पितृसत्ता

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पितृसत्तात्मकता का गढ़ बना बीएचयू

BHU became the bastion of patriarchy नेल्सन मंडेला ने कहा था कि ‘‘दुनिया को बदलने के लिए शिक्षा सबसे शक्तिशाली अस्त्र है’’। अगर शिक्षा दुनिया को बदलने का सबसे बड़ा हथियार है, तब, शिक्षा प्रदान…


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हिंदुत्ववादियों के प्रति न्यायपालिका का बढ़ता रुझान महिला न्याय के लिए चिंताजनक

प्रेमविहीन पितृसत्तात्मक समाज सरकार, समाज और परिवार की पितृसत्तात्मक सोच हादिया को सम्मान दे पाने में सक्षम नहीं है हिंदुत्ववादियों के प्रति न्यायपालिका का बढ़ता रुझान महिला न्याय के लिए संघर्ष करने वालों के लिए…


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दीदी जिसे अपनी ताकत मानने लगी हैं वो उनके तख्ता पलट की भारी तैयारी है

Didi, whom she has started considering as her strength, is a huge preparation for her coup. सिंगुर में दीदी के बोये सरसों के फूल खिलखिलायेंगे, लेकिन दसों दिशाओं में कमल खिलने लगे हैं! अधिग्रहित जमीन…


Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

देश और समाज निरंतर कबीलाई और हमारा आचरण मध्ययुगीन होता जा रहा है

बेशर्म इतना है सत्ता से नत्थी जनमजात मेधा वर्चस्व कि भाषा और संस्कृति में सिर्फ पितृसत्ता की गूंज और फिर वहीं धर्मोन्मादी राष्ट्रवाद दृष्टिहीन! ऐसा नहीं है कि असहिष्णुता सिर्फ सवर्णों की होती है। बाबासाहेब…


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जब तक धर्म है, तब तक स्त्री का उत्पीड़न चलता रहेगा

जब तक धर्म है, तब तक स्त्री का उत्पीड़न चलता रहेगा (As long as there is religion, the oppression of women will continue.) क्योंकि सारे पवित्र ग्रंथों में स्त्री के उत्पीड़न का न्याय है, जिसमें…


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डॉ. रामविलास शर्मा की दृष्टि में निराला के साहित्य में प्रेम और कामुकता

प्रेम और कामुकता व्यक्ति ही नहीं सामाजिक सत्य भी है. आधुनिक पश्चिमी समाजशास्त्रियों की दृष्टि में प्रेम से अलग कामुकता, कामुक-भिन्नता और काम-चेतना आधुनिक परिघटनाएं हैं लेकिन भारतीय सन्दर्भ में इनकी जड़ें काफी पुरानी हैं….