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जब आप हस्तक्षेप की मदद करते हैं तो आप केवल एक उपहार नहीं देते हैं, बल्कि एक जनोन्मुखी स्वतंत्र पत्रकारिता की ग्यारह साल पुरानी विरासत को जारी रखने में मदद कर रहे होते हैं। हस्तक्षेप पर आपको वो खबरें और लेख पढ़ने को मिलते हैं जिन्हें कॉरपोरेट मीडिया, गोदी मीडिया और यहां तक कि पप्पू मीडिया भी प्रकाशित नहीं करता है।

हस्तक्षेप पिछले ग्यारह साल से तमाम आर्थिक कष्टों के बावजूद बिना रुके बिना झुके लगातार चल रहा है। आज जब तमाम वैकल्पिक मीडिया का दंभ भरने पोर्टल्स या तो सीधे-सीधे किसी राजनीतिक दल की छत्रछाया में चल रहे हैं या सीएसआर के नाम पर किसी कॉरपॉरेट के पैसे पर क्रांति का दंभ भर रहे हैं। और अब तो गोदी मीडिया के वो फुंके हुए कारतूस जो हफ्ते में 4 बार बगदादी को मारा करते थे, भूत प्रेत की कहानियां सुनाया करते थे, अन्ना आंदोलन को आजादी की दूसरी लड़ाई बताकर महिमामंडित कर रहे थे, वो भी वैकल्पिक मीडिया होने का दंभ भर रहे हैं।

ऐसे में हस्तक्षेप बिना किसी समझौते के चल रहा है।

यदि आप भारत में हैं तो दो महीने के लिए न्यूनतम एक हजार रुपए से मदद कर सकते हैं। यदि आप भारत से बाहर हैं https://www.paypal.com/paypalme/AmalenduUpadhyaya पर $100 से मदद कर सकते हैं।

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अंत में जरूरी बात

 'हस्तक्षेप' जनसुनवाई का मंच है। हम किसी भी राजनीतिक दल या समूह से संबद्ध नहीं हैं। हमारा कोई कॉरपोरेट, राजनीतिक दल, एनजीओ, कोई जिंदाबाद-मुर्दाबाद ट्रस्ट या बौद्धिक समूह स्पाँसर नहीं है, लेकिन हम निष्पक्ष या तटस्थ नहीं हैं। हम जनता के पैरोकार हैं। हम अपनी विचारधारा पर किसी भी प्रकार के दबाव को स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए, यदि आप हमारी आर्थिक मदद करते हैं, तो हम उसके बदले में किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे।

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नोट - 'हस्तक्षेप' जनसुनवाई का मंच है। हम किसी भी राजनीतिक दल या समूह से संबद्ध नहीं हैं। हमारा कोई कॉरपोरेट, राजनीतिक दल, एनजीओ, कोई जिंदाबाद-मुर्दाबाद ट्रस्ट या बौद्धिक समूह स्पाँसर नहीं है, लेकिन हम निष्पक्ष या तटस्थ नहीं हैं। हम जनता के पैरोकार हैं। हम अपनी विचारधारा पर किसी भी प्रकार के दबाव को स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए, यदि आप हमारी आर्थिक मदद करते हैं, तो हम उसके बदले में किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे।

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