Home » पटेल को पूजकर क्या संघ हिन्दुत्व और हिन्दू राष्ट्रवाद को भूलने को तैयार है ?

पटेल को पूजकर क्या संघ हिन्दुत्व और हिन्दू राष्ट्रवाद को भूलने को तैयार है ?

जगदीश्वर चतुर्वेदी

मोदी को गांधी की हत्या से पहले वाला पटेल पसंद है। उस समय सरदार बल्लभ भाई पटेल की मुसलमानों के प्रति जो मनोदशा थी खासकर भारत विभाजन के बाद हुए दंगों के समय , मोदी को वह पटेल बार बार अपील करता है।

पटेल का दंगों के समय मुसलमानों के प्रति सही रवैय्या नहीं था। अब्दुल कलाम आजाद ने जो उस समय मंत्री थे अपने संस्मरणों में उसका सुंदर ज़िक्र किया है।

विभाजन के बाद दिल्ली में संघ मुसलमानों को नेस्तनाबूद करने पर आमादा था। पटेल उस समय एकदम संघ के मूक दर्शक बने हुए थे। उस समय प्रचार कराया गया कि मुस्लिम मुहल्लों में भयंकर हथियार पाए गए हैं और यह पटेल के इशारों पर किया गया।

यह भी कहा गया कि अगर हिन्दुओं और सिखों ने पहले हमला न किया होता तो मुसलमानों ने उन्हें साफ़ कर दिया होता। पुलिस ने कुछ हथियार करोलबाग और सब्जी मंडी से बरामद किए थे। सरदार पटेल के हुक्म से वे सभी हथियार सरकारी भवन में लाए गए और उस कमरे के सामने रखे गए जो मंत्रिमंडल की मीटिंग के लिए तय था। जब मंत्रिमंडल के सब सदस्य इकट्ठा हो गए तो सरदार पटेल ने प्रस्ताव किया कि पहले इन हथियारों को देख लिया जाय।

मंत्रियों ने वहाँ जाकर देखा।

मौलाना अब्दुल कलाम आजाद ने लिखा है – "वहाँ जाने पर हमने मेज पर रसोईघर की दर्जनों जंगलगी छुरियां देखीं जिनमें बहुतों की मूठ नदारत थी। हमने लोहे की खूंटियां देखीं जो पुराने घरों की चहारदीवारियों में पाई गंई थी और देखे कास्ट आयरन के पानी के कुछ पाइप। सरदार पटेल के अनुसार ये वे हथियार थे जिन्हें दिल्ली के मुसलमानों ने हिन्दुओं और सिखों को खत्म करने के लिए इकट्ठा किया था।

लार्ड माउंटबेटन ने एक दो छुरियां उठाईं और मुस्कराकर बोले : जिन्होंने यह सामान इकट्ठा किया है अगर वे यह सोचते हैं कि दिल्ली शहर पर इनसे कब्जा किया जा सकता है तो मुझे लगता है कि उन्हें फौजी चालों का अद्भुत ज्ञान है। "

संघ परिवार के लोग और मोदी बेहूदे तर्क दे रहे हैं कि पटेल किसी दल की थाती नहीं हैं वे हमारे स्वाधीनता संग्राम के नायक हैं और वे सबके हैं।

इन भले मानुषों से कोई पूछे कि जब स्वाधीनता संग्राम चल रहा था तो संघ कहाँ सोया हुआ था ?

