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Tag Archives: आतंकवाद

भारत में लोकतंत्र का भविष्य

Election Commission of India. (Facebook/@ECI)

जनता के द्वारा, जनता के लिये, जनता की सरकार के लोकतंत्र का अथवा उस लोकतंत्र का जो ज़िंदा तो रहेगा लेकिन अधिनायकवाद के नीचे घुटी घुटी साँसे लेते हुए। जिसमें वोट देने का अधिअकार तो होगा, पर केवल, प्रत्येक 5 साल में एक नेता का राजतिलक करने के लिये। उसे अपनी आवश्यकताओं को प्रगट करने और उनकी पूर्ति के लिये कोशिशें करने पर अपराधी मान जाएगा।

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कश्मीर में शिक्षा और रोजगार दे दिया जाता तो आतंकवाद भी नहीं पनपता : डॉक्टर अनिल सदगोपाल

भाई वैद्य समिति राष्ट्रीय संगोष्ठी में शिक्षा और रोजगार के संकट (Education and employment crisis) पर गंभीर मंथन इंदौर। शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। शिक्षा में बदलाव के बगैर ना तो देश तरक्की कर सकता है और ना ही जातिगत भेदभाव समाप्त हो सकता है। शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो ज्ञान के साथ कौशल विकास भी …

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क्या आतंकवाद को धर्म से जोड़ा जाना चाहिए?

Ram Puniyani राम पुनियानी, लेखक आई.आई.टी. मुंबई में पढ़ाते थे और सन् 2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं।)

यूरोप और अमरीका की तुलना में पश्चिम एशिया में अधिक संख्या में लोग आतंकवाद के शिकार हुए हैं। दुनिया में मुसलमानों की सबसे बड़ी आबादी इंडोनेशिया में है परंतु वहां आतंकवाद का नामोनिशां तक नहीं है।

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इंसाफ का पलड़ा गरीबों और वंचितों के खिलाफ अमीरों के पक्ष में-शाहिद आजमी की पांचवी बरसी पर आनन्द स्वरूप वर्मा

National News

आज भारतीय स्टेट आतंकवाद का खुद पोषण करता है। इस्लामिक आतंकवाद का पूरा संचालक ही अमरीका है। ऐसा सितंबर 2001 से नही बल्कि 1960 के दशक से यह पोषण जारी है।

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हिंदुत्व की अवधारणा ही आतंकी है !!!

Amalendu Upadhyaya hastakshep अमलेन्दु उपाध्याय लेखक वरिष्ठ पत्रकार, राजनैतिक विश्लेषक व टीवी पैनलिस्ट हैं।

कांग्रेस के साथ आरंभ से दिक्कत यह रही है कि वह किसी भी मुद्दे पर कोई भी स्टैण्ड चुनावी गुणा भाग लगाकर लेती है और अगर मामला गांधी नेहरू खानदान के खिलाफ न हो तो उसे पलटी मारने में तनिक भी हिचक नहीं होती है। उसकी इसी कमजोरी का फायदा उठाकर देश में सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतें अपना विस्तार करती …

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मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है वैचारिक आतंकवाद

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

अतिवादी विचारधारा के चरमपंथी सोच रखने वाले कई चतुर लोग अपने धर्म व समुदाय के लोगों को किसी न किसी मुद्दे के बहाने यह समझा पाने में सफल हो जाते हैं कि उन्हें, उनके परिवार को व उनके समुदाय को देश के ही अमुक समुदाय या वर्ग विशेष के लोगों से गंभीर खतरा है।

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