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Tag Archives: ब्राह्मणवाद

सावरकर के लिए भारत रत्न की वकालत ! आरएसएस/भाजपा ने अपनी राष्ट्र-विरोधी विरासत की ही पुष्टि की

Savarkar apologized to the British rulers six times

अँगरेज़ शासकों से सावरकर ने छह बार क्षमा माँगी Savarkar apologized to the British rulers six times आरएसएस के राजनैतिक जेबी संगठन भाजपा ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (अक्तूबर 21, 2019 को मतदान) में जारी अपने संकल्प पत्र में हिंदुत्व विचारधारा के जनक, वीर सावरकर को भारत रत्न दिलाने का वादा किया है। उनके साथ दलित आंदोलन के मूल दिग्गज सिद्धांतकारों …

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छलावा है आरएसएस का महिला सशक्तिकरण, क्या संघ का चरित्र और प्रकृति बदल रही है?

आरएसएस के मुखिया मोहन भागवत (RSS chief Mohan Bhagwat) ने हाल में विदेशी समाचारपत्रों और मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ एक प्रेस वार्ता में कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 (Article 370) के हटाये जाने, असम में एनआरसी (NRC in Assam), नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) और राममंदिर सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की. भागवत ने इन मुद्दों पर …

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देशद्रोह : मोदी को पत्र लिखने से रोकने के लिए हिंदी विवि ने बिछाया जाल, तो बोले छात्र हम डरेंगे नहीं,लड़ेंगे!

Narendra Modi An important message to the nation

छात्रों ने हिंदी विश्वविद्यालय प्रशासन के तुगलकी फरमान को चुनौती देते हुए कहा कि इससे हम डरेंगे नहीं,लड़ेंगे! वर्धा, 8 अक्तूबर 2019. महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय (Mahatma Gandhi International Hindi University) के छात्र-छात्राओं ने एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखने का सोशल मीडिया पर ऐलान किया था। इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने फरमान जारी कर किसी …

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‘मैं एक कारसेवक था’ : आत्मकथा के बहाने मानवता की जरूरी लड़ाई की किताब !!

Main Ek Karsewak Tha book by Bhanwar Meghwanshi

“मेरी कहानियां, मेरे परिवार की कहानियां – वे भारत में कहानियां थी ही नहीं. वो तो ज़िंदगी थी.जब नए मुल्क में मेरे नए दोस्त बने, तब ही यह हुआ कि मेरे परिवार के साथ जो हुआ, जो हमने किया, वो कहानियां बनीं. कहानियां जो लिखी जा सकें, कहानियां जो सुनाई जा सकें.” – सुजाता गिडला ( भारतवंशी अमरीकी दलित लेखक, …

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एक पूर्व संघ-कार्यकर्ता कारसेवक की आपबीती है मैं एक कारसेवक था

Main Ek Karsewak Tha book by Bhanwar Meghwanshi

मैं एक कारसेवक था यह किताब उन सब को पढ़नी चाहिए, जो संघ को भीतर से समझना चाहते हैं। ख़ासतौर पर संघ के कार्यकर्ताओं को !

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स्वतंत्रता दिवस के कर्तव्य : आत्मालोचन का दिन

happy Independence Day

स्वदेशी का राग अलापने वाला आरएसएस पूंजीवाद का सबसे बड़ा बीमार है (डॉ. प्रेम सिंह का यह लेख (Dr. Prem Singh’s article on Independence Day in Hindi) साल 2013 के स्वतंत्रता दिवस पर छपा था। आपके पढ़ने के लिए इसे साल 2019 के स्वतंत्रता दिवस (2019 independence day) पर फिर जारी किया गया है।) पिछले स्वतंत्रता दिवस के ‘समय संवाद’ …

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अरुंधति रॉय और डॉ. राम विलास शर्मा की आँखों से गांधी और अंबेडकर देखना

अरुंधति रॉय की किताब 'एक था डॉक्टर और एक था संत', (Arundhati Roy's book Ek Tha Doctor Ek Tha Sant)

विमर्शमूलक विखंडन और कोरी उकसावेबाजी में विभाजन की रेखा बहुत महीन होती है अरुंधति रॉय की किताब ‘एक था डॉक्टर और एक था संत‘, (Arundhati Roy’s book Ek Tha Doctor Ek Tha Sant) की समीक्षा अरुंधति रॉय की किताब ‘एक था डॉक्टर और एक था संत‘, (Arundhati Roy’s book Ek Tha Doctor Ek Tha Sant,) लगभग एक सांस में ही …

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अपने युग की जन-विरोधी सामाजिक विसंगतियों पर जोरदार प्रहार किया कबीर ने

Kabir कबीर

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, समाज में अपने जीवन का अस्तित्व बनाए रखने के लिए उसे संघर्ष करना पड़ता है। यह संघर्ष उसे मानव से भी करना पड़ता है और प्रकृति से भी। फल-स्वरूप उसे नाना प्रकार के अनुभव होते हैं। हम जिस समाज में रहते हैं, सांस लेते हैं, जिस परिवेश को जीते हैं, उससे अनभिज्ञ कैसे रह सकते …

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अपना रामराज बौद्ध हो गया और राजनीतिक भी, इसलिए हमें उससे परहेज करना चाहिए? ये सवाल खुद से हैं और आपसे भी!

