ट्रंप के दौरे से पहले कांग्रेस ने जीएसपी का मुद्दा उठाया, संकट में मोदी !

Once again, Congress questioned the publicity program of the much-hyped Modi-Trump

नई दिल्ली, 23 फरवरी 2020. रविवार को एक बार फिर कांग्रेस ने बहुप्रचारित मोदी-ट्रंप के सार्वजनिक कार्यक्रम को लेकर सवाल खड़ा किया। उन्होंने इसे सामान्य तरजीही व्यवस्था (जीएसपी) से जोड़ा, जिसे अमेरिका खत्म कर चुका है।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट किया,

“अमेरिका ने पांच जून 2019 को सामान्य तरजीही व्यवस्था (जीएसपी) के तहत भारत को शुल्क मुक्त आयात की सुविधा देनी बंद कर दी। इससे अमेरिका में 5.6 अरब डॉलर का भारतीय निर्यात प्रभावित हुआ, जिसमें रत्न, आभूषण, चावल, चमड़ा आदि शामिल हैं।”

उन्होंने कहा,

“हाउडी मोदी’ एवं ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसे कार्यक्रमों के बाद क्या प्रधानमंत्री जीएसपी दर्जा को बहाल किया जाना सुनिश्चित करेंगे?”

यह पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के समय जीएसपी का मुद्दा उठाया है।

शुक्रवार को कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा था,

“इस यात्रा को सिर्फ फोटो खिंचाने या पीआर कार्य तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इससे हमारे साझेदारी का महत्व कम होगा, जो कि भारत के राष्ट्रीय हित में नहीं होगा।”

उन्होंने कहा था कि भारत को जीएसपी बहाली करने व विकासशील देश की मान्यता देने के मुद्दों को उठाना चाहिए।

संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के कार्यालय ने पूर्व में भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था में वर्गीकृत किया था, जिससे यह अमेरिका द्वारा सभी विकासशील देशों को दिए जाने वाले लाभ पाने के लिए अयोग्य हो गया।

Donate to Hastakshep
नोट - हम किसी भी राजनीतिक दल या समूह से संबद्ध नहीं हैं। हमारा कोई कॉरपोरेट, राजनीतिक दल, एनजीओ, कोई जिंदाबाद-मुर्दाबाद ट्रस्ट या बौद्धिक समूह स्पाँसर नहीं है, लेकिन हम निष्पक्ष या तटस्थ नहीं हैं। हम जनता के पैरोकार हैं। हम अपनी विचारधारा पर किसी भी प्रकार के दबाव को स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए, यदि आप हमारी आर्थिक मदद करते हैं, तो हम उसके बदले में किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे। OR
उपाध्याय अमलेन्दु:
Related Post
Recent Posts
Donate to Hastakshep
नोट - हम किसी भी राजनीतिक दल या समूह से संबद्ध नहीं हैं। हमारा कोई कॉरपोरेट, राजनीतिक दल, एनजीओ, कोई जिंदाबाद-मुर्दाबाद ट्रस्ट या बौद्धिक समूह स्पाँसर नहीं है, लेकिन हम निष्पक्ष या तटस्थ नहीं हैं। हम जनता के पैरोकार हैं। हम अपनी विचारधारा पर किसी भी प्रकार के दबाव को स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए, यदि आप हमारी आर्थिक मदद करते हैं, तो हम उसके बदले में किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे। OR
Donations