुद देखें डीएम महोदय जनता से मिलने के समय अपने कार्यालय में दो घण्टें से भी ज्यादा आरएसएस के नेतृत्व से बात करते है और अन्य दलों के प्रतिनिधियों को समय देकर घण्टों इंतजार कराया जाता है।

मित्रो,

आपको जान कर आश्चर्य होगा कि सोनभद्र, मिर्जापुर और नौगढ़ में आदिवासियों और वनाश्रितों के पुश्तैनी वनभूमि पर अधिकार पाने के लिए बने वनाधिकार कानून के तहत जमा किए गए 90 प्रतिशत दावों को बिना सुनवाई का अवसर दिए खारिज कर दिया गया। इसके खिलाफ आदिवासी वनवासी महासभा की इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दाखिल जनहित याचिका में माननीय मुख्य न्यायाधीश की खण्ड़पीठ ने आदेश दिया कि वनाधिकार कानून के तहत दावा करने वाले आदिवासी और वनाश्रितों का उत्पीड़न नहीं किया जायेगा। बावजूद इसके हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए प्रशासन, पुलिस व वन विभाग लगातार आदिवासियों और वनाश्रितों उत्पीड़न कर रहा है। दुद्धी तहसील के दर्जनों गांवों के आदिवासियों और वनाश्रितों पर एफआईआर दर्ज करा दी गयी है। पिण्डारी, पेढ़, अतरंवा, भरदुआ, जुगैल, हलिया के तंवारीकला समेत तमाम गांवों में लोगों को पुश्तैनी जमीन से उजाड़ दिया गया। आदिवासियों के साथ लगातार आरएसएस और भाजपा द्वारा अन्याय किया गया, कौन नहीं जानता कि भाजपा की सरकार ने पंद्रह साल तक आदिवासियों के चुनाव लड़ने पर ही रोक लगा दी थी और जब मोदी सरकार की इच्छा के विरूद्ध आदिवासियों को आंदोलन के बदौलत ओबरा और दुद्धी की विधानसभा सीटें हासिल भी हुई तो उसको रूकवाने के लिए इनके नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक ताकत लगाई। आज भी कोल जैसी आदिवासी जाति को आदिवासी का दर्जा तक नहीं मिला और आदिवासियों की इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद लोकसभा की एक सीट तक उनके लिए आरक्षित नहीं है। आप जानते है सोनभद्र जिला देश के सर्वाधिक पिछड़े बीस और प्रदेश के पांच जिलों में आता है लेकिन इसके विकास की कहानी आपसे छुपी नहीं है। आज तक लोगों को शुद्ध पेयजल तक नहीं मिल सका है। कई गांवों में जाने के लिए सड़के तक नहीं हैैै। आज भी इलाज के अभाव में मलेरिया, टाइफाइड़ और बीमारी से लोग असमय मरते है। ‘वीआईपी‘ की वसूली ने खनन के कारोबार को सिंड़ीकेट के हवाले कर दिया। परिणामस्वरूप इस जिले का हवा और पानी तक जहरीला हो गया है। उद्योगों में स्थानीय नौजवानों को रोजगार नहीं है और जिनकों मिला है वह ठेका मजदूर के बतौर स्थाई कामों में पूरी जिदंगी गुजार दे रहे है। अनपरा जैसी परियोजनाओं में तो काम कराकर सात माह से मजदूरी का भुगतान तक नहीं किया गया है। ऐसे बहुतेरे सवाल है जो यहां के लोगों की जिदंगी के लिए जरूरी है और जिन पर आवाज उठनी चाहिए। दरअसल इन सवालों पर बात न हो, यह राजनीति के विषय न बने इसलिए सचेत ढ़ग से संघ के नेतृत्व में दमन अभियान चलाया जा रहा है और राजनीतिक वैचारिक मतभेदों को जिला प्रशासन के नेतृत्व में पुलिसिया दमन और फर्जी मुकदमों से दबाया जा रहा है।

ऐसी स्थिति में जमीनीस्तर पर लोकतंत्र की रक्षा हो, कानून का राज स्थापित हो और हर कीमत पर आदिवासियों समेत हर नागरिक का सम्मान सुरक्षित रहे हम आपसे ‘लोकतंत्र के लिए प्रशासन-पुलिस दमन प्रतिकार अभियान‘ में शामिल होने की अपील करते है। आप जहां भी हो इस अभियान में हर स्तर पर मदद करें और सरकार से मांग करें कि लिलासी घटना की सीबीसीआईड़ी से जांच कराए, डा0 चंद्रदेव गोंड़ को प्रधान का चार्ज दिया जाए और तत्काल जनपद में जारी राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ताओं, आदिवासियों व निर्वाचित प्रतिनिधियों के उत्पीड़न पर रोक लगायी जाए, वनाधिकार कानून के तहत आदिवासियों व वनाश्रितों को जमीन पर अधिकार दिया जाए।

अपीलकर्ता

एस0 आ0 दारापुरी (पूर्व आई. जी. उ0 प्र0 पुलिस व संयोजक जनमंच), श्याम बिहारी यादव (जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय प्रधान संगठन), राजेश द्विवेदी (सामाजिक कार्यकर्ता), नंदलाल आर्य (जिला सचिव, सीपीएम), दिनकर कपूर (स्वराज अभियान), रवि गोंड़ बडकू (पूर्व प्रत्याशी ओबरा वि0 स0), वीरेन्द्र सिंह गोंड़ (पूर्व प्रत्याशी, ओबरा विधानसभा), राम कृष्ण पाठक (वरिष्ठ समाजसेवी), राहुल कुमार (स्वराज इंडिया), अकुंश दूबे (एनएसयूआई), श्यामा चरण गिरी (पीयुसीएल), चैधरी यशवंत सिंह (प्रदेश सचिव, राष्ट्रीय लोकदल), संतोष पटेल (जिलाध्यक्ष, राष्ट्रीय लोकदल), रामजी गुप्ता (लोकतांत्रिक जनता दल), ओ0 पी0 सिंह (संयोजक, वर्कर्स फ्रंट), डा0 चंद्रदेव गोंड़ (प्रधान एवं आदिवासी वनवासी महासभा), कृपाशंकर पनिका (पूर्व प्रत्याशी, ओबरा विधानसभा), का0 मारी (पूर्व सभासद पिपरी), बलबीर सिंह गोंड़ (पूर्व प्रधान), राजेश सचान (युवा मंच), तेजधारी गुप्ता (जिलाध्यक्ष ठेका मजदूर यूनियन), मोहन प्रसाद (संयुक्त मंत्री, ठेका मजदूर यूनियन), छेदी लाल राजभर (वर्कर्स फ्रंट), मंगरू प्रसाद श्याम, महेन्द्र प्रताप सिंह, मनोहर गोंड़, श्याम सुदंर खरवार, मेराज अहमद, वंशलाल गोंड़, रमेश सिंह खरवार, इंद्रदेव खरवार, प्रमोद चैबे, रामरूप खरवार, दसई गोंड़, सिंह लाल गोंड़ (मजदूर किसान मंच), राजाराम भारती (निर्माण मजदूर मोर्चा), ओम प्रकाश मौर्य (स्वराज इंडिया) आदि नागरिक व आदिवासी समाज।

सम्पर्क पता: रहीम शाह की मजार के पास, नई बस्ती, राबर्ट्सगंज, सोनभद्र। मो0 नं0- 9450153307, 9115256727।आम नागरिकों के नाम अपील

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