Dr. Udit Raj

लू (hot wind) और काल बैसाखी (Kal Baisakhi) के मध्य तैंतीस साल बाद एक मुलाकात! दलित मूलनिवासी आंदोलन (Dalit Mulniwasi Movement) को छोटी-छोटी मामूली सामाजिक घटनाओं से कुछ सबक लेना चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार और हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार पलाश विश्वास (Palash Biswas) का यह आलेख मूलतः May 21, 2012 को प्रकाशित हुआ था। आलेख आज भी प्रासंगिक है। हस्तक्षेप के …

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भारतीय संस्कृति के नाम पर मनाए जाने वाले हिंसक ब्राह्मणवाद से संबंद्ध सभी त्योहारों का हो आमूल नाश

book review

बहुजन परंपराओं को समझने के लिए मैंने पिछले दो वर्षों में अपने साथियों के साथ देश के कई हिस्सों की यात्राएं कीं। इस दौरान छोटानागपुर, बुंदेलखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में महिषासुर से संबंधित अनेक स्थलों व परंपराओं को देखने का अवसर मिला। उसके कुछ अंशों को मैंने, नवल किशोर कुमार तथा अनिल वर्गीज ने इस किताब में रखा है। …

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भारत बंद : क्या दलित सच में एकता की तरफ बढ़ रहे हैं ? क्या ब्राह्मणों को गाली दे कर ब्राह्मणवाद हार जाएगा?

ब्राह्मणवाद का खात्मा, लूट तंत्र का खात्मा है 2 अप्रैल भारत बंद – एक मूल्यांकन उदय चे     2 अप्रैल को हुआ “भारत बंद” जिसमें दलित-आदिवासी एकता मजबूत नजर आयी। बहुमत आदिवासी और दलित जातियां इस बन्द में शामिल रही। इसके साथ ही देश के प्रगतिशील, बुद्विजीवी, लेखक, रंगकर्मी, कम्युनिस्ट पार्टियां बन्द के समर्थन में मजबूती से शामिल हुए। आदिवासी …

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ब्राह्मणवाद का क्या अर्थ है ? ब्राह्मणवाद यानि जाति प्रथा !

Himanshu Kumar

ब्राह्मणवाद के नाश का अर्थ है जाति को जन्म से जोड़ने वाले धर्म का नाश। हिमांशु कुमार एक भाई ने मुझसे पूछा है ” ब्राह्मणवाद का क्या अर्थ है ? मैं भी ब्राहमण हूँ इसलिये जानना चाहता हूँ ? ” उस भाई की जिज्ञासा के प्रश्न का उत्तर अपनी समझ से देने की कोशिश कर रहा हूँ। भारत का समाज …

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ब्राह्मणवादी-सामंती-सांप्रदायिक हमले व दमन के खिलाफ दो दर्जन संगठन एक मंच पर

ब्राह्मणवादी-सामंती-सांप्रदायिक हमले व दमन के खिलाफ दो दर्जन संगठन एक मंच पर पटना। अल्पसख्यकों-वंचित समूहों पर बढ़ते ब्राह्मणवादी-सामंती-सांप्रदायिक हमले व दमन के खिलाफ न्याय, धर्मनिरपेक्षता व लोकतंत्र के लिए संघर्ष को तेज करने व मजबूत बनाने के लिए बिहार के दो दर्जन के लगभग सामाजिक संगठनों व न्याय पसंद नागरिकों की साझा बैठक कल आयोजित हो रही है. बैठक में …

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भीम आर्मी का शानदार प्रोटेस्‍ट इस सरकार, ब्राह्मणवाद या हिंदुत्‍व के लिए ही नहीं, बल्कि यथास्थिति के लिए भी ख़तरा है

अभिषेक श्रीवास्तव राजनीति में मुखौटा बड़ी चीज़ है। उसके पीछे छुपे चेहरे से भी अहम। आज से पचीस साल पहले एक मुखौटा उभरा था जिसे मंडल कहा गया। आज से पंद्रह साल पहले एक मुखौटे ने राजधर्म की बात की। आज से पांच साल पहले एक मुखौटे ने ईमानदारी की बात की। यह भी पढ़ें –भीम आर्मी के समर्थन में …

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न्याय मंच ने मनुस्मृति समान “ब्राह्मणवादी अखबारों” का दहन कर बाबा साहब की जयन्ती मनाई

लखनऊ 14 अप्रैल 2017। न्याय मंच ने आज बशीरत गंज नाका हिन्डोला,  लखनऊ में साम्प्रदायिक, गरीब,  दलित, मजदूर विरोधी अखबारो का किया दहन। भानिमयू के नेता व न्याय मंच उ.प्र. के अध्यक्ष अमित अम्बेडकर ने एक विज्ञप्ति में कहा कि आज का मीडिया पूरी तरह से बिक चुका है। आज का मीडिया भाजपा का घोषणा पत्र बन कर रह गया …

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