वादा तेरा वादा… वादे पे तेरे मारा गया बन्दा मैं सीधा-सादा

लोकसभा चुनाव 2014 से पहले भाजपा ने किए थे लोकलुभावन वादे...बहुत हुई भ्रष्टाचार की मार- अबकी बार मोदी सरकार, बहुत हुई मँहगाई की मार- अबकी बार मोदी सरकार, बहुत हुई जनता पर पेट्रोल डीजल की मार-अबकी बार मोदी सरकार,

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Narendra Modi
 आज के परिवेश में सन 1972 में आई फिल्म दुश्मन का चर्चित गीत “वादा तेरा वादा, वादा-वादा तेरा वादा वादा; वादे पे तेरे मारा गया बन्दा मै सीधा-सादा, वादा तेरा वादा वादा” वर्तमान की केन्द्र सरकार पर फिट बैठता है।

लोकसभा चुनाव 2014 से पहले भाजपा ने किए थे लोकलुभावन वादे

भारतीय जनता पार्टी द्वारा आम चुनाव 2014 को जीतने के लिए अनेक वादे किये गए थे, भारतीय जनता पार्टी द्वारा सन 2013 में हाइवे, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड आदि हर स्थानों पर अनेक होर्डिंग्स नये-नये स्लोगन के साथ लगवाये गए थे और चलचित्र मीडिया पर हर 15 मिनट में स्लोगनों का प्रचार दिखाया जाता था जिनके बोल हुआ करते थे- बहुत हुई भ्रष्टाचार की मार- अबकी बार मोदी सरकार, बहुत हुई मँहगाई की मार- अबकी बार मोदी सरकार, बहुत हुई जनता पर पेट्रोल डीजल की मार-अबकी बार मोदी सरकार, बहुत हुआ रोजगार का इन्तजार-अबकी बार मोदी सरकार, बहुत खाई रूपये ने डॉलर से मार-अबकी बार मोदी सरकार आदि।

इन सब स्लोगनों द्वारा भारतीय जनता पार्टी ने जनता से अनेक वादे किये थे लेकिन आज उनका क्या हुआ ? क्या ये सब वादे चुनावी रणनीति का हिस्सा मात्र थे ? क्या चुनाव में वादे करते समय राजनैतिक पार्टियां जनता के विश्वास को जीतने और बाद में उसके विश्वास से खेलने का प्रयास करती हैं।

वर्तमान में यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि वर्ष 2014 के आम चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी और नरेन्द्र मोदी जी ने सबसे ज्यादा जिस विषय पर बल दिया और तत्कालीन कांग्रेस सरकार को जिस विषय के माध्यम से घेरने का प्रयास किया वह था विदेशों में पड़ा काला धन और उसकी वापसी, इसी काले धन को लेकर अनेक वादे आम जनमानस से किये गए और उनको नये-नये सपने दिखाए गए थे लेकिन आज इन वादों का क्या हुआ ?

Black money deposited in swiss bank of indians 

आज के परिदृश्य में उसी काले धन की बात की जाय तो स्विस बैंक में भारतीयों का जमा काला धन बढ़कर 20700 करोड़ रूपये पर पहुँच गया जो पिछले 13 वर्षों में सबसे ज्यादा है। साल 2019 के अन्त में स्विस बैंक में भारतीय ग्राहकों का कुल जमा काला धन 6625 करोड़ था जो कि पिछले दो वर्षों की गिरावट के विपरीत था, साल 2020 में स्विस बैंकों में कुल जमा राशि साल 2019 की तुलना में 286 प्रतिशत बढ़कर 20700 करोड़ रूपये हो गई, तो प्रश्न यह उठता है कि जब साल 2020 में भारत एक वैश्विक महामारी से लड़ रहा था तो ऐसे में ये कौन लोग थे जो देश की सम्पत्ति को बाहर के देशों में पहुँचाने में अपना ध्यान केन्द्रित किये हुए थे सरकार ने काले धन को वापस लाने के नाम पर 08 नवम्बर 2016 में पुराने चलन वाले नोटों को बन्द करके लोगों को लम्बी-लम्बी कतारों में ला खड़ा किया और उसका परिणाम इस दिशा में नगण्य रहा, काला धन तो वापस नही मिला, देशवासियों को मिला तो सिर्फ परेशानियों का सिला। अब स्विस बैंक में जमा धन राशि को देखकर लगता है कि वर्तमान सरकार के वादे तो केवल वादे हैं।

