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Tag Archives: डॉ. राममनोहर लोहिया

भारत छोड़ो आंदोलन की चेतना : लोहिया का बोध

23 जून 1962 को डॉ लोहिया का नैनीताल में भाषण, Speech of Dr. Lohia Nainital on 23 June 1962

भारत छोड़ो आंदोलन की 77वीं सालगिरह पर विशेष Special on the 77th anniversary of Quit India Movement 9 अगस्त 2019 को अगस्त क्रांति (August Revolution) के नाम से मशहूर और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास (History of India’s independence movement) में मील का पत्थर माने जाने वाले भारत छोड़ो आंदोलन की 77वीं सालगिरह है. भारतीय जनता की स्वतंत्रता की …

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और अंत में लोहिया! विडम्बना या पाखंड की पराकाष्ठा? 

Narendra Modi new look

23 मार्च को डॉ. राममनोहर लोहिया का जन्मदिन (Dr. Ram Manohar Lohia’s Birthday) होता है. हालांकि कहा जाता है वे अपना जन्मदिन मनाते नहीं थे. क्योंकि उसी दिन क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव (Revolutionary Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev) को ब्रिटिश हुकूमत (British rule) ने फांसी पर चढ़ाया था. लिहाज़ा, भारत के ज्यादातर समाजवादी (Most Socialists of India) लोहिया …

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डॉ. लोहिया की पुण्य तिथि पर एकजुट हुए समाजवादी व वांमपंथी

Socialist and Leftist united on the death anniversary of DR. Lohia सिंगरौली। बैढन स्थित किसान आदिवासी विस्थापित एकता मंच के कार्यालय पर डॉ. लोहिया की 47 वीं पुण्य तिथि पर रविवार शाम को 4 बजे से एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में डॉ. लोहिया के विचारों और कार्यशैली को याद करते हुए उनके पदचिन्हों पर चलने का …

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क्या सचमुच पूँजीवाद के विरोधी थे लोहिया?

opinion debate

लोहिया, आंबेडकर और गाँधी (भाग-2) | Lohia, Ambedkar and Gandhi लोहिया न जाति से ऊपर उठे थे और न धर्म से (यह आलेख रोशन प्रेमयोगी के उपन्यास ‘आजादी: टूटी फूटी’ की समीक्षा नहीं हैं, पर उसके बहाने लोहिया के समाजवाद की आलोचना है।) लोहिया के विचारों को लेकर कुछ सवाल उभरते हैं। मसलन, यह सच है कि सिर्फ संसद में …

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थैंक यू मोदीजी, इस बार तो बच गए डॉ. लोहिया!

debate, thought, analysis,

हर साल 26 जनवरी January 26 आती है. हर बार पद्म पुरस्कार Padma awards व भारत रत्न Bharat Ratna को लेकर तरह-तरह की चर्चा होती है. लोग शिकायत करते पाए जाते हैं कि इस शख्स को क्यों दिया गया, उस शख्स को क्यों नहीं दिया गया? गड़े मुर्दे भी खूब उखाड़े जाते हैं. बार-बार की शिकायत दोहराई जाती है कि …

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आज लोहिया होते तो गैर भाजपावाद का आह्वान करते

debate, thought, analysis,

अगर आज लोहिया होते तो… ‘जिंदा कौमें पांच साल इंतजार नहीं करतीं.’ गैर-कांग्रेसवाद के जनक और समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया का यह कथन आज की सरकारों के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है जितना 1960 के दशक में जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी की सरकारों के लिए था. लोहिया युग पुरुष थे और ऐसे लोगों का चिंतन …

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भारतीय समाजवाद के पितामह आचार्य नरेंद्र देव

Acharya Narendra Dev

‘‘समाजवाद का ध्येय वर्गहीन समाज की स्थापना है। समाजवाद प्रचलित समाज का इस प्रकार का संगठन करना चाहता है कि वर्तमान परस्पर विरोधी स्वार्थ वाले शोषक और शोषित, पीड़क और पीडि़त वर्गों का अंत हो जाए; वह सहयोग के आधार पर संगठित व्यक्तियों का ऐसा समूह बन जाए जिसमें एक सदस्य की उन्नति का अर्थ स्वभावतः दूसरे सदस्य की उन्नति …

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पं. नेहरू के शिष्य थे डॉ. लोहिया

गरीब आदमी की पक्षधरता की राजनीति की बुनियाद डाली थी नेहरू और लोहिया ने Nehru and Lohia had laid the foundation for the politics of favoritism of the poor. आजकल देश के दो सबसे बड़े राज्यों में डॉ. राम मनोहर लोहिया के अनुयायियों की सरकार है। उत्तर प्रदेश और बिहार के समाजवादी मुख्यमंत्रियों की सरकारें दावा करती पायी जाती हैं …

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