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चौपट अर्थव्यवस्था : देश को अँधेरी गलियों में ले जाने में माहिर हैं मोदी जी !

अँधेरी गलियों में ले जाने में माहिर हैं मोदी जी ! आरबीआई (RBI) से लिए एक लाख सत्तर हजार करोड़ रुपये (one lakh seventy thousand crore rupees) का इस्तेमाल कैसे होगा, यह बात देश की वित्तमंत्री (finance minister of the country) को भी नहीं पता। अलबत्ता चारण गान में जुटा मीडिया और सांप्रदायिक द्वेष की पट्टियां आँखों पर बांधे बीजेपी के साइबर भड़ैत प्रतिपादित कर रहे हैं कि यह अर्थव्यवस्था को रफ़्तार देने के लिए लिये गये हैं।

ये वही लोग हैं जो लोकसभा चुनावों से पहले तक बर्बाद हो चुकी अर्थव्यवस्था पर पर्देदारी केलिए समवेत स्वर में गा रहे थे- “बागों में बहार है।”

ये वही लोग हैं जो नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबन्दी के जरिये एक साथ समस्त भारतीयों को गड्ढे में धकेलने के मूर्खतापूर्ण तानाशाही फैसले को महानतम निर्णय निरूपित कर रहे थे। वे इससे कालाधन भ्रष्टाचार आतंकवाद समाप्ति का विश्वास जगा कर महापीड़ा झेलने को लोगों को तैयार कर रहे थे।

Madhuvan Dutt Chaturvedi मधुवन दत्त चतुर्वेदी लेखक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं।
Madhuvan Dutt Chaturvedi मधुवन दत्त चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं।

ये वही लोग हैं जो नरेंद्र मोदी द्वारा 100 दिन में विदेशों में जमा काला धन वापस लाने की घोषणाओं के ढिंढोरे पीट रहे थे। टुकड़े-टुकड़े क्रूर आपातकाल के जरिये काश्मीर आसाम और देश के अनेक हिस्सों में नागरिकों को उनकी स्वतंत्रता से वंचित किये जाने का ऐसे लोग औचित्य सिद्ध करने में सरकार से आगे खड़े होते हैं। यही नहीं, मोदी सरकार के इन बुरे फैसलों को लोकसमर्थन के मिथ्या प्रचार के द्वारा विपक्ष विहीन भारत बनाकर जनता को कमजोर करने में जुटे हैं।

कुम्भों, मेलों, त्यौहारों, नेता के विज्ञापनों, प्रचार और विदेश यात्राओं पर अकूत धन खर्च करने वाली मोदी सरकार से उम्मीद यही की जा सकती है कि वह इस धन का प्रयोग सिर्फ सियासी अय्याशी के लिए और सत्ता की नाजायज ताकत के लिए कर पाएगी। इससे अर्थव्यवस्था को रफ़्तार के किस्से भी बाकी असफलताओं के किस्सों की कड़ी होंगे।

मधुवन दत्त चतुर्वेदी

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