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चुनावी फ़िज़ा में ज़हर नहीं घोल पा रही मोदी की भाजपा

चुनावी फ़िज़ा में ज़हर नहीं घोल पा रही मोदी की भाजपा

चुनावी फ़िज़ाओं में ज़हरीली हवाओं को नहीं चला पा रही मोदी की भाजपा

MP assembly elections

भोपाल से तौसीफ़ क़ुरैशी

भोपाल। पाँच राज्यों में हो रहे विधानसभा के चुनावों में नागपुरिया सोच चुनावी फ़िज़ाओं में ज़हरीली हवा को चला पाने में नाकाम होती दिख रही है। इन पाँच में से दो ऐसे राज्य हैं, जहाँ पिछले 15-15 सालों से भाजपा सत्ता की कुंजी लिए बैठी है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, दोनों प्रदेश भाजपा के पास चले आ रहे हैं लेकिन मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की चुनावी फ़िज़ा इस बार बदली-बदली सी नज़र आ रही है। लगता है आम जनता इस बार मोदी की भाजपा से क़तरा रही है। या तो जनता पंद्रह सालों के कार्यों से दुखी हो गई है या अब बस बदलाव करना चाहती है। इसका अंदाज़ा राजधानी भोपाल से चलकर जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते जा रहे हैं, हमें अहसास होता जा रहा है कि कैसे सत्ता की दहलीज में सन्नाटा पसरा है।

इस बार नहीं होगा शिवराज का तिलक

Who will win in madhya pradesh assembly election

बुद्धिजीवी वर्ग से चर्चा करने पर पता चलता है कि वह सरकार के जाने की नहीं, आने वाली सरकार को लेकर विचार-विमर्श कर रहे हैं। हमने सभी लोगों से सम्पर्क करने की कोशिश की और उनका मिज़ाज जाना और टटोला। राहगीरों से लेकर नौजवान बच्चे, छोटे उद्योगपतियों, ऑटो ड्राइवर, सभी लोगों का मानना है कि इस बार राज तिलक शिवराज सिंह चौहान का नहीं, कांग्रेस के किसी नेता का होगा। बल्कि वह तो नाम भी बता रहे हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया का होगा।

मघ्य प्रदेश की जनता अपने बदले सियासी मिज़ाज की गवाही दे रही है। मध्य प्रदेश का चुनाव धीरे-धीरे अपने मुक़ाम पर पहुँच चुका है। मोदी की भाजपा व कांग्रेस, चुनाव परिणाम अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताक़त लगा रहे हैं।

कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने एक ट्वीट कर एक घोषणा की कि अगर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो पुलिस को साप्ताहिक अवकाश दिया जाएगा और ड्यूटी के समय में भी कमी की जाएगी। इसके साथ ही आवास भत्ता पाँच हज़ार कर दिया जाएगा। इसका अर्थ हुआ एक पुलिसकर्मी को सालाना साठ हज़ार रू मिलेंगे। पिछले पंद्रह सालों के शासन में भाजपा भी यह वादा तो करती थी, पर किया कुछ नहीं। वैसे भाजपा चुनाव जीतने के लिए ऐसे जुमले बोल देती है, यह ज़रूरी नहीं कि हर जुमले को पूरा करे। अब सवाल यह भी उठता है कि कांग्रेस भी तो चुनाव जीतने के बाद इसे जुमला या कुछ और कह सकती है, उस पर क्यों भरोसा करे पुलिसकर्मी ? लेकिन एक दल पिछले पंद्रह सालों से वादा करता चला आ रहा है, परन्तु कर नहीं रहा। कांग्रेस अब वादा कर रही है इस पर भरोसा करने के अलावा कोई चारा नहीं है, उसको परखे बिना यह नहीं कहा जा सकता है वह भी नहीं करेगी। पुलिस कर्मियों के लिए यह बड़ा तोहफ़ा ही कहा जा सकता है।

मजबूती से चुनाव लड़ रही है कांग्रेस

Congress is firmly contesting election

दो दिन की चुनावी चकल्लस को देखने के बाद यही कहा जा सकता है कि इस बार कांग्रेस जहाँ भी चुनाव लड़ रही है, वह बहुत ही मज़बूती के साथ लड़ रही है। हमने छत्तीसगढ़ में भी देखा और अब मध्य प्रदेश में भी देख रहे हैं।

बदलते राजनीतिक मिज़ाज की गवाही चौपालें दे रही हैं, जिस भी चौपाल पर जाते हैं, कांग्रेस मज़बूती से झूठ पर बनी सियासी ताक़त को हिलाती दिख रही है।

राजनीतिक चहल कदमी की मिसाल समझे जाने वाली राजनीतिक गलियारों की इमारतें भी मुस्तकबिल की इबारत बयां कर रही हैं, हालाँकि अभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करिश्मे का इंतज़ार है, पर ऐसा नहीं लगता कि इस बार मोदी का करिश्मा कुछ असर करेगा। एक टीवी चैनल की परिचर्चा में जिस तरह से लोगों ने मोदी को चोर के नारों से गोदी मीडिया का मंच गुंजा दिया और ज़बान चलाने व झूठे सपने दिखाने में माहिर संबित पात्रा को बोलने तक नहीं दिया, बल्कि उसकी आवाज़ तक नहीं निकल रही थी और कांग्रेस व उसके समर्थक हावी हो रहे थे व गोदी मीडिया की एंकर चाहकर भी अपने शुभचिंतक की मदद नहीं कर पा रही थी, क्योंकि वहाँ की हवा का मिज़ाज मोदी की भाजपा के ख़िलाफ़ था। यही हाल पूरे मध्य प्रदेश का लग रहा है। ऐसे में मोदी की भाजपा के पास बस एक ही फ़ार्मूला बचा है कि वह लोगों की धार्मिक भावनाओं को उभारने का प्रयास करे। पर हालात देखकर नहीं लगता कि उसकी यह चाल अब काम करे, क्योंकि जनता उन्हें समझ गई है कि किस तरह धार्मिक भावनाओं को उसने चुनाव जीतने का धन्धा बना लिया है, करना कुछ नहीं धार्मिक आधार पर वोट लेकर ज़्यादा दिनों तक सत्ता में बने नहीं रहा जा सकता है।

मोदी की भाजपा पर संकट के बादल

Modi's BJP over crisis

इस बार भाजपा फेल क्यों हो रही वह यह बहाना बना लेती थी कि हमारी सरकार केन्द्र में नहीं थी इस लिए हम कुछ नहीं कर पाए, लेकिन इस बार वह यह बहाना भी नहीं बना पा रही है। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र में 24 गाँवों के किसानों की इच्छामृत्यु की माँग चौहान के गले की फाँस बन रही है। दतिया, भिंड, शिवपुरी, गुना, सागर, छत्तरपुर, सतना व रीवा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभाओं में भीड़ न जुटना भी संकट के बादलों की गवाही देता है। कुछ भाजपा नेता दबी ज़ुबान से ये स्वीकार करते हैं कि इस बार पता नहीं क्यों हमारे मौसम के मिज़ाज में बदलाव दिख रहा है, जनता मोदी की भाजपा से खिन्न सी लग रही है और राहुल गांधी की ओर उम्मीद भरी नज़रों से देख रही है।

कांग्रेस के दफ़्तर में मौजूद भीड़ बता रही है कि प्रदेश की सियासत का मिज़ाज कांग्रेस की ओर है। अब यह तो परिणाम आने के बाद तय होगा कौन प्रदेश की सियासी सूरमा होगा और कौन प्रदेश की सियासत में मात खाएगा।

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