Home » Tag Archives: पितृसत्ता

Tag Archives: पितृसत्ता

पितृसत्तात्मकता का गढ़ बना बीएचयू

debate opinion

BHU became the bastion of patriarchy नेल्सन मंडेला ने कहा था कि ‘‘दुनिया को बदलने के लिए शिक्षा सबसे शक्तिशाली अस्त्र है’’। अगर शिक्षा दुनिया को बदलने का सबसे बड़ा हथियार है, तब, शिक्षा प्रदान करने वाले विश्वविद्यालय ऐसे स्थान होने चाहिए, जहां हम इस परिवर्तन की पदचाप को सुन सकें। परंतु पिछले दिनों प्रतिष्ठित बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के …

Read More »

हिंदुत्ववादियों के प्रति न्यायपालिका का बढ़ता रुझान महिला न्याय के लिए चिंताजनक

debate opinion

प्रेमविहीन पितृसत्तात्मक समाज सरकार, समाज और परिवार की पितृसत्तात्मक सोच हादिया को सम्मान दे पाने में सक्षम नहीं है हिंदुत्ववादियों के प्रति न्यायपालिका का बढ़ता रुझान महिला न्याय के लिए संघर्ष करने वालों के लिए चिंताजनक है. इसका संकेत हाल ही में सर्वोच्च न्यायलय के उस फैसले से मिला जो केरल की वयस्क महिला हादिया की अपनी मर्जी से एक …

Read More »

दीदी जिसे अपनी ताकत मानने लगी हैं वो उनके तख्ता पलट की भारी तैयारी है

news

Didi, whom she has started considering as her strength, is a huge preparation for her coup. सिंगुर में दीदी के बोये सरसों के फूल खिलखिलायेंगे, लेकिन दसों दिशाओं में कमल खिलने लगे हैं! अधिग्रहित जमीन वापस, लेकिन जमीन के मालिक दो सौ किसानों का अता पता नहीं! कोलकाता (हस्तक्षेप) .सिंगुर में दीदी के बोये सरसों के फूल खिलखिलायेंगे, लेकिन दसों …

Read More »

देश और समाज निरंतर कबीलाई और हमारा आचरण मध्ययुगीन होता जा रहा है

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

बेशर्म इतना है सत्ता से नत्थी जनमजात मेधा वर्चस्व कि भाषा और संस्कृति में सिर्फ पितृसत्ता की गूंज और फिर वहीं धर्मोन्मादी राष्ट्रवाद दृष्टिहीन! ऐसा नहीं है कि असहिष्णुता सिर्फ सवर्णों की होती है। बाबासाहेब जैसे अद्भुत विद्वान राजनेता के अनुयायी भी कम असहिष्णु नहीं पलाश विश्वास हम दीपा कर्मकार की उपलब्धियों पर लिख नहीं रहे हैं। इस बारे में …

Read More »

जब तक धर्म है, तब तक स्त्री का उत्पीड़न चलता रहेगा

opinion debate

जब तक धर्म है, तब तक स्त्री का उत्पीड़न चलता रहेगा (As long as there is religion, the oppression of women will continue.) क्योंकि सारे पवित्र ग्रंथों में स्त्री के उत्पीड़न का न्याय है, जिसमें स्त्री के लिए समानता और अधिकार कहीं नहीं है। दुस्समय में पितृसत्ता के विरुद्ध (against patriarchy), मनुस्मृति के खिलाफ स्त्री चेतना बदलाव की आहट है …

Read More »

डॉ. रामविलास शर्मा की दृष्टि में निराला के साहित्य में प्रेम और कामुकता

suryakant tripathi nirala

प्रेम और कामुकता व्यक्ति ही नहीं सामाजिक सत्य भी है. आधुनिक पश्चिमी समाजशास्त्रियों की दृष्टि में प्रेम से अलग कामुकता, कामुक-भिन्नता और काम-चेतना आधुनिक परिघटनाएं हैं लेकिन भारतीय सन्दर्भ में इनकी जड़ें काफी पुरानी हैं. भारत में कामुकता का आधार ग्रन्थ (The basis text of sexuality in India) वात्स्यायन द्वारा रचित ‘कामसूत्र’ है. सुश्रुत की ‘चरक संहिता’ में भी इसका …

Read More »