Home » समाचार » 3000 साल पुरानी सुश्रुत तकनीक की मदद से भारत में अफगान महिला की नाक दोबारा बनाई

3000 साल पुरानी सुश्रुत तकनीक की मदद से भारत में अफगान महिला की नाक दोबारा बनाई

3000 साल पुरानी सुश्रुत तकनीक की मदद से भारत में अफगान महिला की नाक दोबारा बनाई

  • इतिहास से जुड़ी तकनीक की मदद लेकर डॉ. अजय कश्यप ने अफगानिस्तानी महिला की बंदूक से गोली लगने के कारण खराब हुई नाक को दोबारा बनाया
  • शम्सा करीब चार साल बाद अब फिर से सामान्य तरीके से सूंघ व सांस ले पा रही हैं।

नई दिल्लीः देश के जाने माने प्लास्टिक सर्जन डॉ. अजय कश्यप ने अफगानिस्तानी महिला के नाक को दोबारा लगाकर चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।

एक विज्ञप्ति के मुताबिक दरअसल 28 साल की महिला शम्सा (पहचान छिपाने के लिए नाम में बदलाव) को बंदूक से गोली लगने के बाद उसका नाक खराब हो गया था, जिसे डॉ. अजय ने 3000 साल पुरानी सुश्रुत तकनीक के इस्तेमाल से पीड़िता के नाक का दोबारा निर्माण किया।

शम्सा जब 24 साल की थीं, तब अटैक के दौरान वह बच गई थीं लेकिन उनकी नाक का ज्यादातर हिस्सा खत्म हो गया था। इसकी वजह से उनकी सामान्य रूप से सूंघने और सांस लेने की क्षमता खत्म हो गई थी और इससे शम्सा का आत्मविश्वास भी खोने लगा।

चार साल पहले जब शम्सा की शादी करके घर बसाने की उम्र थी, तब उसके साथ ऐसा भयानक हादसा हो गया। पर कहते हैं न कि हर रात की सुबह होती है और शम्सा के मामले में भी ऐसा ही हुआ, जब उसने प्लास्टिक सर्जरी कराने का फैसला किया। इसके बाद इलाज के लिए वह अपने परिवार के साथ भारत आई और नाक के निर्माण की सफलतापूर्वक सर्जरी के बाद अब उसकी ज़िंदगी वापस ट्रैक पर आ गई।

जिस तरह से शम्सा की कहानी असाधारण हैं, ठीक उसी तरह भारत में उसका इलाज भी असाधारण तरीके से हुआ है।

सर्जरी के बारे में बताते हुए कास मेडिकल सेंटर और मेडस्पा के मेडिकल डॉयरेक्टर डॉ. अजय कश्यप ने विज्ञप्ति में कहा,

हम अकसर इस तथ्य पर गर्व नहीं करते कि आज की सबसे मॉर्डन और एडवांस सर्जिकल प्रक्रियाएं जैसेकि प्लास्टिक सर्जरी की जड़े भारत से जुड़ी हुई हैं। सुश्रुत तकनीक वैज्ञानिक आधार पर एकदम सटीक है और इसका प्रयोग आज भी नाक और कान के निर्माण में किया जा सकता है, बस इसे हमने आज की आधुनिक तकनीकों से जोड़ दिया हैं। शम्सा के मामले में मैंने सुश्रुत में बताई तकनीकों की मदद से नाक के निर्माण के लिए उसके गाल की त्वचा को लिया।  

हालांकि ऐसे जटिल मामलों में आमतौर पर बहुत ज्यादा सटीकता और अनुभव की जरूरत होती है। इस सर्जरी में आई जटिलताओं के बारे में बताते हुए डॉ. अजय कश्यप ने कहा,

जब भी कोई मेडिकल समस्या के इलाज के साथ मुंह के निर्माण से जुड़ी कोई सर्जरी आती हैं, तो हमें कोस्मेटिक पहलू को भी देखना पड़ता है। इस मामले में, हमारी चुनौती नाक के सबसे बड़े हिस्से को बनाने के साथ और ज्यादा कोई निशान भी नहीं छोड़ना थी। हमने नाक के सेप्टम और नाक के मार्ग को बनाने के लिए गाल के अंदर के टिशू को लिया। हालांकि यह काफी मुश्किल प्रक्रिया थी लेकिन हमारी मेहनत रंग लाई और हम रोगी को वैसी ही नाक दे पाए जैसी वह चाहती थी।

विज्ञप्ति के मुताबिक परिवार सर्जरी से बेहद खुश है और उन्होंने सोचा नहीं था कि इतने कम समय में उन्हें इतने बेहतरीन परिणाम मिलेंगे। वैसे तो शम्सा अपनी अफगानी भाषा में ही बात करती हैं लेकिन ट्रांसलेटर की मदद से उन्होंने बताया,

गोली लगना मेरी ज़िंदगी का सबसे बुरा अनुभव था। हमारे देश में गोलियां चलना आम बात हैं लेकिन जो लोग जीवित बच जाते हैं, उनके लिए मानसिक और शारीरिक ट्रॉमा से बाहर निकलना बहुत मुश्किल होता हैं और खासतौर से अगर शरीर का कोई अंग खराब हो जाएं, तो स्थिति ज्यादा भयावह हो जाती हैं। मेरे पास आज खुशी जाहिर करने के लिए शब्द नहीं हैं कि मैं आज चार साल बाद सामान्य तरीके से सांस ले पा रही हूं, बोलने में समर्थ हूं और सूंघ पा रही हूं। इस सर्जरी ने मेरी ज़िंदगी बदल दी और मुझे उम्मीद हैं कि घर जाकर जब लोग मुझे देखेगें, तो इस तरह की मेडिकल मदद लेने के लिए प्रेरित होंगे।

कहा जाता है कि डॉ. अजय कश्यप ने जो तकनीक इस्तेमाल की थी, उसे आज से 3000 साल पहले सर्जरी के पिता कहे जाने वाले सुश्रुत पहली बार दुनिया के सामने लेकर आए थे। आपको बता दें कि सुश्रुत ऐसे भारतीय फिजिशयन के तौर पर जाने जाते हैं, जिन्होंने भारतीय इतिहास को मेडिसन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकें दी, खासतौर से नाक के निर्माण में। हालांकि शारीरिक रचना, पैथोफिजियोलॉजी और थुरेपेटिक में उनकी शिक्षाएं बेहद असाधारण हैं लेकिन नाक और कान के दोबारा निर्माण की सर्जरी के योगदान को वैदिक काल से लेकर मॉर्डन सर्जिकल प्रैक्टिस में देखा जा सकता हैं।1

ज़रा हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें

<iframe width="903" height="508" src="https://www.youtube.com/embed/kEIWLvvUUV8" frameborder="0" allow="autoplay; encrypted-media" allowfullscreen></iframe>

Topics plastic Surgery in Hindi, plastic surgeon in Hindi,

About हस्तक्षेप

Check Also

media

82 हजार अखबार व 300 चैनल फिर भी मीडिया से दलित गायब!

मीडिया के लिये भी बने कानून- उर्मिलेश 82 thousand newspapers and 300 channels, yet Dalit …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: