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वीरेन डंगवाल News in Hindi | वीरेन डंगवाल का काव्य-शिल्प |Viren Dangwal (वीरेन डंगवाल)

Viren dangwal in hindi | Remembering Viren Dangwal The Poet Of Life.

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वीरेन डंगवाल (५ अगस्त १९४७ – २८ सितंबर २०१५) साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी कवि थे। उनका जन्म कीर्तिनगर, टेहरी गढ़वाल, उत्तराखंड में हुआ। वीरेन डंगवाल,Viren Dangwal,

संघ परिवार को बंगाल की चुनौती : हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्रवाद के कट्टर विरोधी रवींद्र नाथ को निषिद्ध करके दिखाये

पलाश विश्वास संदर्भः आज रवींद्र नाथ को प्रतिबंधित करने की चुनौती देता हुआ बांग्ला दैनिक आनंद बाजार पत्रिका में प्रकाशित सेमंती घोष का अत्यंत प्रासंगिक आलेख, जिसके मुताबिक रवींद्र नाथ का व्यक्तित्व कृतित्व संघ परिवार और उसके हिंदू राष्ट्रवाद के लिए सबसे बड़ा खतरा है।  उनके मुताबिक रवींद्रनाथ का लिखा,  कहा हर शब्द विशुद्धता के नस्ली ब्राह्मणावादी हिंदू राष्ट्रवाद के …

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जनांदोलनों की मां और हजार चौरासवीं की मां महाश्वेता दी हमारे लिए जनप्रतिबद्धता का मोर्चा छोड़ गयीं

जंगल के दावेदार महाश्वेता देवी, महाअरण्य की मां, जनांदोलनों की मां और हजार चौरासवीं की मां महाश्वेता दी हमारे लिए जनप्रतिबद्धता का मोर्चा छोड़ गयीं  🙁  उन्होंने ही भारतभर के संस्कृतिकर्मियों को आदिवासी किसानों के हकूक की विरासत और जल जंगल जमीन से जोड़ा पलाश विश्वास जंगल के दावेदार महाश्वेता देवी, महाअरण्य की मां, जनांदोलनों की मां और हजार चौरासवीं …

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कवि और पत्रकार नीलाभ अश्क नहीं रहे

माध्यमों की समग्र सोच और समझ वाले नीलाभ का जाना निजी और सामाजिक अपूरणीय क्षति है। पलाश विश्वास मशहूर कवि और वरिष्ठ पत्रकार नीलाभ अश्क का 70 साल की उम्र में निधन हो गया है। नीलाभ अश्क प्रसिद्ध लेखक उपेंद्र नाथ अश्क के पुत्र थे। वे दिवंगत कवि वीरेन डंगवाल के गहरे मित्र थे और कवि मंगलेश डबराल के भी। …

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नीलाभ दमदार और बहु-आयामी व्यक्तित्व रखते थे

नीलाभ जी दमदार और बहु-आयामी व्यक्तित्व रखते थे. कोई उन्हें प्यार कर सकता था या उनसे नाराज़ हो सकता था, लेकिन उनकी अवहेलना नहीं कर सकता था. नीलाभ अश्क को जसम की श्रद्धांजलि नई दिल्ली। “16 अगस्त 1945 को मुंबई, महाराष्ट्र में जन्मे और इलाहाबाद में पले-बढ़े नीलाभ जी का जाना एक बड़ा खालीपन छोड़ गया है. कवि, पत्रकार, नाटककार, …

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वीरेन डंगवाल को अलविदा नहीं कह पायेंगे।

लखनऊ। २८ सितंबर २०१५ को हिंदी के सुविख्यात कवि वीरेन डंगवाल का कैंसर से लड़ते हुए निधन हो गया था। उनकी याद में दिनांक ०३ अक्टूबर को लखनऊ के इप्टा ऑफिस में स्मृति सभा आयोजित हुई। सभा की अध्यक्षता सुविख्यात कवि नरेश सक्सेना ने की। सभा का संचालन करते हुए कवि चंद्रेश्वर पांडे ने वीरेन जी को समकालीन कविता का …

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शहर को बड़ा बनाती है वीरेन डंगवाल की कविता

स्मृति: वीरेन डंगवाल एक कवि के सही बने रहने की कवायद सुधीर विद्यार्थी अपनी लंबी तकलीफ भरी कैंसर जैसी बीमारी को झेलते हुए वीरेन डंगवाल जब जिंदगी की उम्मीद के साथ ’ग्रीष्म की तेजस्विता और गुठली जैसा छिपा शरद का ऊष्म ताप’ अपनी कमजोर आंखों में छिपाये दिल्ली से अपने शहर बरेली लौटे तब हम काफी आष्वस्त थे। तुर्कू (फिनलैंड) …

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न कवि की मौत होती है और न कविता की

वीरेनदा आपको अपने बीच खड़े मिलेंगे उसी खिलंदड़ बेपरवाह अंदाज में हमेशा हमेशा सक्रिय! वीरेनदा के जनपद और उनकी कविता को समझने के लिए पहले जानें सुधीर विद्यार्थी को, फिर जरुर पढ़ें उनका संस्मरण वीरेनदा की कविताओं पर केंद्रित! पलाश विश्वास जनपद के कवि वीरेनदा, हमारे वीरेन दा कैंसर को हराकर चले गये! लड़ाई जारी है इंसानियत के हक में …

