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Tag Archives: बिनायक सेन

आज सुबह की बड़ी खबरें : रामराज्य (!) में इकबाल का गीत गाने पर प्रधानाध्यापक निलंबित

Top 10 morning headlines

Live News : संसद का शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से 13 दिसंबर तक संसद का शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से 13 दिसंबर के बीच हो सकता है। अयोध्या विवाद मामले में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित (Ayodhya verdict) चालीस दिन की सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राजनीतिक रूप से अति-महत्वपूर्ण 70 वर्ष पुराने मामले में अपना फैसला सुरक्षित …

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सावरकर अपनी हिंसा और छल-कपट की नीति की होड़ दरअसल गांधी की अहिंसा और पारदर्शिता की नीति से करते थे

Veer Savarkar

दिल्ली विश्वविद्यालय (University of Delhi) : क्या थमेगा मूर्ति विवाद! अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् – Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (एबीवीपी) की 30 अगस्त 2019 की रैली में हुए भाषणों से यह स्पष्ट लगता है कि 12 सितम्बर को होने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव (Delhi University Students Union (DUSU) Election) में हाल का मूर्ति-विवाद प्रमुख मुद्दा रहेगा. चुनाव …

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आजादी के आंदोलन का धुर विरोधी रहा है आरएसएस, केंद्र सरकार का 370 पर कदम आतंकवाद को बढ़ायेगा ही : अखिलेंद्र

Akhilendra Pratap Singh अखिलेंद्र प्रताप सिंह राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य स्वराज अभियान

जम्मू कश्मीर राज्य के पुनर्गठन और उसके विशेष राज्य के दर्जे को समाप्त किए जाने के संदर्भ में दो बातें :Two things in the context of the reorganization of the state of Jammu and Kashmir and the abolition of its special state status राष्ट्रपति ने संसद द्वारा पारित जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल (J&K Reorganization Bill passed by Parliament) और उसे मिले …

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सावरकर का वो सच जो सरकार आपको नहीं बताएगी

Veer Savarkar

स्तंभकार डॉ. राम पुनियानी का आलेख “नेताजी बोस, नेहरू और उपनिवेश विरोधी संघर्ष” मूलतः 08 नवंबर 2018 को हस्तक्षेप पर प्रकाशित हुआ था। आज 28 मई को विनायक दामोदर सावरकर की जयंती (Veer Savarkar Jayanti: Facts, Quotes) पर हस्तक्षेप के पाठकों के लिए पुनर्प्रकाशन…. Netaji Bose, Nehru and anti-colonial conflict – यदि आधुनिक भारत एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक राष्ट्र है …

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हमें उन लोगों के साथ खड़े होने की जरूरत है, क्योंकि वे हमारे साथ खड़े रहते हैं

हमें उन लोगों के साथ खड़े होने की जरूरत है, क्योंकि वे हमारे साथ खड़े रहते हैं सत्येन्द्र पीएस अरुंधति राय का मैं बहुत पहले से समर्थक रहा हूं। उनका लिखा वाकिंग विद कॉमरेड्स पढ़ा था, तभी से। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इस समय वाकिंग विद कॉमरेड्स स्थापित करने की मुहिम में लगी है। समाज …

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महिला समूहों ने लगाई योगी से गुहार, एंटी रोमिओ स्क्वॉड पर लगे लगाम

उत्तर प्रदेश में बढ़ता भगवा आतंक और सरकार की विफलता अब तक पुलिस व भगवा ब्रिगेड द्वारा की गयी ज्यादतियों पर तुरंत कानूनी कार्यवाही हो नई दिल्ली, 12 अप्रैल : देश के प्रसिद्ध महिला समूहों ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते भगवा आतंक और सरकार की विफलता पर चिंता जताते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगादित्यनाथ से तुरंत एंटी रोमिओ स्क्वॉड …

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सत्ता, बाजार, सियासत और बिजनेस से इस मौत के मंजर को बदलने में कोई मदद मिलने वाली नहीं

  पलाश विश्वास मौत सिरहाने इंतजार कर रही हो और मौत का यह मंजर सार्वजनिक हो, तो जिंदगी दर्द का सबब बन जाता है, जिससे रिहाई मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। पूरे रामराज्य में सरकारी गैरसरकारी में यह मौत का मंजर बागों में बहार है और ख्वाबों के रंग बिरंगे सुनहले दिन हैं। ममता बनर्जी का निजी अस्पतालों और नर्सिंग …

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शंकर गुहा नियोगी : नई आर्थिक नीति के पहले शहीद

  पुण्यव्रत गुण अनुवाद: पलाश विश्वास दल्ली राजहरा जनस्वास्थ्य आंदोलन और शहीद अस्पताल अपने परिवार में कई पीढ़ियों के छह छह कमाऊ डॉक्टरों को देखकर डॉक्टर बनने का ख्वाब देखना शुरू किया था…। मेडिकल कालेज में दाखिले के बाद मेडिकलकालेज स्टुडेंट्स एसोसिएशन ने नये सिरे से सपना देखना सिखाने लगा — डॉ. नर्मन बेथून,  डॉ. द्वारका नाथ कोटनीस जैसे डॉक्टर …

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हिटलर और मुसोलिनी के अनुयायी अपने फासिस्ट और आक्रामक रूप को दिखाने को बेचैन

मनुष्यों के जीवन की लड़ाई अगर जारी है तो वे भविष्य का कोई न कोई रास्ता तैयार करेंगे ही हिटलर और मुसोलिनी के आदर्शों पर तैयार हुए संगठन अपने मूल फासिस्ट और आक्रामक रूप को दिखाने के बेचैन हो रहे हैं अरुण माहेश्वरी मार्क्सवादी आलोचक, चिंतक और विचारक हैं। लंबे समय से वामपंथी आन्दोलन से जुड़े रहे और आज भी …

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छत्तीसगढ़ में आदिवासियों पर राजकीय दमन- चुप क्यों हैं महामहिम?

सुनील कुमार भारत अपने को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहता है और इसी वर्ष भारत ने अपना 67 वां गणतंत्र दिवस मनाया। लोकतंत्र-गणतंत्र पर नेता, मंत्री, अधिकारी बहुत बड़ी-बड़ी बातें करते हैं; जो सुनने में बहुत अच्छी लगती हैं और हमें गर्व महसूस होता है कि हम लोकतांत्रिक देश में जी रहे हैं। यह गर्व और खुशफहमी तभी तक …

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