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Mohan Bhagwat Vigyan Bhawan
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जानिए इस वक्त भागवत बुरी तरह घबराए हुए क्यों हैं

जानिए इस वक्त भागवत बुरी तरह घबराए हुए क्यों हैं

विश्व हिंदू कांग्रेस में बोले मोहन भागवत, ‘एकजुट हों हिंदू, जंगली कुत्ते अकेले शेर का शिकार कर सकते हैं’

अमरेश मिश्रा

हिन्दुओं को एक साथ रखना बहुत मुश्किल काम है’! ‘जंगली कुत्ते एक अकेले शेर पर टूट पड़ेंगें’!

मोहन भागवत ने शिकागो में चल रही वर्ल्ड हिन्दू कांग्रेस में जो उपरोक्त बातें अपने संबोधन में कही हैं, उनका शेर या कुत्तों से कोई लेना-देना नहीं है।

इन वाक्यों में सत्ता में होने के बावजूद आरएसएस की गिरती साख पर उनका दर्द और हताशा साफ़ साफ़ झलक रही है।

प्रणब दा की संघ कार्यालय यात्रा भी इच्छित परिणाम लाने में नाक़ाम रही। यह इस बात की तरफ भी इशारा है कि आरएसएस को यह अहसास होने लगा है कि मोदी और शाह समेत सारे संघी दिन-ब-दिन अकेले पड़ते जा रहे हैं।

उलटे पड़ गए संघ के पासे

हाई लाइट्स
– मोहन भागवत ने विश्व हिंदू कांग्रेस में कहा कि हिंदुओं को एकजुट होना चाहिए
– आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि यदि शेर अकेला रहे तो जंगली कुत्ते भी शिकार कर सकते हैं
– संघ प्रमुख ने कहा, ‘हिंदू समाज तभी समृद्ध होगा जब वह समाज के रूप में काम करेगा।’

दलित और ओबीसी इनसे दूरी बनाए हुए हैं और सवर्ण हिन्दू नए एस/एसटी एक्ट के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। जबकि संघ का मानना था कि एस/एसटी एक्ट इनके सर पर ताज की तरह सजेगा और मुट्ठी में एक मजबूत दलित कार्ड के साथ संघ देश की मुख्यधारा में एक धमाकेदार एंट्री कर जाएगा।

मगर संघ के पासे उलटे पड़ गए। अब न निगलते बन रहा है और न उगलते!

भागवत जानते हैं कि 2019 नज़दीक आता जा रहा है…समय बहुत ही कम है और भाजपा ने खुद को एक ऐसे जाल में फंसा लिया है जहां पार्टी चुनाव जीतने के लिए मात्र दो व्यक्तियों पर आश्रित हो गई है: एक जिसका करिश्मा संदेहास्पद है और दूसरा जो बेइंतहा कपटी है!

परिदृश्य निराशा पैदा कर रहा है। आरएसएस को मालूम है कि मीडिया सहित वाद-संवाद के सारे माध्यमों को कब्ज़े में लेने के बावजूद इनके विचारों को परास्त होना पड़ रहा है।

अपने ही बुने जाल में फंसता जा रहा है खुद शिकारी

आरएसएस को एक बना-बनाया खेल बिगड़ता दिखाई दे रहा है। शिकारी खुद अपने ही रचे जाल में फंसता जा रहा है। ठीक ऐसा ही 1947, 1970, 1980 और यहाँ तक कि 2004 में भी आरएसएस के साथ हुआ था। संघ थोड़ा थोड़ा ऊपर चढ़ता है–फिर भरभरा के गिर पड़ता है।

भागवत अपनी सभा में राहुल गांधी को आमंत्रित कर रहे हैं। वह ऐसे लोगो से संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं जो उनकी विचारधारा के घोर विरोधी हैं।

भागवत बुरी तरह घबराए हुए हैं…बेहद असुरक्षित हैं इस वक़्त…

(अमरेश मिश्रा, लेखक वरिष्ठ पत्रकार व फिल्मकार हैं।)

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