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योगीराज में बेसिक शिक्षा विभाग के सामने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश भी बेकार

लखनऊ। सर्वजन हिताय संरक्षण समिति, उप्र ने प्रदेश के मुख्य मन्त्री योगी आदित्यनाथ से मॉंग की है कि वे प्रभावी हस्तक्षेप करें जिससे बेसिक शिक्षा विभाग में मा सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय लागू हो सके और शिक्षकों को अनावश्यक रूप से अदालतों के चक्कर न लगाने पड़ें। समिति के स्थापना दिवस पर हाइडिल फील्ड हॉस्टल में हुई आम सभा में इस बात पर शिक्षकों में आक्रोश दिखा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार पदोन्नति में आरक्षण का लाभ पाकर पदोन्नति पाए शिक्षकों को बेसिक शिक्षा में अभी तक रिवर्ट नहीं किया गया है जिससे सामान्य व् अन्य पिछड़ी जाति के सीनियर शिक्षकों की पदोन्नति नहीं हो पा रही है जबकि प्रदेश के अन्य सभी विभागों में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार पदावनति प्रक्रिया दो साल पहले पूरी की जा चुकी है।

सर्वजन हिताय संरक्षण समिति, उप्र के अध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने हेतु प्रदेश के मुख्य सचिव ने 21 अगस्त 2015 को सभी विभागों को आदेश भेज कर निर्देशित किया था कि ऐसे सभी कार्मिकों को जो पदोन्नति में आरक्षण का लाभ पाकर 16 नवम्बर 1997 से 28 अप्रैल 2012 के बीच पदोन्नत हुए हैं, उन्हें पदावनत कर दिया जाए और इससे रिक्त होने वाले पदों पर वरिष्ठता के अनुसार पदोन्नतियां की जाएँ। इस आदेश का सभी विभागों ने पालन किया किन्तु बेसिक शिक्षा विभाग में आज तक इस आदेश का पालन नहीं किया गया है जिससे शिक्षकों में भारी रोष व्याप्त है।

सर्वजन हिताय संरक्षण समिति, उप्र का आरोप है कि बेसिक शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार के चलते विगत सरकार के समय सुप्रीम कोर्ट का निर्णय लागू नहीं किया गया किन्तु सरकार बदलने के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों का उपेक्षापूर्ण रवैय्या चल रहा है और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की अवमानना की जा रही है। लखनऊ, रायबरेली और वाराणसी के प्राथमिक शिक्षकों को इलाहाबाद हाई कोर्ट में इस बाबत अवमानना याचिका दाखिल करनी पडी तब इन जिलों में विगत माह सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार जूनियर शिक्षकों को रिवर्ट करने और उनका वेतन फ्रीज करने की कार्यवाही शुरू हुई है। समिति का सवाल है क्या बेसिक शिक्षा विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा रहेगा और प्रदेश के सभी 75 जिलों के शिक्षकों को निर्णय लागू कराने हेतु अवमानना याचिका दाखिल कानी पड़ेगी।

समिति के अध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे ने मुख्य मन्त्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख कर इस ओर ध्यानाकर्षण कराते हुए मांग की है कि वे प्रभावी हस्तक्षेप करें जिससे प्राथमिक शिक्षक सुप्रीम कोर्ट का निर्णय लागू कराने हेतु हाई कोर्ट में समय और पैसा व्यय करने हेतु विवश न हों और अपना पूरा समय बच्चों को पढ़ाने में लगा सकें। उन्होंने कहा कि दो वर्ष बाद भी सुप्रीम कोर्ट का निर्णय लागू न होना बहुत गंभीर मामला है जिसमे यदि अब भी कार्यवाही न हुई तो सर्वजन हिताय संरक्षण समिति प्रांतव्यापी आंदोलन प्रारम्भ करने हेतु बाध्य होगी जिसकी सारी जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग और सरकार की होगी।

सर्वजन हिताय संरक्षण समिति, उप्र की आम सभा में ए ए फारुकी, एच एन पाण्डेय, राजीव सिंह, एस एस निरञ्जन, वाई एन उपाध्याय, रीना त्रिपाठी, बी एस गाँधी, निशा सिंह, ए पी सिंह, चन्द्र प्रकाश अग्निहोत्री, राजीव श्रीवास्तव, अजय तिवारी, त्रिवेणी मिश्र, सुरेश तिवारी, अमर कुमार, अनिल सिंह, राम सिंह मोहन जी श्रीवास्तव, धनञ्जय द्विवेदी, लखन अवस्थी, अश्वनी उपाध्याय मुख्यतया उपस्थित थे।

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