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दादरी के दोषी हिंदुत्ववादी हत्यारों को बचा रही है सपा सरकार- मो0 शुऐब

मुसलमानों की सुरक्षा की गारंटी करने में फेल हो चुका तंत्र मुसलमानों को आत्मरक्षा के लिए मुहैया कराए हथियार- राजीव यादव दलित ऐक्ट की तरह मुसलमानों से भेद-भाव रोकने के लिए बनाया जाए माइनॉरिटी ऐक्ट कानपुर में मुस्लिम व्यक्ति को पाकिस्तानी बताकर मार डालना मीडिया, सरकार, राजनीतिक दलों और प्रशासन द्वारा पोषित मुस्लिम फोबिया का नतीजा दिवंगत कवि वीरेन डंगवाल …

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वीरेनदा का ठीक होना इस कविता के ठीक होने की ज़रूरी शर्त है

वीरेनदा का जाना और एक अमानवीय कविता की मुक्ति एक कवि और कर भी क्‍या सकता है / सही बने रहने की कोशिश के सिवा अभिषेक श्रीवास्‍तव वीरेन डंगवाल यानी हमारी पीढ़ी में सबके लिए वीरेनदा नहीं रहे। आज सुबह वे बरेली में गुज़र गए। अभी हाल में उनके ऊपर जन संस्‍कृति मंच ने दिल्‍ली के गांधी शांति प्रतिष्‍ठान में …

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बहुत खतरनाक है कि कश्मीर फिर जल रहा है। पूरा देश मुकम्मल गुजरात है।

उससे भी खतरनाक है कि हिंदू राष्ट्र का मिशन जलवा शबाब है और इंसानियत शिक कबाब है। अब पूरा देश मुकम्मल गुजरात है। अनंत मीडिया मधुचक्र को आखिर उत्सवों और कार्निवाल से ऐतराज क्यों हो? बेहद खतरनाक दौर है कि विदेशी पूंजी और विदेशी हितों की सुनहरी कोख से निकलकर मीडिया अब सत्तावर्ग में शामिल है। कश्मीर में गोवध निषेध …

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वीरेनदा की कविताएं अँधेरे के खिलाफ उजाले की आकांक्षा की अभिव्यक्ति हैं

आयेंगे उजले दिन जरूर … कविता आवृत्ति और परिचर्चा सम्पन्न – नई दिल्ली। जन संस्कृति मंच की ओर से बीती 4 सितंबर को दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि वीरेन डंगवाल की कविता आवृत्ति और कविता पर परिचर्चा में कार्यक्रम की शुरुवात करते हुए इरफ़ान ने वीरेन दा की कविता सड़क का पाठ किया। …

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हम खेत सींचेंगे अपनों के खून से। अपनी अपनी शहादत से सीचेंगे खेत हम तमाम। खेत फिर जागेंगे।

हम खेत सींचेंगे अपनों के खून से। अपनी अपनी शहादत से सीचेंगे खेत हम तमाम। खेत फिर जागेंगे। तन कर खड़ा होकर बता दो कि मुहब्बत क्या चीज है! पलाश विश्वास ‘ आएंगे उजले दिन जरूर ..’ कवि वीरेन डंगवाल की कविता पर बातचीत और उनकी कविताओं की आवृत्ति के आनंद के लिए, 4 सितम्बर की शाम को आई टी …

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हिंदू राष्ट्र के फर्जी लोकतंत्र के किस्से में आपातकाल का मतलब क्या है?

अब मत चूको चौहान कि दूध का दूध और पानी का पानी साफ साफ है! पलाश विश्वास बंगाल की भुखमरी जारी है। लोक में कहे बिना बात कोई जमती नहीं है। वैसे भी तंत्र मंत्र यंत्र के तिलिस्म में दिमाग का दही है। हम पहले ही लिख चुके हैं कि अनाड़ी हलवाहा तो जमीन की फजीहत। कृपया इसे स्त्रीविरोधी मंतव्य …

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कॉरपोरेट हमले और सांप्रदायिक फासीवाद के खिलाफ एकजुट हुए लेखक, संस्‍कृतिकर्मी और पत्रकार

कॉरपोरेट हमले और सांप्रदायिक फासीवाद के खिलाफ एकजुट हुए लेखक, संस्‍कृतिकर्मी और पत्रकार  नई दिल्‍ली। नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में पिछले साल केंद्र की सत्‍ता में आयी एनडीए सरकार को साल भर पूरा होते-होते साहित्यिक-सांस्‍कृतिक क्षेत्र भी अब उसके विरोध में एकजुट होने लगा है। बीते रविवार इसकी एक ऐतिहासिक बानगी दिल्‍ली में देखने को मिली जब दस हिंदीभाषी राज्‍यों से …

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हमारी जीवन शैली की देन है जैज़

चट्टानी जीवन का संगीत जैज़ पर एक लम्बे आलेख की चौथी कड़ी …जैज़ हमारी जीवन शैली की देन है और चूंकि वह हमारा राष्ट्रीय कला-रूप है, वह हमे यह जानने में मदद करता है कि हम कौन हैं क्या हैं. –विण्टन मार्सेलिस जैज़ की शुरुआत गायकी से हुई है। उसके स्रोत उस नीग्रो लोक गायकी में डूबे हुए हैं, जो …

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