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क्यों खतरे में हैं उत्तराखण्ड की अस्मिता?

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 Why is the identity of Uttarakhand in danger?

हल्द्वानी सम्वाद के संदर्भ में

बैठक के लिए आप सभी को शुभकामनाएं। हम लोग पत्रिका छपने की प्रक्रिया में फंसे हुए हैं, इसलिए आ नहीं सके। कृ पया अन्यथा न लें। हमें कल तक पत्रिका छाप देनी है।

बेहद जरूरी मुद्दे पर आपने यह पहल की है, इसका स्वागत है।

पिछले 21 साल में हम लोग सिर्फ भावनाओं में फंसे हुए हैं और व्यावहारिक राजनीति से कोसों दूर है।

राजनीतिक मसलों को भी भावनात्मक ढंग से सुलझा लेने की कोशिश में गहरे विभाजन और अलगाव के शिकार हैं, जबकि इस कठिन दौर में निरंकुश कॉरपोरेट फासीवादी सत्ता के लिए मेहनतकश आवाम को एकजुट करने की सबसे ज्यादा जरूरत है।

अस्मिता का मतलब क्या है? What does asmita (identity) mean?

उत्तराखण्ड के बुनियादी मसलों जल जमीन जंगल जलवायु और पर्यावरण के मुद्दों (Fundamental Issues of Uttarakhand – Water, Land, Forest, Climate and Environment Issues) पर एकताबद्ध राजनीतिक लड़ाई की जगह अस्मिता की राजनीति (politics of identity) को पहाड़ी बनाम गैर पहाड़ी मुद्दे (hill vs non hill issues) तक सीमित कर दिया गया है।

जबकि अस्मिता का मतलब भाषा, संस्कृति और पहचान को बनाये रखते हुए प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय जनता की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है।

बारबार भूमि माफिया की सरकारें बनाकर हम जनता को जल जंगल जमीन से बेदखल करने वाली ताकतों की जाने अनजाने मदद कर रहे हैं।

वैकल्पिक राजनीति चुनाव से पहले विशुद्ध चुनावी समीकरण बनाने के खेल से आगे नहीं बढ़ता।

बाकी चार साल हम अपनीअपनी खिचड़ी अलग पकाते हुए सत्ता से ज्यादा से ज्यादा अपना हिस्सा बटोरने की कोशिश करते हैं।

न्यूनतम कार्यक्रम के साथ जनता के बीच लगातार काम किये बिना हम कौन सी राजनीति कर रहे हैं?

उत्तराखंड में बदलाव की राजनीति में पहाड़ का महत्व | Importance of mountain in the politics of change in Uttarakhand

हम मानते हैं कि उत्तराखण्ड में बदलाव की राजनीति में पहाड़ का जितना महत्व है, उससे कम महत्व तराई और भाबर का नहीं है।

पहाड़ और तराई भाबर को अलग करने वाली किसी भी राजनीति के हम खिलाफ हैं और ऐसे किसी भी राजनीतिक विमर्ष में हम शामिल नहीं हो सकते।

हम नहीं आ सके, अगर जरूरी लगा तो मित्रों तक हमारी बात जरूर पहुंचा दें।

सन्दर्भ-

 Prabhat Dhyani: संगोष्ठी/ आमंत्रण

ख़तरे में है उत्तराखंडी अस्मिता?

प्रिय साथी/ महोदय,

उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनोंज़मीनों की निर्मम लूट, राज्य की अवधारणा एवं अस्मिता से हो रहे खिलवाड़ से आज राज्य का नागरिक समाज चिंतित व आक्रोशित है।

जिस आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक अस्मिता के लिए राज्य आंदोलन लड़ा गया था उसके सभी मोर्चों पर हम कमज़ोर हुए हैं।

सरकार के विकास के दावों के बावजूद उत्तराखंड  विस्थापन, बेरोज़गारीशिक्षा, स्वास्थ्य की बदहाली से जूझ रहा है।

जनता के इस आक्रोश से बचने के लिए राजनीतिक दल लूटखसोट की नीतियां बदलने के बदले चुनाव से पहले मुख्यमंत्रियों का चेहरा बदलने से इस आक्रोश को भटकाने का प्रयास कर रहे हैं।

इन महत्वपूर्ण सवालों पर गहन विचार हेतु उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी एवम राजनैतिक,सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों द्वारा  7 अगस्त 2021 शनिवार को प्रातः 11 बजे से ट्रिपल जे बिल्डिंग सभागार, छोटी मुखानी, निकट एसबीआई बैंक हल्द्वानी में एक संगोष्ठी आयोजित होने जा रही है ।जिसमें हल्द्वानी के अलावा अन्य क्षेत्रों से भी सक्रिय सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ता भागीदारी करेंगे।

स्थान:ट्रिपल जे बिल्डिंग सभागार,

छोटी मुखानी,

निकट SBI हल्द्वानी ।

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