अस्मिता विमर्श

Main Ek Karsewak Tha book by Bhanwar Meghwanshi

‘मैं एक कारसेवक था’ : आत्मकथा के बहाने मानवता की जरूरी लड़ाई की किताब !!

“मेरी कहानियां, मेरे परिवार की कहानियां – वे भारत में कहानियां थी ही नहीं. वो तो ज़िंदगी थी.जब नए मुल्क में मेरे नए दोस्त बने, तब ही यह हुआ कि मेरे परिवार के साथ जो…


Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

अंबेडकर के बाद हिंदू साम्राज्यवादी एजेंडा में गौतम बुद्ध

Gautam Buddha in the Hindu imperialist agenda after Ambedkar : india will be powerful in asia using buddha diplomacy कल हमने लिखा था, अंबेडकर (Ambedkar) के बाद हिंदू साम्राज्यावदी एजेंडा (Hindu imperial agenda) में गौतम…


अरुंधति रॉय की किताब 'एक था डॉक्टर और एक था संत', (Arundhati Roy's book Ek Tha Doctor Ek Tha Sant)

अरुंधति रॉय और डॉ. राम विलास शर्मा की आँखों से गांधी और अंबेडकर देखना

विमर्शमूलक विखंडन और कोरी उकसावेबाजी में विभाजन की रेखा बहुत महीन होती है अरुंधति रॉय की किताब ‘एक था डॉक्टर और एक था संत‘, (Arundhati Roy’s book Ek Tha Doctor Ek Tha Sant) की समीक्षा…


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मार्क्सवादी प्रगतिशीलों की वैचारिक विक्षिप्तता : जातिवादी अस्मिताएँ पूंजीवाद के विरुद्ध कभी संघर्ष के मजबूत आधार नहीं बन सकतीं

बहुलता के हुड़दंगी परिदृश्य में से तानाशाही के सही प्रत्युत्तर की तलाश लखनऊ के हिंदी के आलोचक वीरेन्द्र यादव (Hindi critic Virendra Yadav) की फेसबुक टाइमलाइन पर 22 मई को श्री लक्ष्मण यादव की एक…


Kanhaiya Kumar NDTV Prime Time

अस्मिता विमर्श को इतना आत्मघाती न बनाइए कि आंबेडकर की Annihilation of caste एक प्रहसन में तब्दील हो जाए

सुदर्शन की एक बहुचर्चित कहानी है ‘हार की जीत’, जिसमें खड्गसिंह नामक डाकू बाबा भारती से विश्वासघात करके उनका घोड़ा जबरदस्ती हथिया लेता है। घोड़ा छीने जाने के बाद बाबा भारती उस डाकू से कहते…


Jagadishwar Chaturvedi

अस्मिता, अंबेडकर और रामविलास शर्मा

रामविलास शर्मा (Ram Vilas Sharma) के लेखन में अस्मिता विमर्श को मार्क्सवादी नजरिए (Marxist Attitudes) से देखा गया है। वे वर्गीय नजरिए से जाति प्रथा (caste system) पर विचार करते हैं। आमतौर पर अस्मिता साहित्य…


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‘मोदी युग’ की दो परिघटनाएं, अल्पसंख्यक और अस्मितावाद की राजनीति करने वाले जितना जल्दी समझ लें उतना बेहतर

पहली परिघटना : प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की टीम ने राजनीतिक बहस (political debates) को ज़मीन से उठा कर आभासी दुनियां (virtual worlds) में प्रक्षेपित कर दिया है. उसकी इस सफलता के…


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साधु ऐसा चाहिए  : कट्टरता जीतेगी या उदारता

साधु ऐसा चाहिए  : कट्टरता जीतेगी या उदारता (यह लेख भी 2001-2 के आस-पास 'जनसत्ता' में छपा था और 'कट्टरता जीतेगी या उदारता' (राजकमल प्रकाशन, 2004) पुस्तक में संकलित है. आपके पढ़ने के लिए लेख…


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भीमराव अंबेडकर को यहां से देखो : भारत एक खोज को अछूत की खोज ने ढंक दिया

भीमराव अंबेडकर को यहां से देखो : भारत एक खोज को अछूत की खोज ने ढंक दिया आधुनिक युग में अछूत कैसे जीएंगे ? गैर अछूत कैसे जीएंगे इसके बारे में कोई विवाद ही नहीं था,…


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उत्तर प्रदेश का जमीनी परिदृश्य और कांग्रेस की भूमिका

उत्तर प्रदेश का जमीनी परिदृश्य और कांग्रेस की भूमिका हरे राम मिश्र बता रहे हैं कि मुलायम सिंह यादव की सक्रियता में सपा चाहकर भी भाजपा के खिलाफ नहीं जाएगी। अखिलेश के पास सात प्रतिशत…