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Tag Archives: गांधी

गाँधी के देश में गोडसे का महिमामण्डन ?

Godse's glorification in Gandhi's country?

कृतज्ञ राष्ट्र इस वर्ष अपने परम प्रिय राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150 वीं जयंती मना रहा है। इस अवसर पर गांधीवादी विचारधारा तथा गाँधी दर्शन को लेकर पुनः चर्चा छिड़ गयी है। हिंसा, आक्रामकता, सांप्रदायिकता, ग़रीबी तथा जातिवाद के घोर विरोधी गाँधी को देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में इसलिए भी अधिक शिद्दत से याद किया जाता रहा है …

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बकरीद और गांधी

Mahatma Gandhi statue in the Parliament premises. (File Photo: IANS)

बकरीद का त्यौहार हिन्दू व मुसलमानों को एक तरह की चिंता की स्थिति में डाल देता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। हमें सहनशील होना चाहिए। हिन्दू, मुसलमानों के त्यौहारों में क्यों दखल देते हैं? मुसलमान बकरीद के दिन पशुओं की बलि देते हैं। इन पशुओं में गाय भी शामिल है। परंतु मुसलमानों को गाय की बलि क्यों चढ़ानी चाहिए जब …

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अरुंधति रॉय और डॉ. राम विलास शर्मा की आँखों से गांधी और अंबेडकर देखना

अरुंधति रॉय की किताब 'एक था डॉक्टर और एक था संत', (Arundhati Roy's book Ek Tha Doctor Ek Tha Sant)

विमर्शमूलक विखंडन और कोरी उकसावेबाजी में विभाजन की रेखा बहुत महीन होती है अरुंधति रॉय की किताब ‘एक था डॉक्टर और एक था संत‘, (Arundhati Roy’s book Ek Tha Doctor Ek Tha Sant) की समीक्षा अरुंधति रॉय की किताब ‘एक था डॉक्टर और एक था संत‘, (Arundhati Roy’s book Ek Tha Doctor Ek Tha Sant,) लगभग एक सांस में ही …

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क्या 21 वीं सदी में गांधी किसी व्यक्ति के रोल मॉडल हो सकते हैं?

Mahatma Gandhi

Can Gandhi be an individual’s role model in the 21st century? ऋषभ कुमार मिश्र गांधी की 150 वीं जयंती (150th birth anniversary of Gandhi) के अवसर पर सर्वाधिक प्रासंगिक प्रश्न है कि भारत सहित दुनिया की ‘युवा‘ आबादी के लिए बापू की विरासत के क्या निहितार्थ हैं? क्या वे किताबों, इण्टरनेट, सिनेमा, और मौखिक आख्यानों में कैद ज्ञान हैं जिसकी …

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गांधी को हमने राष्ट्र की सीमा में बांध दिया, जबकि वह किसी भी सीमा से परे थे-प्रकाश भाई शाह

Mahatma Gandhi

गांधी ने लोकतांत्रिक संस्थानों में जन भागीदारी की वकालत की थी, जन को जोड़ने की उन्होंने पूरी कोशिश भी की, लेकिन सरकारों ने इसके उलट काम किया। परिणामस्वरूप आज संस्थान बेजान बन कर रह गए हैं

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वैकल्पिक राजनीति के गुनाहगार- “आप” के पाप

Anna Hazare Arvind Kejriwal

आम आदमी पार्टी (आप) को वैकल्पिक राजनीति की वाहक बताने वालों का दावा शुरू से ही खोखला है। वह हास्यास्पद भी है - क्योंकि ‘आप’ सीधे नवउदारवाद की कोख से पैदा होने वाली पार्टी है। इस पार्टी में सस्ते सत्ता-स्वार्थ की खींचतान के चलते कुछ लोग फिर से वैकल्पिक राजनीति का वास्ता दे रहे हैं। यह पहले से चल रही लबारपंती का एक और विस्तार है।

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क्या गांधी भी लोकतंत्र के लिए खतरा हैं?

Anna Hazare Arvind Kejriwal

हमारा संसदीय लोकतंत्र दुनिया का सबसे शक्तिशाली लोकतंत्र है। इस तंत्र की जड़ें लोक में काफी गहरी हैं। धरना-प्रदर्शन और अनशन से लोकतंत्र को शक्ति मिलती है।

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