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Tag Archives: भगत सिंह

आज सुबह की बड़ी खबरें : दिल्ली में जंगलराज, लुटेरों ने महिला जज को लूटा, पर देश सुरक्षित हाथों में है !

Morning Headlines | आज सुबह की बड़ी ख़बरें

नई दिल्ली, 28 सितंबर 2019. विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आज सुबह की दस बड़ी ख़बरें निम्न हैं, जिन पर कल 27 सितंबर 2019 को देश -दुनिया का ध्यान रहा भारत ने दुनिया को युद्ध नहीं, शांति का संदेश दिया : मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद …

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भगत सिंह ने जवाहरलाल नेहरू को अपना नेता क्यों माना? सुभाषचंद्र बोस ने महात्मा गांधी को ”राष्ट्रपिता” का संबोधन क्यों दिया?

happy Independence Day

स्वाधीनता और जनतंत्र का रिश्ता Relation of freedom and democracy आज हम आज़ादी के बहत्तर साल पूरे कर स्वाधीन मुल्क के तिहत्तरवें वर्ष में पहला कदम रख रहे हैं। इस मुबारक मौके पर एक पल रुककर हमें खुद से पूछना चाहिए कि देश की स्वतंत्रता हासिल करना हमारा अंतिम लक्ष्य था या किसी वृहत्तर लक्ष्य की पूर्ति के लिए एक अनिवार्य …

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भगतसिंह का लेख – लाला लाजपत राय और नौजवान

Shaheed E Azam Bhagat Singh

लाला लाजपत राय और नौजवान : लाला जी कहते हैं कि हमारे साम्यवादी विचारों के प्रचार से पूँजीपति सरकार के साथ मिल जायेंगे। बहुत ख़ूब! वे पहले ही किधर हैं? कितने पूँजीपति युग परिवर्तनकारी बने हैं? ...

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रामचंद्र छत्रपति : जिसको कुलदीप नैयर ने भारतीय पत्रकारिता के भीतर भगत सिंह की तरह देखा

National News

रामचंद्र छत्रपति : जिसको कुलदीप नैयर ने भारतीय पत्रकारिता के भीतर भगत सिंह की तरह देखा पत्रकारिता के आईकॉन रामचन्द्र छत्रपति की शहादत से कब तक राष्ट्र नावाकिफ रहेगा पुष्पराज भारतीय पत्रकारिता को भारतीय लोकतंत्र और भारत के लोक की रक्षा करनी है तो इस पत्रकारिता को अपने आईकॉन चुनने होंगे। भगत सिंह के लेख छापने वाले प्रताप के संपादक …

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नेहरू जेल में भगत सिंह से मिले थे या नहीं, इससे आपको क्या लेना-देना मि. मोदी ?

Ram Puniyani राम पुनियानी, लेखक आई.आई.टी. मुंबई में पढ़ाते थे और सन् 2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं।)

हाल में संपन्न कर्नाटक विधानसभा चुनाव (Karnataka Assembly Elections) के प्रचार के दौरान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई ऐसे वक्तव्य दिए, जो न केवल असत्य थे, बल्कि जिनका एकमात्र उद्देश्य उनके विरोधियों के विरुद्ध जनभावनाएं भड़काना था। कर्नाटक के बीदर में एक आमसभा को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने एक सफ़ेद झूठ बोला। उन्होंने कहा, “जब शहीद भगत सिंह, …

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यही कुंठा सावरकर के आगे वीर लगाकर भगत सिंह के समकक्ष खड़ा करने की कोशिश करती है

Veer Savarkar

यही कुंठा किसी मुगलसराय को बदल कर दीनदयाल कर देती है और किसी सावरकर के आगे वीर लगाकर भगत सिंह के समकक्ष खड़ा करने की कोशिश करती है. राजीव यादव हैं दोनों चश्मे की दुकानें और दोनों आस-पास पर एक मियां बाजार और दूसरी माया बाजार में. ये चश्मे के नंबर का दोष नहीं बल्कि राजनीतिक दोष है. इसलिए चश्मे …

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भगत सिंह और सावरकर एक साथ : फासीवादी गन्दी चाल!

Shaheed E Azam Bhagat Singh

भगत सिंह (Shaheed E Azam Bhagat Singh) एक विचारक थे, जिनका आधार मार्क्सवाद था. लेनिन की क्रांति को सही मानते थे, और साथ देने की बात करते थे! उनकी अंतिम इक्छा लेनिन से मिलने की थी! हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन, जिसके कमांडर चन्द्र शेखर आजाद थे, की संरचना एक मजदूर वर्ग के राज्य की स्थापना थी, जिसका खात्मा काँग्रेस और …

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भगत सिंह हैं आज की जरूरत : भगत सिंह का देश ऐसे नहीं बनता

Shaheed E Azam Bhagat Singh

आज भगत सिंह का शहादत दिवस पर विशेष Special on Bhagat Singh’s martyrdom day –सुसंस्कृति परिहार भगत सिंह समाजवादी व्यवस्था के ध्येय को स्वीकार कर चुके थे। वे मनुष्य द्वारा मनुष्य और राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र के शोषण से मुक्तविहीन समाज के पक्षधर थे। वे साम्राज्यवादी व्यवस्था के खिलाफ थे। आज साम्राज्यवादी ताकतों के साथ पूंजीवाद ने बाजार के माध्यम …

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क्रान्ति ईश्वर-विरोधी हो सकती है लेकिन मनुष्य-विरोधी नहीं- शहीद-ए-आज़म भगत सिंह

Shaheed E Azam Bhagat Singh

शहीद-ए-आज़म भगत सिंह और इंक़लाब उदय चे 23 मार्च 1931 भारत की क्रांति के  इतिहास का वो ऐतिहासिक दिन है जिस दिन इंग्लैंड की साम्राज्यवादी सरकार ने साम्राज्यवादी इंग्लैंड के खिलाफ भारत ही नहीं पूरे विश्व की मेहनतकश जनता द्वारा छेड़े गये युद्ध के महान योद्धाओं भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को युद्ध छेड़ने का आरोपी मानते हुए इन 23 …

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वैकल्पिक राजनीति के गुनाहगार- “आप” के पाप

Anna Hazare Arvind Kejriwal

आम आदमी पार्टी (आप) को वैकल्पिक राजनीति की वाहक बताने वालों का दावा शुरू से ही खोखला है। वह हास्यास्पद भी है - क्योंकि ‘आप’ सीधे नवउदारवाद की कोख से पैदा होने वाली पार्टी है। इस पार्टी में सस्ते सत्ता-स्वार्थ की खींचतान के चलते कुछ लोग फिर से वैकल्पिक राजनीति का वास्ता दे रहे हैं। यह पहले से चल रही लबारपंती का एक और विस्तार है।

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