पत्रकारिता

national press day राष्ट्रीय प्रेस दिवस

आज की तारीख में काला दिवस के रूप में मने प्रेस दिवस

Today, Press Day is celebrated as Black Day. आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस है (Today is national press day)। मेरे कई साथी जो मीडिया समूह में मालिकान और संपादकों की चाटुकारिता करते हुए मीडिया की जिम्मेदारियों…


Mahatma Gandhi 1

सत्याग्रही संपादक गांधी : मीडिया को फ़िर से पत्रकारिता बनाने की लड़ाई कलम के नाम उधार है

“यदि यह विचारधारा सच हो, तो दुनिया के कितने समाचारपत्र इस कसौटी पर खरे उतर सकते हैं? लेकिन निकम्मों को बंद कौन करे? कौन किसे निकम्मा समझे? उपयोगी और निकम्मे दोनों साथ-साथ ही चलते रहेंगे।…


BBC

बीबीसी : निर्भीक पत्रकारिता का सर्वोच्च स्वर

इस समय विश्व का अधिकांश भाग हिंसा, संकट, सत्ता संघर्ष, साम्प्रदायिक व जातीय हिंसा तथा तानाशाही आदि के जाल में बुरी तरह उलझा हुआ है। परिणाम स्वरूप अनेक देशों में आम लोगों के जान माल…


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हमारी पत्रकारिता के पतन की पराकाष्ठा, धिक्कारिये इस तरह के नेताओं और पत्रकारों को

कुबूलनामा ? हमारी पत्रकारिता के पतन की पराकाष्ठा देखिये। आज ‘अमर उजाला‘ की हैड लाइन है – ‘इमरान का कुबूलनामा, जंग हुई तो भारत से हार जायेगा पाकिस्तान’ और सब टाइटिल है – ‘पारंपरिक जंग…


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नंदकिशोर नौटियाल : हिन्दी पत्रकारिता के भीष्म पितामह

नंदकिशोर नौटियाल : हिन्दी पत्रकारिता के भीष्म पितामह | Nandkishore Nautiyal: Bhishma Pitamah of Hindi Journalism पत्रकारिता को व्यवसाय नहीं, मिशन समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार, हिंदी ब्लिट्ज व नूतन सवेरा के सम्पादक नंदकिशोर नौटियाल (Nandkishore…


India Today cover story, इंडिया टुडे की कवर स्टोरी 30 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं की आजीविका पर संकट

यह भारतीय पत्रकारिता का वो कालखंड है जिसमें लिखा सच और बोला झूठ जा रहा है !

प्रतिष्ठित पत्रिका इंडिया टुडे की कवर स्टोरी (India Today cover story) के लिए पत्रिका लोगों के निशाने पर आ गई है। दरअसल इंडिया टुडे ने कवर स्टोरी प्रकाशित की है जिसके मुताबिक 30 करोड़ से…


Story of Comprehensive Editors Zubani of Harivansh महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में 'पुरोधा संपादकों की कहानी: हरिवंश की जुबानी' कार्यक्रम में व्याख्यान देते हरिवंश। उनके दाएं हैं राजेश लेहकपुरे, प्रो. कृपाशंकर चौबे, प्रो. गिरीश्वर मिश्र, प्रो. कृष्ण कुमार सिंह और प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी।

हरिवंश बोले हमारा देश गंभीर आर्थिक परेशानियों में है आज के पत्रकार देश की आर्थिक स्थिति के बारे में सही बात लिखने से बचते हैं

वर्धा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (Mahatma Gandhi International Hindi University, Wardha) में ‘पुरोधा संपादकों की कहानी: हरिवंश की जुबानी’ कार्यक्रम 27 से 29 मार्च 2019 तक आयोजित किया गया। हरिवंश ने हिंदी विश्वविद्यालय…


debate opinion

पुण्य प्रसून प्रकरण और प्रतिष्ठित पत्रकारिता के संकट पर एक सोच

पुण्य प्रसून वाजपेयी (Punya Prasun Bajpai) ने जबसे मोदी सरकार की कमियों और घोटालों (Modi Government’s scandals and shortcomings) पर खुल कर बोलना शुरू किया है, तभी से एक पेशेवर पत्रकार (Professional journalist) के रूप में उनका जीवन अस्थिर बना…


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रामचंद्र छत्रपति : जिसको कुलदीप नैयर ने भारतीय पत्रकारिता के भीतर भगत सिंह की तरह देखा

रामचंद्र छत्रपति : जिसको कुलदीप नैयर ने भारतीय पत्रकारिता के भीतर भगत सिंह की तरह देखा पत्रकारिता के आईकॉन रामचन्द्र छत्रपति की शहादत से कब तक राष्ट्र नावाकिफ रहेगा पुष्पराज भारतीय पत्रकारिता को भारतीय लोकतंत्र…


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ऐरु-गैरु-नत्थु-खैरु रेडियो मैकेनिक आज पत्रकारिता में जमे हुए हैं – टीवी के पर्दे पर छाए हुए हैं

ऐरु-गैरु-नत्थु-खैरु रेडियो मैकेनिक आज पत्रकारिता में जमे हुए हैं – टीवी के पर्दे पर छाए हुए हैं उज्ज्वल भट्टाचार्य 32 सालों तक रेडियो पत्रकार के रूप में काम करता रहा. लेकिन कोई अगर अपना बिगड़ा…