जब देश को जगाने और संघर्ष करने की जरुरत थी तब संघ हिन्दूओं को जगाने में लगा था और साम्प्रदायिक एजेण्डे के लिए काम कर रहा था।

कम से कम संघ परिवार के नेताओं के मुखकमल से भारत का स्वाधीनता संग्राम शब्द सुनने में अटपटा लगता है। जब जंग थी तब वे भागे हुए थे अब स्वाधीनता संग्राम के सेनानियों के वारिस क्यों होना चाहते हैं ? यह असल में संघ परिवार की नकली सेनानी बनने की वर्चुअल कोशिश है।

सरदार बल्लभ भाई पटेल ने देश से जो कहा है उस पर कम से कम मोदी और संघ परिवार जरुर ध्यान दे – "यह हर एक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह यह अनुभव करे की उसका देश स्वतंत्र है और उसकी स्वतंत्रता की रक्षा करना उसका कर्तव्य है. हर एक भारतीय को अब यह भूल जाना चाहिए कि वह एक राजपूत है, एक सिख या जाट है. उसे यह याद होना चाहिए कि वह एक भारतीय है और उसे इस देश में हर अधिकार है पर कुछ जिम्मेदारियां भी हैं। "।

क्या संघ हिन्दुत्व और हिन्दू राष्ट्रवाद को भूलने को तैयार है ?

पटेल जब मरे तो उनके बैंक खाते में मात्र 345 रुपये जमा थे। वे मूर्तिपूजा और व्यक्तिपूजा के सख्त विरोधी थे। वे विचारों और कर्म से धर्मनिरपेक्ष थे।

 

About हस्तक्षेप

Check Also

भारत में 25 साल में दोगुने हो गए पक्षाघात और दिल की बीमारियों के मरीज

25 वर्षों में 50 फीसदी बढ़ गईं पक्षाघात और दिल की बीमांरियां. कुल मौतों में से 17.8 प्रतिशत हृदय रोग और 7.1 प्रतिशत पक्षाघात के कारण. Cardiovascular diseases, paralysis, heart beams, heart disease,

Bharatendu Harishchandra

अपने समय से बहुत ही आगे थे भारतेंदु, साहित्य में भी और राजनीतिक विचार में भी

विशेष आलेख गुलामी की पीड़ा : भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रासंगिकता मनोज कुमार झा/वीणा भाटिया “आवहु …

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा: चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा : चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश Occupy national institutions : …

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

अच्छे नहीं, अंधेरे दिनों की आहट

मोदी सरकार के सत्ता में आते ही संघ परिवार बड़ी मुस्तैदी से अपने उन एजेंडों के साथ सामने आ रहा है, जो काफी विवादित रहे हैं, इनका सम्बन्ध इतिहास, संस्कृति, नृतत्वशास्त्र, धर्मनिरपेक्षता तथा अकादमिक जगत में खास विचारधारा से लैस लोगों की तैनाती से है।

National News

ऐसे हुई पहाड़ की एक नदी की मौत

शिप्रा नदी : पहाड़ के परम्परागत जलस्रोत ख़त्म हो रहे हैं और जंगल की कटाई के साथ अंधाधुंध निर्माण इसकी बड़ी वजह है। इस वजह से छोटी नदियों पर खतरा मंडरा रहा है।

Ganga

गंगा-एक कारपोरेट एजेंडा

जल वस्तु है, तो फिर गंगा मां कैसे हो सकती है ? गंगा रही होगी कभी स्वर्ग में ले जाने वाली धारा, साझी संस्कृति, अस्मिता और समृद्धि की प्रतीक, भारतीय पानी-पर्यावरण की नियंता, मां, वगैरह, वगैरह। ये शब्द अब पुराने पड़ चुके। गंगा, अब सिर्फ बिजली पैदा करने और पानी सेवा उद्योग का कच्चा माल है। मैला ढोने वाली मालगाड़ी है। कॉमन कमोडिटी मात्र !!

Entertainment news

Veda BF (वेडा बीएफ) पूर्ण वीडियो | Prem Kahani – Full Video

प्रेम कहानी - पूर्ण वीडियो | वेदा BF | अल्ताफ शेख, सोनम कांबले, तनवीर पटेल और दत्ता धर्मे. Prem Kahani - Full Video | Veda BF | Altaf Shaikh, Sonam Kamble, Tanveer Patel & Datta Dharme

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: