रमन सिंह का नारा : जवानों को चिता – बेईमानों की चिंता

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लगातार बढ़ते नक्सली हमले भाजपा सरकार की विफलता का जीता-जागता सबूत

नक्सलवाद के ख़िलाफ़ रमन सिंह सरकार की लड़ाई खोखली व कमज़ोर

रमन सिंह की प्राथमिकता छत्तीसगढ़ की सुरक्षा नहीं सिर्फ अपने वोट’ की रक्षा,

रमन सिंह छत्तीसगढ़ को तो दूर, अपने ही गृह जिला, कवर्धा को भी नक्सल मुक्त नहीं रख पाए!

रायपुर, 28 अक्तूबर। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार केवल देश के जवानों का इस्तेमाल करती है और उनकी सुरक्षा व उनके परिवारों की ख़ुशहाली का उसे कोई ख़याल नहीं है। भाजपा सरकार जवानों की वीरता का श्रेय तो लेती है लेकिन उनपे बढ़ते हमले, बढ़ती शहीदों की संख्या पर ज़िम्मेदारी और जवाबदेही से मुंह मोड़ लेती है।

पार्टी ने कल 27 अक्टूबर 2018 को बीजापुर में CRPF के पांच जवानों के नक्सल हमले में मारे जाने पर इन शहीद जवानों की वीरता और शौर्यता को सलाम करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।

पार्टी प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा कि बीजापुर में हुआ यह हादसा रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकर की विफलताओं का एक और जीता-जागता सबूत है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री रमन सिंह नक्सलवाद के विषय पर छत्तीसगढ़ को लगातार बेशर्मी से गुमराह करते रहे हैं। सच्चाई ये है कि 15 वर्ष की रमन सिंह सरकार और 41/2  वर्ष की मोदी सरकार में नक्सलवादियों के हौसले बुलंद हुए हैं। मावोवाद का विस्तार ही हुआ है। दक्षिण बस्तर के तीन सीमावर्ती इलाकों तक सीमित माओवाद ने बढ़ते-बढ़ते 14-15 जिलों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। 

नक्सलवाद को मिटाना था नोटबंदी का प्रथम जुमला

श्री शेरगिल ने कहा कि कहाँ गया मोदी जी का 56 इंच का सीना, नक्सलवादियों ने 1200 से अधिक CRPF के जवानों को जीवन छीना।

उन्होंने कहा कि 8नवम्बर 2016को देश के प्रधानमंत्री श्री मोदी और 19 नवम्बर 2016 को मुख्यमंत्री श्री रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ के लोगों को आश्वासन दिया था कि नोटबंदी के निर्णय से नक्सलवाद जड़ से मिट जाएगा। ज़मीनी हक़ीक़त है कि नोटबंदी के बाद नक्सलवादियों के हौसले और बुलंद हुए हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पिछले दो सालों में नोटबंदी के बाद भी 23 बड़े नक्सली हमलों में 97 जवान शहीद और 121 मासूम लोगों की जान गई। पिछले साल सुकमा (2017) में हुआ नक्सली हमला पिछले 7 सालों का सबसे बड़ा हमला था, जिसमें 26 जवान शहीद हुए थे और इस वर्ष 9 जवान सुकमा और 5 जवान बीजापुर में शहीद हुए। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की रमन सिंह सरकार ने इस हमले से सबक़ लेते हुए सुरक्षा इंतज़ामों में आपसी सहयोग और आपसी सामंजस्य बढ़ाने के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन हमले बदस्तूर जारी हैं।

श्री शेरगिल ने कहा मोदी सरकार ने लोक सभा में पेश (Unstarred Question No.1819) एक अपने ही जवाब में पिछले 3 सालों में नक्सली हमलों में आई गिरावट को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया, लेकिन इन हमलों में शहीद हुए जवानों और मारे गए स्थानीय लोगों की संख्या में बढ़ोतरी की सच्चाई को बड़ी होशियारी से छिपा लिया।

उन्होंने कहा यह सच है कि साल 2015 में 1089 नक्सली हमले हुए थे जो कि 2016 में घट कर 1048 और 2017 में 908 रह गए। वहीं दूसरी तरफ़ इन हमलों में 2015 में 57 जवान शहीद हुए और 93 लोग मारे गए, जबकि 2016 में शहीद जवानों की संख्या बढ़ कर 66 और स्थानीय नागरिकों की मौत का आँकड़ा 123 हो गया। साल 2017 में हमारे 74 जवान शहीद हुए। जबकि UPA सरकार के आख़री 4 सालों में नक्सली हमलों की संख्या घट कर आधी रह गई थी।

श्री शेरगिल ने कहा कि सत्य तो यह है रमन सिंह का ध्यान केवल वोट सुरक्षा पर है, छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा पर नहीं!

कांग्रेस नेता ने कहा कि रमन सिंह सरकार की नक्सलवाद को ख़त्म करने की खोखली नीयत स्वर्गीय श्री KPS Gill (Former DGP Punjab) के बयान से जगज़ाहिर हुई, जहाँ उन्होंने कहाँ कि उन्हें anti naxal strategy विभाग का अध्यक्ष बनाने के बाद भी रमन सिंह सरकार ने उन्हें नक्सलवाद के ख़िलाफ़ कार्यवाही करने से रोक दिया और केवल तनखा लेने और सरकारी सुविधाओं का आनंद उठाने की सलाह दी थी।

श्री शेरगिल ने कहा कि कांग्रेस ने पिछले 5 सालों में इस हक़ीक़त को बेनक़ाब करने के लिए सभी मंचों से यह मुद्दा उठाया है कि छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या के पीछे भाजपा सरकार की तरफ़ से फ़ंड में कटौती सबसे बड़ी वजह है।

नक्सली समस्या से निपटने में सरकार गम्भीर नहीं

श्री शेरगिल ने कहा कि सरकार ने नक्सली समस्या से निपटने के लिए कांग्रेस-UPA सरकार द्वारा निर्धारित ₹1300 करोड़ का फ़ंड 88 नक्सल प्रभावित जिलों के लिए रद्द कर दिया। सन 2007 में कांग्रेस द्वारा स्थापित 250 पिछड़े जिलों के लिए भी backward region grant fund को रद्द कर दिया।

उन्होंने कहा कि भाजपा के अपने ही सहयोगी बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार इस फ़ंड में कटौती के मुद्दे को उठा चुके हैं। नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में गृह मंत्री राजनाथ सिंह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के सामने ही नीतीश कुमार ने कहा था कि केंद्रीय सहायता इस समस्या से निपटने में नाकाफ़ी साबित हो रही है। केंद्र सरकार ने केंद्रीय व राज्य की सरकारों का ख़र्च का अनुपात 60:40 कर दिया है, जबकि नीतीश कुमार इसको 90:10 करने की माँग कर चुके हैं।

वहीं दूसरी तरफ़ भाजपा व नक्सलियों के गठजोड़ को मज़बूती से उठाते रहे कांग्रेस के पूर्व छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष स्वर्गीय नंद कुमार पटेल जी सहित दर्जनों कांग्रेस नेताओं ने अपनी जान की आहूति दे दी।

श्री शेरगिल ने कहा कि रमन सिंह व मोदी सरकार नक्सली समस्या को कम करके दिखाने वाले आँकड़े पेश कर जनता को गुमराह करने की पुरज़ोर कोशिश कर रही है। रमन सिंह को नक्सलियों ने सरकार की लाचारी का जवाब कल ही हमला कर के दिया है जहाँ वे बस्तर इलाक़े में भाजपा के चुनाव प्रचार कर रहे थे। मोदी जी ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा को अपना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया था, लेकिन 4 साल में आँकड़े हक़ीक़त को साबित कर रहे हैं कि उनके वादे सिर्फ़ खोखले नारे ही बन कर रह गए हैं।

उन्होंने कहा कि रमन सिंह छत्तीसगढ़ को तो दूर, अपने ही गृह जिला कवर्धा को भी नक्सल मुक्त नहीं कर पाए!

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