लोहिया

अरुंधति रॉय की किताब 'एक था डॉक्टर और एक था संत', (Arundhati Roy's book Ek Tha Doctor Ek Tha Sant)

अरुंधति रॉय और डॉ. राम विलास शर्मा की आँखों से गांधी और अंबेडकर देखना

विमर्शमूलक विखंडन और कोरी उकसावेबाजी में विभाजन की रेखा बहुत महीन होती है अरुंधति रॉय की किताब ‘एक था डॉक्टर और एक था संत‘, (Arundhati Roy’s book Ek Tha Doctor Ek Tha Sant) की समीक्षा…


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निराशा के कर्तव्य : लोहिया के इस भाषण को बार-बार पढ़ने की दरकार है

23 जून 1962 को डॉ लोहिया ने नैनीताल में एक ऐतिहासिक भाषण दिया था। ये पूरा भाषण (Speech of Dr. Lohia Nainital on 23 June 1962) ‘राममनोहर लोहिया समता न्यास हैदराबाद’ ने ‘निराशा के कर्तव्य’…


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डॉ. लोहिया की पुण्य तिथि पर एकजुट हुए समाजवादी व वांमपंथी

Socialist and Leftist united on the death anniversary of DR. Lohia सिंगरौली। बैढन स्थित किसान आदिवासी विस्थापित एकता मंच के कार्यालय पर डॉ. लोहिया की 47 वीं पुण्य तिथि पर रविवार शाम को 4 बजे…


opinion debate

क्या सचमुच पूँजीवाद के विरोधी थे लोहिया?

लोहिया, आंबेडकर और गाँधी (भाग-2) | Lohia, Ambedkar and Gandhi लोहिया न जाति से ऊपर उठे थे और न धर्म से (यह आलेख रोशन प्रेमयोगी के उपन्यास ‘आजादी: टूटी फूटी’ की समीक्षा नहीं हैं, पर…


debate, thought, analysis,

थैंक यू मोदीजी, इस बार तो बच गए डॉ. लोहिया!

हर साल 26 जनवरी January 26 आती है. हर बार पद्म पुरस्कार Padma awards व भारत रत्न Bharat Ratna को लेकर तरह-तरह की चर्चा होती है. लोग शिकायत करते पाए जाते हैं कि इस शख्स…


debate, thought, analysis,

आज लोहिया होते तो गैर भाजपावाद का आह्वान करते

अगर आज लोहिया होते तो… ‘जिंदा कौमें पांच साल इंतजार नहीं करतीं.’ गैर-कांग्रेसवाद के जनक और समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया का यह कथन आज की सरकारों के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है…


Anna Hazare Arvind Kejriwal

वैकल्पिक राजनीति के गुनाहगार- “आप” के पाप

वैकल्पिक राजनीति के गुनाहगार- “आप” के पाप सेकुलर लोकतंत्र की प्रतिष्ठा वैकल्पिक राजनीति का अहम आयाम है वैकल्पिक राजनीति और विदेशी फंडिंग पर पलने वाले एनजीओ का साझा मंच कभी नहीं बन सकता वैश्वीकरण-उदारीकरण-निजीकरण के…


opinion, debate

जाति और धर्म की राजनीति विरासत में मिली है लोहिया के उत्तराधिकारियों को

लोहिया, आंबेडकर और गाँधी (भाग-3) (यह आलेख रोशन प्रेमयोगी के उपन्यास ‘आजादी : टूटी फूटी’ की समीक्षा नहीं हैं, पर उसके बहाने लोहिया के समाजवाद की आलोचना है।)  उपन्यास में जो लोहिया आंबेडकर-गाँधी विवाद को…