कार्तिक पूर्णिमा की शाम

Chand Kavita

मरजाने चाँद के सदके… मेरे कोठे दिया बारियाँ…

….कार्तिक पूर्णिमा की शाम से.. वो गंगा के तट पर है… मौजों में परछावे डालता.. सिरते दीप को निहारता.. सुर्ख़ आँखों वाला चाँद.. कच्ची नींद का जागा झींका.. माथे पर ढेर सी रोलियों का टीका……