कबीर

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‘वर्ण-संघर्ष’ के सिवा कुछ नहीं था बुद्ध और ब्राह्मण का संघर्ष

नोट – प्रसिद्ध दलित चिंतक  कॅंवल भारती का यह आलेख “कबीर का ब्राह्मण से संवाद” September 4, 2012 को हस्तक्षेप पर प्रकाशित हुआ था ब्राह्मण गुरु जगत का, साधु का गुरु नाहिं। उरझि-पुरझि करि मरि…


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अपने युग की जन-विरोधी सामाजिक विसंगतियों पर जोरदार प्रहार किया कबीर ने

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, समाज में अपने जीवन का अस्तित्व बनाए रखने के लिए उसे संघर्ष करना पड़ता है। यह संघर्ष उसे मानव से भी करना पड़ता है और प्रकृति से भी। फल-स्वरूप उसे…


national news

आजादी की साझा लड़ाई सौ बरस चली, लेकिन 67 सालों में ही उन क्रान्तिकारियों को भुलाने की साजिश रची जा रही

नेशनल लोकरंग एकेडमी के तत्वाधान में – आजमगढ़ में प्रतिरोध की संस्कृति ‘अवाम का सिनेमा’ हफ्ते भर बिखरे विविध रंग, शहर से निकलकर गाँव-गिरांव तक पहुँचा कारवाँ आजमगढ़। नेशनल लोकरंग एकेडमी उत्तर प्रदेश ( आजमगढ़…


opinion

कबीर-तुलसी के काव्य में स्त्री-विरोध

स्त्री पर ‘अच्छी’ और ‘बुरी’ का स्टैंप लगाने और भली-बुरी स्त्री का निर्णय लेने में सदा से पुरुष ही क्यों बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते रहे हैं? भक्तिकालीन साहित्य में पाखण्ड-विरोध के समानान्तर स्त्री-विरोध का स्वर…