Wholesale Inflation Rate in India

इसी प्रकार महँगाई नियंत्रण पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा किये गए वादों के सन्दर्भ में दिए गए उनके स्लोगन 'बहुत हुई देश में महँगाई की मार-अबकी बार मोदी सरकार' को देख सकते हैं। आज महँगाई के सन्दर्भ में बात की जाय तो थोक मूल्य सूचकांक (डब्लू पी आई ) की रिपोर्ट के अनुसार भारत में थोक महँगाई दर मार्च 2021 में 7.39 प्रतिशत थी जो आठ सालों में सबसे उच्चतम है। रोजमर्रा के सामानों में बेतहाशा मूल्य वृद्धि ने आम जनमानस के जीवन स्तर को बुरी तरह प्रभावित किया है। मोदी सरकार अपने सात सालों के शासन संचालन के बाद भी महँगाई नियंत्रित करने में पूर्णतया असफल रही है।

बहुत हुई जनता पर पेट्रोल डीजल की मार-अबकी बार मोदी सरकार पेट्रोल हुआ 100 के पार

इसी क्रम में हम भारतीय जनता पार्टी द्वारा किये एक और वादे का जिक्र कर सकते हैं जिसका स्लोगन था 'बहुत हुई जनता पर पेट्रोल डीजल की कीमतों का वार-अबकी बार मोदी सरकार'। इस छदम वादे का परिणाम यह हुआ कि साल 2021 में पेट्रोल की कीमतों में 13 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई तथा साल 2021 में 50 बार पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में वृद्धि की गई जिसके परिणामस्वरुप आज देश के 135 जिलों में पेट्रोल 100 रूपये प्रति लीटर से भी अधिक पर मिल रहा है। सरकार द्वारा लगातार पेट्रोल डीजल की कीमतों में इजाफा किया जा रहा है जिसके चलते 4 मई, 2021 के बाद से अब तक देश में 29 किस्तों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ।

अप्रैल 2014 में दिल्ली में पेट्रोल 72.26 रुपया प्रति लीटर था और आज दिल्ली में पेट्रोल 97.22 रूपये में मिल रहा है जिसका पर्याय यह कि यूपीए सरकार की तुलना में पेट्रोल के कीमत में 24.96 रूपये की वृद्धि की  है।

मोदी जी द्वारा किये गए एक और महत्वपूर्ण वादे का जिक्र कर सकते है जिसका स्लोगन था 'बहुत हुआ रोजगार का इन्तजार-अबकी बार मोदी सरकार'

मोदी सरकार में बेरोजगारी दर

मोदी सरकार में बेरोजगारी दर पर नियंत्रण करने की बात की जाय तो इस क्षेत्र में यह सरकार पूर्णतया असफल रही है और बेरोजगारी दर 35 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है। वर्त्तमान में देश में बेरोजगारी की दर 6.1 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर है। मोदी सरकार नये अवसरों का सृजन करने में पूर्णतया असफल रही है तथा वर्त्तमान सरकार में नयी नौकरियों में 53 प्रतिशत की कमी आई है। यदि प्रति व्यक्ति आमदनी की बात की जाय तो 2019-20 में 1.34 लाख रूपये प्रति व्यक्ति आय के  मुकाबले साल 2020-21 में प्रति व्यक्ति आय घटकर 1.26 लाख रूपये प्रति व्यक्ति हो गई है। देश में इस समय बेरोजगारी की समस्या को दूर करने के लिए प्रतिदिन 33 हजार नौकरियों की आवश्यकता है जिसके सृजन में मोदी सरकार पूर्णतया असफल है।

Rupee has weakened against the dollar in the last seven years

इसी क्रम में एक और वादे का जिक्र वर्तमान के परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण हो जाता है जिसका स्लोगन था 'बहुत खाई रूपये ने डॉलर से मार-अबकी बार मोदी सरकार'। भारतीय जनता पार्टी ने डॉलर के मुकाबले रूपये की गिरती कीमतों पर तत्कालीन यूपीए सरकार को जमकर घेरा था जबकि 30 मई 2014 को एक डॉलर 58.95 रूपये के बराबर था परन्तु आज मोदी सरकार के सात साल बीत चुके हैं और डॉलर के मुकाबले रूपये में कमजोरी का दौर जारी है और आज एक डॉलर की कीमत 74.15 रूपये है। इस प्रकार पिछले सात सालों में रुपया डॉलर के मुकाबले 15.20 रुपया कमजोर हुआ है। इन चुनावी वादों और स्लोगनों के माध्यम से वर्तमान सरकार ने देश में दोबारा शासन करने की चाभी तो प्राप्त कर ली परन्तु जनता की आशाओं और आकाँक्षाओं का क्या ?

साल 2024 के आम चुनाव तक फिर नये-नये शब्दों का जाल बनाया जायेगा और नये-नये वादे किये जायेंगे। अतः अब इस प्रकार के लोकलुभावन वादे करने वाली राजनैतिक पार्टियों एवं राजनेताओं से जनता को सजग रहना होगा।            

डॉ रामेश्वर मिश्र

लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।

डॉ रामेश्वर मिश्र  लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।
डॉ रामेश्वर मिश्र लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।

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