Deendayal Upadhyaya

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आंकड़ें बताते हैं, देश में मोदी लहर नहीं, 2019 में योगी मोदी की लाचारी हैं

  2019 में योगी के कंधों पर मोदी लहर अनुराग मोदी  पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद चारों तरफ मोदी लहर का डंका बजा रहा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आमित शाह ने चुनाव नतीजों…


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गाँधी, संघ और भारतीय समाज

गाँधी, संघ और भारतीय समाज ‘गाँधी हत्या के लिए संघ ज़िम्मेदार है या नहीं ‘, इस विवाद में उलझे बगैर गाँधी और संघ के बीच के पेचीदा रिश्ते के ताने बाने सुलझाने की कोशिश रविन्द्र…


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अफसरों को जरखरीद गुलाम समझती है भाजपा सरकारें

अफसरों को जरखरीद गुलाम समझती है भाजपा सरकारें विचारों की अभिव्यक्ति पर रोक मनोज कुमार झा मोदी सरकार इस वर्ष करोड़ों रुपए खर्च कर जनसंघ के नेता रहे दीनदयाल उपाध्याय का जन्म शताब्दी वर्ष मना…


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उलटबांसी करने में माहिर भाजपा और संघ परिवार

जिस तेज़ी से आरएसएस, भाजपा और संघ परिवार ने अपने स्वदेशी आंदोलन से पल्ला झाड़ा है, वह सचमुच चकित कर देने वाला है। संघ परिवार: बदलाव और निरंतरता -इरफान इंजीनियर हमारे प्रधानमंत्री पूरी दुनिया में…


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‘ललितगेट’ भुलाने को ‘भकुए’ को डिजिटल ज्ञान का भौकाल!

शनिवार को हिंदी दैनिक देशबंधु में वरिष्ठ पत्रकार पुष्परंजन का एक विचारोत्तेजक आलेख प्रकाशित हुआ है। हस्तक्षेप के पाठकों के लिए देशबंधु से साभार ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि एक परियोजना की शुरुआत के लिए…


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आपातकाल की आहट?

आपातकाल की आहट? साथियो, इतिहास खुद को दोहराता नहीं, सिर्फ उसकी प्रतिध्वनि सुनाई देती है। और 40 साल पहले लगाए गए आपातकाल की मौजूदा प्रतिध्वनि वाकई भयावह है। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों से पैदा उथलपुथल और…


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‘ समाजवाद लोहिया और धर्मनिरपेक्षता ’ का लोकार्पण

अरुण कुमार त्रिपाठी की पुस्तक ‘समाजवाद लोहिया और धर्मनिरपेक्षता’ (अनामिका प्रकाशन) का लोकार्पण मुख्य अतिथि: जस्टिस राजेंद्र सच्चर, कुलदीप नैयर अध्यक्षता: अनिल नौरिया मुख्य वक्ता: राजकिशोर कमर वहीद नकवी विनोद अग्निहोत्री प्रेम सिंह संचालन: अश्वनी…


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अभिव्यक्ति का धर्म और जाति

यूरोप ने पहले विचारधारा से धर्म को नष्ट करने की कोशिश की और बाद में धर्म से विचारधारा को नष्ट कर दिया अभिव्यक्ति की आजादी के आगे धर्म की बंदूकें और जाति की तलवारें तन…


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देशभक्तिपूर्ण नहीं है पटेल बनाम पं. नेहरू का तुलनात्मक विमर्श

श्रीराम तिवारी  नदियों-झरनों का कल-कल संगीत, पंछिओं -पखेरुओं का कलरव गान, प्राकृतिक सौंदर्य बोध का रसास्वादन करने के लिए न केवल ज्ञानेन्द्रियों की बल्कि ह्दय की सुग्राह्यता भी अत्यंत आवश्यक है। शास्त्रीय संगीत का आनन्द…


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गंगा को प्रतीक नहीं, परिणाम का इंतजार

ऐसे तो वाकई 200 साल में साफ नहीं होगी गंगा नीतिगत निर्णय का जज्बा कब दिखाओगे, गंगापुत्र ? अरुण तिवारी मैं आया नहीं हूं; मुझे गंगा मां ने बुलाया है, नमामि गंगे व नीली क्रांति…