क्या ‘सलाम’ कहना भी अब ‘साज़िश का आधार’ है ?

क्या ‘सलाम’ कहना भी अब ‘साज़िश का आधार’ है ? पिछले साल सितंबर में पिंजारा तोड़ के सदस्यों और जेएनयू के छात्रों देवांगना कलिता और नताशा नरवाल, जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा और छात्र कार्यकर्ता गुलफिशा फातिमा के खिलाफ मुख्य आरोप पत्र दायर किया गया था।
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Law cases leagal news

Is saying 'salaam' also now a 'basis of conspiracy'? : Vijay Shankar Singh

यूनाइटेड अगेंस्ट हेट (United Against Hate) के सदस्य खालिद सैफी ने शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत से कहा कि वह दिल्ली दंगों की साजिश मामले में (एफआईआर 59/2020) दायर चार्जशीट पर 20 लाख कागजात बर्बाद करने के लिए दिल्ली पुलिस के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामला दर्ज करेंगे।

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लीगल वेबसाइट, लाइव लॉ (Legal Website, Live Law) के अनुसार, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष पेश किए गए सैफी ने दंगों के एक अन्य मामले में शरजील इमाम की जमानत पर बहस (Argument on Sharjeel Imam's bail) करते हुए अभियोजन पक्ष द्वारा किए गए, तर्कों का भी उन्होंने उल्लेख किया, जिसमें यह तर्क दिया गया था कि 'अस-सलामु अलैकुम' शब्द यह दिखाने के लिए पर्याप्त है कि उनका भाषण एक विशेष समुदाय को संबोधित था।

सैफी ने कहा, "मैं हमेशा अपने दोस्तों को सलाम करता हूं। मुझे लगता है कि अगर यह गैरकानूनी है तो मुझे इसे रोकना होगा। मैं एनजीटी में मामला दर्ज करूंगा जब मैं जमानत पर बाहर हो जाऊंगा क्योंकि दिल्ली पुलिस ने इस चार्जशीट पर 20 लाख कीमती कागजात बर्बाद कर दिए हैं।"

इससे पहले, मामले में जमानत की अर्जी देने वाले सैफी ने अदालत के समक्ष कहा था कि, "नागरिकता संशोधन अधिनियम और एनआरसी के विरोध में उनकी भागीदारी के बारे में उन्हें किसी को भी स्पष्टीकरण देने की ज़रूरत नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को विरोध करने का संवैधानिक अधिकार है और यह जो अपने आप में किसी भी साजिश का संकेत नहीं है।"

प्राथमिकी (एफआईआर) में यूएपीए की धारा 13/16/17/18, शस्त्र अधिनियम की धारा 25 और 27 और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम, 1984 की धारा 3 और 4 सहित अन्य गम्भीर आरोप लगाए गए हैं। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता, 1860 के तहत भी विभिन्न अपराधों के भी आरोप लगाए गए हैं।

पिछले साल सितंबर में पिंजारा तोड़ के सदस्यों और जेएनयू के छात्रों देवांगना कलिता और नताशा नरवाल, जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा और छात्र कार्यकर्ता गुलफिशा फातिमा के खिलाफ मुख्य आरोप पत्र दायर किया गया था।

आरोप पत्र में कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां, जामिया समन्वय समिति के सदस्य सफूरा जरगर, मीरान हैदर और शिफा-उर-रहमान, निलंबित आप पार्षद ताहिर हुसैन, उमर खालिद, शादाब अहमद, तस्लीम अहमद, सलीम मलिक, मोहम्मद सलीम खान और अतहर खान शामिल हैं।"

इसके बाद, नवंबर में जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ फरवरी में पूर्वोत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा में कथित बड़ी साजिश से जुड़े एक मामले में एक पूरक आरोप पत्र दायर किया गया था।

और अंत मे इतनी गज़ब की कल्पनाशीलता भरी तफ्तीश के लिये दिल्ली पुलिस को सलाम !

विजय शंकर सिंह

लेखक अवकाशप्राप्त वरिष्ठ आईपीएस अफसर हैं।

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