कांग्रेस का जोखिम भरा निर्णय : क्या होगा देश की राजनीति पर असर?

चरणजीत सिंह चन्नी : पंजाब में नयी सरकार का क्या होगा देश की राजनीति पर असर? कांग्रेस का जोखिम भरा निर्णय उसे लाभ पहुंचाएगा या नुकसान? पंजाब में कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक क्या है?
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Charanjit Singh Channi

पिछले 3 दिनों की उथल-पुथल के बाद पंजाब में नयी सरकार अस्तित्व में आ गयी

उत्त्तर  भारत के पश्चिमी  सीमा से लगते पंजाब प्रदेश में पिछले तीन दिनों की उथल-पुथल के बाद नयी सरकार अस्तित्व में आ गयी (After the turmoil of the last three days, a new government came into existence in Punjab). आजादी के बाद से देश में सत्ता के शीर्ष व वर्चस्व पर रहने वाली कांग्रेस पार्टी वर्तमान में अपने जनाधार को बचाने व पुनर्स्थापित करने के लिये संघर्षरत  है.

कांग्रेस ने एक जोखिम भरा निर्णय लिया है

प्रदेश की परिस्थितियों को आने वाले विधानसभा के चुनावों के परिपेक्ष्य में देखते हुए प्रदेश में चुनाव से केवल चार महीने पहले मुख्यमंत्री को बदल कर पार्टी ने एक जोखिम भरा निर्णय लिया है. समाज के वंचित वर्ग से आये नेता को प्रदेश की कमान सौंप कर अपनी परम्परागत  राजनीति  से विपरीत एक शुरुआत की कोशिश की है जिससे विरोधी राजनीतिक दलों की जातिगत राजनीतिक चुनौतियों व समीकरणों  को धाराशायी किया जा सके।   कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व पर विगत में बने अविश्वास व अक्षमताओं की धारणा को भी इस निर्णय ने लगभग साफ कर दिया है।  

आम जनता के सरोकार को भूल कर सत्ता सुख तक सीमित हो जाने की प्रवृत्ति व क्षत्रपवादिता की संस्कृति, जो पार्टी को काफी समय से खाये जा रही थी, को तोडने की क्या भूमिका बनती है, ये आनेवाले समय में साफ होगा. लेकिन कांग्रेस ने अपने फैसले से एक और जहां पुराने दिग्गज नेताओं को स्पष्ट संकेत दे दिये हैं वहीं दूसरी और अपनी भविष्य की राजनीति की एक लकीर भी खींच दी है जिसका असर अन्य प्रदेशों की राजनीति  के साथ साथ विपक्षी दलों की राजनीति  पर पड़ना निश्चित दिखायी देता है.

There was deep resentment among the people of Punjab towards the policies of Akali Dal.

2017 में पंजाब विधानसभा चुनावों में (Punjab assembly elections in 2017) कांग्रेस को जो जीत मिली थी उसका श्रेय कैप्टन अमरिंदर सिंह (Capt Amarinder Singh) को मिला था. लेकिन वास्तविकता में पंजाब की जनता में अकाली दल की नीतियों के प्रति एक गहरा आक्रोश था. पंजाब में अकाली दल द्वारा पंथक भावनाओं के निरादर, किसानों की समस्याओं की अन्देखी, नशे के बढते प्रकोप, अलग अलग तरह के माफियों के संरक्षण से त्रस्त जनता ने कै. अमरिन्दर पर विश्वास जता कर जिन समाधानों के लिये सरकार को चुना था उनका कोई हल निकालने के लिये मुख्यमंत्री कै. अमरिन्दर ने कोई गंभीर प्रयास ही नहीं किये, बल्कि आमजनता के साथ- साथ अपने विधायकों से भी एक दूरी बना ली. कै. अमरिन्दर की कार्यशैली से प्रदेश में हर क्षेत्र में उभरते असंतोष की गूंज से केंद्रीय नेतृत्व  भी असंतुष्ट था.

पंजाब में नयी बनी सरकार के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने जिस तरह अपनी प्राथमिकताओं को पहले ही दिन रेखांकित किया है वह कै. अमरिन्दर सिंह की कार्यशैली के विपरीत प्रदेश की जनता के प्रति जवाबदेही पर केन्द्रित है. हालाकि समय की सीमितता और सरकारी तंत्र की उदासीनता की बड़ी चुनौती विकराल रूप में सामने खडी है. पार्टी में धडेबंदी की रस्साकशी से अलग सब को साथ ले कर चलने की मंशा को सूत्रधार बनाना भी स्पष्ट किया है.

चरणजीत सिंह चन्नी ने क्या कहा | What Charanjit Singh Channi said?

पारदर्शी सरकार दी जायेगी, किसी को भी अनावश्यक तंग नहीं किया जायेगा, संविधान सम्मत कार्य होंगे.

पुलिस की कार्यशैली को सुधारने को लेकर साफ किया कि कोई थानेदार, मुंशी, किसी को तंग नहीं करेगा, बिना वजह किसी को थाने नहीं बुलायेगा.

तहसीलों में सही तरीके से काम होगा.मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि या तो मैं रहूँगा या वो रहेंगे.

सरकारी तंत्र को दुरुस्त करने को लेकर कर्मचारियों से अधिकारियों तक को जनसुनवाई को निश्चित करने व समस्यायों के निदान के लिये सप्ताह में दो दिन आवश्यक रूप से कार्यालय में उपलब्ध रहने को कहा.

हर गरीब की पहुँच मुझ तक ओर अधिकारियों तक हो, ये सुनिश्चित किया जायेगा.

ऐसी व्यवस्था की जायेगी कि सब की समस्यायों का हल हो.

बिजली के रेटस में सुधार करके उपभोक्ताओं को राहत दी जायेगी.

सबसे महत्वपूर्ण गुरु साहिब की बेअदबी मामले में पूरा न्याय (Complete justice in the sacrilege case of Guru Sahib) किया जायेगा.

पंजाब की कृषि अधारित अर्थव्यवस्था को मुख्य कारक मानते हुए किसान अन्दोलन को खुला समर्थन और कृषि कानूनों को वापिस करवाने के प्रयास को अपनी प्रतिबद्धता कहा.

चरणजीत सिंह चन्नी ने नेतृत्व  की परिभाषा गढ़ने की नई कोशिश की

इन सब बातों से मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Chief Minister Charanjit Singh Channi) ने अपनी ज़िम्मेदारियों को स्पष्ट करते हुए नयी तरह के नेतृत्व  की परिभाषा गढ़ने की कोशिश की.

कांग्रेस के इस फैसले से पार्टी में बहुप्रतीक्षित एक नया संचार भी हुआ है.

राजनीतिक विशश्लेषक कांग्रेस के आकस्मिक फैसले का अचरज से आकलन कर रहे हैं।

जगदीप सिंह सिंधु

लेखक वरिष्ठ पत्रकार व स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं

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