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Tag Archives: secularism in Iqbal’s poetry

इक़बाल की शायरी में धर्मनिरपेक्षता और साम्प्रदायिकता के गहरे अंतर्विरोध

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अल्लामा इक़बाल की शायरी में धर्मनिरपेक्षता और साम्प्रदायिकता के गहरे अंतर्विरोध The deep contradiction of secularism and communalism in the poetry of Allama Iqbal अल्लामा इक़बाल (Allama Iqbal) उर्दू के प्रमुख शायरों में से एक हैं। उनकी शायरी में धर्मनिरपेक्षता और साम्प्रदायिकता के गहरे अंतर्विरोध मिलते हैं। ये अंतर्विरोध इस बात का संकेत है कि एक लेखक के अंदर में वैचारिक …

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