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चरणजीत सिंह चन्नी : पंजाब में कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक

पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को नया मुख्यमंत्री बनाए जाने पर संपादकीय टिप्पणी. पंजाब की कांग्रेस सरकार में बदलाव का देश की राजनीति में क्या असर होगा ? जानिए क्या सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने यहां भी व्यावहारिक बुद्धि से काम लिया है?

देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today.

पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को नया मुख्यमंत्री बनाए जाने पर संपादकीय टिप्पणी | Editorial remarks on Charanjit Singh Channi’s appointment as new Chief Minister of Punjab

देश की राजनीति (country politics) में इस वक्त एक ओर विधानसभा चुनाव की गहमागहमी है, तो वहीं मुख्यमंत्रियों के बदलाव का सिलसिला भी जारी है। अभी पिछले हफ्ते गुजरात में भाजपा सरकार ने विजय रूपाणी को मुख्यमंत्री पद से हटाकर भूपेन्द्र पटेल के हाथ में सत्ता सौंप दी। और शनिवार को पंजाब की कांग्रेस सरकार में बदलाव (Change in Congress government of Punjab) देखने मिला।

अपने अपमान की शिकायत करते हुए अपना इस्तीफा सौंप दिया कैप्टन अमरिंदर सिंह ने

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पार्टी में अपने अपमान की शिकायत करते हुए अपना इस्तीफा सौंप दिया और बताया जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Congress President Sonia Gandhi) ने खेद प्रकट करते हुए उनके इस्तीफे को स्वीकार भी कर लिया। सोनिया गांधी की यह प्रतिक्रिया संतुलित और व्यावहारिक थी, एक ओर उन्होंने स्व. राजीव गांधी के साथ अमरिंदर सिंह के पुराने संबंधों का मान रखा, दूसरी ओर राजनीति की वर्तमान जरूरतों का ध्यान रखा।

पंजाब में एक लंबे वक्त से कांग्रेस के भीतर कलह चल रही थी, जिसमें एक छोर पर कैप्टन अमरिंदर सिंह थे और दूसरे छोर पर नवजोत सिंह सिद्धू। इन दोनों के बीच शक्तिप्रदर्शन में नुकसान कांग्रेस का हो रहा था, इसलिए किसी फैसले पर पहुंचना लाजमी था।

घट रही थी कैप्टन अमरिंदर सिंह की लोकप्रियता | Capt Amarinder Singh’s popularity was declining

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस को दीर्घकाल तक अपनी सेवाएं दी हैं। और कांग्रेस ने भी उनके चेहरे पर चुनाव लड़ा, उन्हें 2002 में और 2017 में दो बार मुख्यमंत्री बनाया। लेकिन पिछले कुछ वक्त से कैप्टन अमरिंदर सिंह की लोकप्रियता घट रही थी, जनता से उनका सीधा संपर्क कम हो रहा था और सबसे बड़ी बात कांग्रेस विधायकों के बीच उन्हें लेकर काफी नाराजगी दिखाई दे रही थी। इसका असर आगामी चुनाव पर गलत हो सकता था।

इस बीच अपने बड़बोलेपन के लिए कुख्यात नवजोत सिंह सिद्धू ने भी कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल लिया था। एक वक्त ये कयास भी लग रहे थे कि सिद्धू आम आदमी पार्टी में जा सकते हैं। हालांकि सिद्धू की उच्छृंखलता के बावजूद कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया।

नवजोत सिंह सिद्धू के तेवर इसके बाद भी शांत नहीं हुए, और उन्होंने ईंट से ईंट बजा देने जैसे बयान दिए। सिद्धू खेमे के विधायक अक्सर इस बात को मीडिया में उछालने लगे कि पंजाब में कांग्रेस के लिए मुख्यमंत्री का चेहरा कैप्टन नहीं होंगे। जाहिर तौर पर नवजोत सिंह सिद्धू के लिए लंबी पारी खेलने की पिच तैयार की जा रही थी। हालांकि अब कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के एक दिन बाद ही चरणजीत सिंह चन्नी को नया मुख्यमंत्री बनाया गया है, जो नवजोत सिंह सिद्धू के करीबी माने जाते हैं।

चन्नी के पहले सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए आगे चल रहा था, लेकिन कैप्टन खेमा और सिद्धू खेमा दोनों ही जगह उनके नाम पर सहमति नहीं बन पा रही थी। सिद्धू तो अपने लिए मुख्यमंत्री पद चाहते थे, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी ओर से ये चेतावनी पहले ही दे दी थी कि अगर सिद्धू के नाम पर मुहर लगेगी तो फिर कांग्रेस को सदन में बहुमत साबित करना होगा।

राजनीति ऐसे ही अप्रत्याशित दावों और बयानों का मंच है। कैप्टन अमरिंदर सिंह को अब तक अपने अपमान की शिकायत थी, लेकिन उन्होंने भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

Sonia Gandhi and Rahul Gandhi acted with practical intelligence

मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने नवजोत सिंह सिद्धू को पाकपरस्त बताने की कोशिश की, वहां के प्रधानमंत्री और पूर्व क्रिकेटर इमरान खान से उनकी दोस्ती का हवाला दिया। राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता में इस तरह के दांव-पेंच आजमाए जाते रहे हैं। लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक पल को भी शायद यह विचार नहीं किया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के लिए उनकी ऐसी टिप्पणियों से पार्टी का कितना नुकसान हो सकता है। क्या अपने तथाकथित अपमान का इस तरह बदला कैप्टन साहब लेना चाहते थे। वैसे कांग्रेस आलाकमान यानी सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने यहां भी व्यावहारिक बुद्धि से काम लिया है। नवजोत सिंह सिद्धू को मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूर रख कर संभावित विवादों को टाल दिया है।

Now the Congress is going to face more tough challenges.

लेकिन अब कांग्रेस के सामने और कड़ी चुनौतियां पेश आने वाली हैं। चुनावों के महज कुछ महीनों पहले इस तरह के बदलाव से विरोधियों को मजबूत होने के मौके मिलेंगे। खासकर आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल इस स्थिति का लाभ जरूर उठाना चाहेंगी। इन दलों को परोक्ष या प्रत्यक्ष भाजपा का साथ मिल जाए, तो कोई आश्चर्य नहीं है। कृषि कानूनों के विरोध के कारण पंजाब में भाजपा जिस कमजोरी को महसूस कर रही थी, उसे कांग्रेस की इस आंतरिक उठापटक ने नया टॉनिक दे दिया है।

वैसे कांग्रेस ने नए मुख्यमंत्री को चुनने और जातिगत समीकरण का ध्यान रखने में देर नहीं की, ये अच्छी बात है। अब कांग्रेस आलाकमान को पंजाब पर खास ध्यान देना होगा और जहां जो कमजोर कड़ी नजर आए, उसे बेदर्द होकर तोड़ना होगा। तभी कांग्रेस अपनी सत्ता बरकरार रख पाएगी।

आज का देशबन्धु का संपादकीय (Today’s Deshbandhu editorial) का संपादित रूप साभार.

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