मोदी के खून में व्यापार इसलिए फिर से साहूकारी दौर लाने पर आमादा, अपने खेत में ही बंधक बना लिये जाएंगे किसान

Narendra Modi flute

यही प्रधानमंत्री लॉकडाउन लगाने के समय कह रहे थे कि किसी एक व्यक्ति की भी नौकरी नहीं जाएंगी। देश में लगभग 20 करोड़ लोगों की नौकरी गई हैं पर मोदी की जुबान से एक शब्द भी नहीं निकला।

ऐसे लोग उन भेड़ियों से कम नहीं, जो महिला सशक्तीकरण का चारा महज़ जिस्मानी आज़ादी तक मानते हैं

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महिलाओं ने भी शोषक वर्ग के बनाएं सांचे शराब, सिगरेट, छोटे कपड़ों को, आधी रात सड़क पर घूमने को ही अपनी आजादी मान लिया, जबकि इससे उलट उनकी नजर में आज़ादी का मतलब होना था सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक पक्षधरता समानता और सुरक्षा।

किसान विरोधी कृषि कानूनों के विरुद्ध किसानों के भारत बंद का लोकमोर्चा ने किया समर्थन

Ajit Yadav, अजीत सिंह यादव

मोदी सरकार के तीनों कृषि कानून किसानों की गुलामी के दस्तावेज हैं। इन कानूनों के जरिये मोदी सरकार ने एक बार फिर देश के फेडरल ढांचे पर बड़ा हमला बोला है।

अगर पीएम ईमानदार हैं, तो एमएसपी का प्रावधान एक नया कानून बनाकर क्यों नहीं स्थाई किया जाता है ?

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सरकार ने कृषि सुधार की ओर कभी गंभीरता से ध्यान ही नहीं दिया। जबकि भारत की अर्थव्यवस्था का यह मूलाधार है। कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार की बात ही छोड़ दीजिए, विशेषज्ञ और अर्थशास्त्री भी यह नहीं समझ पाये कि देश और समाज को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने में किसान और खेती की ही भूमिका होती है, बड़े धनपशुओं की नहीं !

कोयला बिजली संयंत्रों के कानून तोड़ने से हर साल 88,000 बच्चे अस्थमा का शिकार हो जाते हैं

Climate change Environment Nature

थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाले ज़हरीले धुएं हमारे बच्चों के नव विकसित फेफड़ों के लिए घातक साबित होते हैं। इसकी वजह से बच्चों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, और लगातार ख़ांसी आने जैसे क्रोनिक रोगों को जन्म देते हैं।

हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव के साप्ताहिक एपिसोड में इस रविवार जगदीश पंकज का काव्य पाठ

हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव Jagdish Pankaj

इस रविवार हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव का यह अंतिम एपिसोड होगा। इसके बाद यदि संभव हुआ और संसाधन हुए तो नए सिरे से हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव का पुनः प्रसारण होगा, अन्यथा यह अंतिम एपिसोड होगा।

आरएसएस-भाजपा के अधिनायकवादी प्रोजेक्ट पर अखिलेन्द्र प्रताप सिंह का महत्वपूर्ण लेख

Akhilendra Pratap Singh

यह सही है कि मोदी सरकार के विरूद्ध आंदोलन उभर रहे हैं। नागरिक, सामाजिक और डॉक्टर अम्बेडकर के विचारों पर चल रहा दलित आंदोलन दमन का मजबूती से विरोध कर रहा है लेकिन इन धाराओं की राजनीतिक उपस्थिति नहीं है। यही वह बिंदु है जहां इन आंदोलनों को अपने को पुनर्परिभाषित करना चाहिए और देश के सामने आई राजनीतिक चुनौती को स्वीकार करना चाहिए।

कोरोना बढ़ रहा है, सीमा पर मामला संवेदनशील होता जा रहा है, मन्दिर, तीन तलाक, धारा 370 से अब लोगों को बरगलाया नहीं जा सकता।

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पूंजीवादी व्यवस्था में किसी व्यापारी, किसी उद्योगपति की कोई सामाजिक भूमिका नहीं होती। उसका काम केवल अधिक से अधिक मुनाफा कमाना होता है। जब मुनाफा कम होने लगता है तो वह उस व्यापार से हाथ खींच लेता है और उद्योगों में तालाबन्दी (Lockout in industries) कर देता है।

चलता चल संभलना सीख पेज से ऑनलाइन कार्यक्रम

Literature news

चलता चल संभलना सीख पेज से ऑनलाइन कार्यक्रम “कवि, कविता और हम” शीर्षक से अंतर्राष्ट्रीय कवियों के साथ एक शाम साहित्य समाचार Literature news नई दिल्ली, 23 सितंबर 2020. चलता चल और संभालना सीख पेज के माध्यम से एक ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन गूगल मीट पर आगामी 27 सितंबर 2020 को किया जा रहा