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Tag Archives: Theodor Adorno

आउषवित्ज़ से दादरी तक : क्या बुद्धिजीवियों को चुन-चुनकर मार डाला जाएगा ?

Ujjwal Bhattacharya लम्बे समय से जर्मनी में रह रहे आधे जर्मन और पूरे भारतीय उज्ज्वल भट्टाचार्य को कविता की दुनिया में आमतौर पर एक शानदार अनुवादक के रूप में जाना जाता है. एरिष फ्रीड, बर्तोल्त ब्रेष्ट, हान्स माग्नुष एन्त्सेबर्गर और गोएठे की कविताओं के उनके द्वारा किये अनुवाद पुस्तक रूप में आ चुके हैं. लेकिन लम्बे समय से उन्होंने लगातार कविताएँ लिखी हैं. उनकी कविताएँ एक बेचैन राजनीतिक कार्यकर्ता की कविताएँ हैं. अपने समय की विडम्बनाओं से जूझते वह अपने पक्ष में मज़बूती से खड़े ही नहीं रहते बल्कि गहन वैचारिकता के साथ इस "पक्ष" के भीतर के अंतर्द्वंद्व से भी लगातार गुज़रते हैं.

„Kulturkritik findet sich der letzten Stufe der Dialektik von Kultur und Barbarei gegenüber: nach Auschwitz ein Gedicht zu schreiben, ist barbarisch, und das frisst auch die Erkenntnis an, die ausspricht, warum es unmöglich ward, heute Gedichte zu schreiben.“ – Theodor Adorno “सांस्कृतिक आलोचना संस्कृति और बर्बरता के द्वंद्व के आख़िरी पायदान पर है : आउषवित्ज़ (ऑश्वित्ज़) के बाद एक कविता …

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